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Jind News: सर्वपितृ अमावस्या पर सरोवर में स्नान कर श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान

Sun, 11 Oct 2026 03:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 03:00 AM IST
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On Sarva Pitru Amavasya, devotees bathed in the lake and performed Pind Daan.
फोटो 10जेएनडी15-पांडू-पिंडारा तीर्थ पर पितरों की शांति के लिए पिंडदान करते हुए श्रद्धालु। संवाद - फोटो : samvad
जींद। महाभारत कालीन ऐतिहासिक पांडू पिंडारा तीर्थ पर शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने तीर्थ के सरोवर में स्नान किया और विधि-विधान से पिंडदान व तर्पण किया।
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सुबह से ही तीर्थ परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई जो दोपहर बाद तक जारी रही। श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना भी की।
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तीर्थ पर शुक्रवार शाम से ही श्रद्धालु आने शुरू हो गए थे। रात के समय धर्मशालाओं में सत्संग और कीर्तन का आयोजन हुआ। शनिवार सुबह होते ही श्रद्धालु सरोवर में स्नान करने और पिंडदान करने पहुंचे।
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मान्यता के अनुसार, जिन लोगों को अपने पितरों की पुण्यतिथि याद नहीं रहती, वे सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं। इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से विशेष प्रबंध किए गए थे। तीर्थ परिसर में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई, वहीं यातायात व्यवस्था संभालने के लिए भी पुलिस कर्मचारी तैनात रहे। सुबह से दोपहर बाद तक श्रद्धालुओं का आवागमन जारी रहा।

पांडवों की तपस्या से जुड़ी है तीर्थ की मान्यता
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पिंडतारक तीर्थ के संबंध में मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने युद्ध में मारे गए अपने परिजनों की आत्मा की शांति के लिए यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की थी। सोमवती अमावस्या आने पर उन्होंने पिंडदान किया। इसी मान्यता के चलते पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान कर उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना करते हैं।


तीर्थ पर लगी दुकानों पर श्रद्धालुओं ने की खरीदारी
अमावस्या पर तीर्थ परिसर में धार्मिक गतिविधियों के साथ मेले जैसा माहौल भी रहा। जगह-जगह दुकानदारों ने सामान बेचने के लिए फड़ लगाई हुई थी। श्रद्धालुओं के साथ आए बच्चों ने खिलौने खरीदे, जबकि महिलाओं और अन्य लोगों ने घरेलू जरूरतों का सामान खरीदा। इससे तीर्थ परिसर में दिनभर चहल-पहल बनी रही।

फोटो 10जेएनडी15-पांडू-पिंडारा तीर्थ पर पितरों की शांति के लिए पिंडदान करते हुए श्रद्धालु। संवाद

फोटो 10जेएनडी15-पांडू-पिंडारा तीर्थ पर पितरों की शांति के लिए पिंडदान करते हुए श्रद्धालु। संवाद- फोटो : samvad

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