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Jind News: नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहीं स्कूली बसें
Tue, 08 Apr 2025 11:58 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 08 Apr 2025 11:58 PM IST
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08जेएनडी06-निजी स्कूल बस की जांच करती डीटीओ की टीम। संवाद
जींद। आपके बच्चे कंडम स्कूल बस में तो सफर नहीं कर रहे। उस स्कूल की बसें नियमों को ताक पर रखकर तो नहीं चलाई जा रहीं। इसलिए बच्चों के सुरक्षित सफर को लेकर अभिभावकों को भी आगे आना चाहिए, क्योंकि स्कूल बसों के हादसे लगातार हो रहे हैं। सोमवार को डाहौला में बस चालक की लापरवाही से नर्सरी कक्षा के चार वर्षीय छात्र की मौत हो गई। ऐसे में बच्चों का सफर सुरक्षित कैसे हो सकता है। जिले के निजी स्कूलों की बसें नियमों के अनुसार नहीं दौड़ रहीं हैं। जिला की 58 स्कूल बसें ऐसी मिली हैं, जिनमें फायर सिस्टम नहीं है। यह खुलासा आरटीए (डीटीओ) की टीम की जांच में हुआ है। यदि बस में आग की घटना हो जाए तो फायर सिस्टम बिना आग पर कैसे काबू पाया जा सकता है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रदेश सरकार के सख्त निर्देश के बाद भी निजी स्कूल बसें नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रही हैं। इससे बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। आरटीए की टीम ने जनवरी महीने में चलाए चेकिंग अभियान में 230 बसों की फिटनेस जांच की थी। उसमें उनमें दो बसों की फिटनेस नहीं मिली। इसके अलावा 18 बसों में फायर सिस्टम नहीं मिला। तीन बसों का इंश्योरेंस नहीं था जबकि छह बिना टैक्स के चलती मिली। इसके अलावा फरवरी महीने में 323 बसों की जांच की गई। इनमें 11 बसों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे मिले। वहीं 21 बसों में फायर सिस्टम नहीं था। इनके अलावा मार्च महीने में 240 स्कूल बसें की फिटनेस जांची गई। इनमें 19 बसें ऐसी मिली, जिनमें फायर सिस्टम नहीं था। हालांकि चेकिंग के दौरान 192 बसों के चालान भी किए गए थे।
यह शिकायतें मिलती हैं अक्सर
अधिकांश स्कूली बसों में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर कर भरा जाता है। स्कूल बस के लिए निर्धारित गति सीमा 40 किलोमीटर प्रतिघंटा है, लेकिन सडक़ों पर इनको 50 से भी ज्यादा गति से दौड़ाया जाता है। बसों की खिड़कियों में शीशे के साथ जाली नहीं लगी होती, लेकिन अगले शीशे को छोड़ सभी शीशों पर जाली लगी होनी चाहिए। बसों में रफ्तार डिवाइस यंत्र भी नहीं मिलता। वाहनों में आग बुझाने के यंत्र नहीं लगे हैं। बस के दरवाजे में मजबूत लॉक का होना जरूरी है, जोकि नहीं लगे होते हैं। कई स्कूल की बसों का रंग भी पीला नहीं होता। कई बसों में कर्कश हॉर्न लगे होते हैं, जो बच्चों को परेशान करते हैं।
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इन नियमों का किया जा रहा अनदेखा
-बसों को निर्धारित की बजाय ज्यादा गति से दौड़ाया जाता है।
-रास्ता खुला हो या संकीर्ण वाहनों को ओवरटेक किया जाता है।
-बेहद कम चालक ही सीट बेल्ट का प्रयोग करते हैं।
-बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाया जाता है।
-सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं होता, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं।
केस-1
जिले में हुए थे दो बड़े हादसे
28 मार्च 2025 को नगूरां में निजी स्कूल की बस का टायर फटने से अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई थी। इस हादसे में पांच बच्चों और चार महिला टीचरों को चोट आई थी। यह बस नियमों को ताक पर रख कर चल रही थी। स्कूल वैन में सात यात्रियों की क्षमता थी, लेकिन घटना के समय 14 बच्चे और स्टाफ सवार था। वैन में परिचालक भी नहीं था और आगे वाली सीट पर बच्चे बैठे थे।
केस-2
अगस्त 2024 में सुंदरपुरा के पास पलट गई थी स्कूल वैन
नरवाना क्षेत्र के सुंदरपुरा गांव के पास अगस्त 2024 में अनियंत्रित होकर स्कूल वैन पलट गई थी। इस हादसे में गनीमत यह रही थी कि बच्चों को हल्की चोटें आई थी। इस स्कूल वैन में 6-7 बच्चे सवार थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए थे, जिनको उपचार के लिए नागरिक अस्पताल ले जाया गया था। वहां चिकित्सकों ने उपचार देकर बच्चों को छुट्टी दे दी थी।
पिछले तीन महीनों में निजी स्कूल बसों की फिटनेस चेक की गई थी। उनमें खामी मिलने पर 192 बसों के चालान भी किए गए थे।
-- आनंद बेनिवाल, सहायक डीटीओ, जींद
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प्रदेश सरकार के सख्त निर्देश के बाद भी निजी स्कूल बसें नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रही हैं। इससे बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। आरटीए की टीम ने जनवरी महीने में चलाए चेकिंग अभियान में 230 बसों की फिटनेस जांच की थी। उसमें उनमें दो बसों की फिटनेस नहीं मिली। इसके अलावा 18 बसों में फायर सिस्टम नहीं मिला। तीन बसों का इंश्योरेंस नहीं था जबकि छह बिना टैक्स के चलती मिली। इसके अलावा फरवरी महीने में 323 बसों की जांच की गई। इनमें 11 बसों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे मिले। वहीं 21 बसों में फायर सिस्टम नहीं था। इनके अलावा मार्च महीने में 240 स्कूल बसें की फिटनेस जांची गई। इनमें 19 बसें ऐसी मिली, जिनमें फायर सिस्टम नहीं था। हालांकि चेकिंग के दौरान 192 बसों के चालान भी किए गए थे।
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यह शिकायतें मिलती हैं अक्सर
अधिकांश स्कूली बसों में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर कर भरा जाता है। स्कूल बस के लिए निर्धारित गति सीमा 40 किलोमीटर प्रतिघंटा है, लेकिन सडक़ों पर इनको 50 से भी ज्यादा गति से दौड़ाया जाता है। बसों की खिड़कियों में शीशे के साथ जाली नहीं लगी होती, लेकिन अगले शीशे को छोड़ सभी शीशों पर जाली लगी होनी चाहिए। बसों में रफ्तार डिवाइस यंत्र भी नहीं मिलता। वाहनों में आग बुझाने के यंत्र नहीं लगे हैं। बस के दरवाजे में मजबूत लॉक का होना जरूरी है, जोकि नहीं लगे होते हैं। कई स्कूल की बसों का रंग भी पीला नहीं होता। कई बसों में कर्कश हॉर्न लगे होते हैं, जो बच्चों को परेशान करते हैं।
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इन नियमों का किया जा रहा अनदेखा
-बसों को निर्धारित की बजाय ज्यादा गति से दौड़ाया जाता है।
-रास्ता खुला हो या संकीर्ण वाहनों को ओवरटेक किया जाता है।
-बेहद कम चालक ही सीट बेल्ट का प्रयोग करते हैं।
-बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाया जाता है।
-सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं होता, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं।
केस-1
जिले में हुए थे दो बड़े हादसे
28 मार्च 2025 को नगूरां में निजी स्कूल की बस का टायर फटने से अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई थी। इस हादसे में पांच बच्चों और चार महिला टीचरों को चोट आई थी। यह बस नियमों को ताक पर रख कर चल रही थी। स्कूल वैन में सात यात्रियों की क्षमता थी, लेकिन घटना के समय 14 बच्चे और स्टाफ सवार था। वैन में परिचालक भी नहीं था और आगे वाली सीट पर बच्चे बैठे थे।
केस-2
अगस्त 2024 में सुंदरपुरा के पास पलट गई थी स्कूल वैन
नरवाना क्षेत्र के सुंदरपुरा गांव के पास अगस्त 2024 में अनियंत्रित होकर स्कूल वैन पलट गई थी। इस हादसे में गनीमत यह रही थी कि बच्चों को हल्की चोटें आई थी। इस स्कूल वैन में 6-7 बच्चे सवार थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए थे, जिनको उपचार के लिए नागरिक अस्पताल ले जाया गया था। वहां चिकित्सकों ने उपचार देकर बच्चों को छुट्टी दे दी थी।
पिछले तीन महीनों में निजी स्कूल बसों की फिटनेस चेक की गई थी। उनमें खामी मिलने पर 192 बसों के चालान भी किए गए थे।