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Jind News: शारदीय नवरात्र 22 से, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
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42 दुर्गा भवन मंदिर में मां दुर्गा का श्रृंगार करता पुजारी गोविंद। संवाद
- फोटो : samvad
रोहतक। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 22 सितंबर से हो रहा है। इस बार नवरात्र दस दिनों का होगा। इसमें चतुर्थी तिथि दो दिन की मनाई जाएगी। माता दुर्गा हाथी पर आएंगी। माता रानी के दोनों आगमन ही शुभ माने जाते हैं। पहले दिन कलश स्थापना ब्रह्म योग व श्रीवत्स नामक फलदाई औदायिक योग में शुभ मुहूर्त में होगा।
पंडित सुनील शास्त्री ने बताया कि नवरात्र में प्रारंभ के दिन के अतिरिक्त तीन तिथियों का भी सर्वाधिक महत्व रहता है। ये तिथियां सप्तमी, अष्टमी और नवमी हैं। महासप्तमी 29 सितंबर दिन सोमवार को है। 25 व 26 सितंबर को दो दिन चतुर्थी तिथि में मां कूष्मांडा की पूजा होगी। महाष्टमी का व्रत मंगलवार 30 सितंबर और नवमी एक अक्तूबर बुधवार को रहेगा।
नवरात्र व्रत करने वाले को नौ दिनों (यदि आठ दिन का हो तो आठ दिन, यदि दस दिन को हो तो दस दिन) तक केवल एक समय भोजन करना चाहिए। नवरात्र व्रत में जो नौ तिथियों में उपवास नहीं कर सकते तो वह यदि सप्तमी, अष्टमी और नवमी- इन तीन तिथियों में उपवास करें तो भी उनकी कामना सिद्ध हो जाती है।
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पूरे दिन हो सकेगी कलश स्थापना
शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 22 सितंबर सोमवार से हो रहा है। नवरात्र के पहले दिन आस्था भाव के साथ श्रद्धालुओं की ओर से कलश स्थापना की जाएगी। बताया जा रहा है कि नवरात्र के प्रथम दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग न होने से कलश स्थापना के लिए कोई बाधा नहीं रहेगा। सुबह 06:01 बजे से शाम छह बजे तक कभी भी कलश को स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद पूरे दस दिनों तक माता की आराधना की जाएगी।
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पंडित सुनील शास्त्री ने बताया कि नवरात्र में प्रारंभ के दिन के अतिरिक्त तीन तिथियों का भी सर्वाधिक महत्व रहता है। ये तिथियां सप्तमी, अष्टमी और नवमी हैं। महासप्तमी 29 सितंबर दिन सोमवार को है। 25 व 26 सितंबर को दो दिन चतुर्थी तिथि में मां कूष्मांडा की पूजा होगी। महाष्टमी का व्रत मंगलवार 30 सितंबर और नवमी एक अक्तूबर बुधवार को रहेगा।
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नवरात्र व्रत करने वाले को नौ दिनों (यदि आठ दिन का हो तो आठ दिन, यदि दस दिन को हो तो दस दिन) तक केवल एक समय भोजन करना चाहिए। नवरात्र व्रत में जो नौ तिथियों में उपवास नहीं कर सकते तो वह यदि सप्तमी, अष्टमी और नवमी- इन तीन तिथियों में उपवास करें तो भी उनकी कामना सिद्ध हो जाती है।
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पूरे दिन हो सकेगी कलश स्थापना
शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 22 सितंबर सोमवार से हो रहा है। नवरात्र के पहले दिन आस्था भाव के साथ श्रद्धालुओं की ओर से कलश स्थापना की जाएगी। बताया जा रहा है कि नवरात्र के प्रथम दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग न होने से कलश स्थापना के लिए कोई बाधा नहीं रहेगा। सुबह 06:01 बजे से शाम छह बजे तक कभी भी कलश को स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद पूरे दस दिनों तक माता की आराधना की जाएगी।

42 दुर्गा भवन मंदिर में मां दुर्गा का श्रृंगार करता पुजारी गोविंद। संवाद- फोटो : samvad