जींद। दो हजार रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर ज्वैलर्स और सुनार समाज के प्रतिनिधियों ने विरोध जताया है। कारोबारियों ने सरकार से प्रस्तावित व्यवस्था वापस लेने या आभूषण उद्योग को इससे पूरी तरह छूट देने की मांग की है। सेवानिवृत्त डीआईपीआरओ सुरेंद्र वर्मा कोथ, मेढ़ क्षत्रिय सुनार धर्मशाला रामराय के पूर्व प्रधान पुरुषोत्तम सोनी, कुमारी तृप्ति, डॉ. जगदंबे वर्मा, मंजू सोनी, डॉ. रीना, रितु, अर्चना, मीनू और पूनम ने कहा कि बिक्री मूल्य पर शुल्क लगाने से छोटे और मध्यम ज्वैलर्स के सीमित मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी नुकसान पहुंच सकता है। अधिकांश छोटे व मध्यम ज्वैलर्स दो से तीन प्रतिशत के सकल मार्जिन पर काम करते हैं। बिल की अधिकांश राशि सोने की लागत होती है और कारोबारी का वास्तविक मार्जिन सीमित रहता है। उन्होंने कहा कि यदि दो लाख रुपये के आभूषण की बिक्री पर सकल मार्जिन चार से छह हजार रुपये है तो 300 रुपये का यूपीआई शुल्क इस मार्जिन का करीब पांच से 7.5 प्रतिशत हिस्सा कम कर सकता है। ऐसे में बिक्री मूल्य के आधार पर शुल्क लगाना छोटे दुकानदारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित होगा। संवाद