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नशा व्यक्ति, परिवार व समाज के लिए घातक : अमित सिहाग
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01जेएनडी14: नशा मुक्ति केंद्र का निरीक्षण करते हुए डीएलएसए सचिव अमित सिहाग। स्रोत : प्रशासन
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं डीएलएसए सचिव अमित सिहाग ने रविवार को नरवाना रोड स्थित नशा मुक्ति केंद्र बियोंड केयर का निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, उपचार व्यवस्था और वहां रह रहे व्यक्तियों के रहन-सहन की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए घातक है इसलिए इससे दूर रहना आवश्यक है।
अमित सिहाग ने नशे के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि भारत में वर्ष 1985 से नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम लागू है। इसके तहत नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं और इनमें कठोर दंड का प्रावधान है।
निरीक्षण के दौरान केंद्र में नौ उपचाराधीन व्यक्ति मौजूद थे। सचिव ने उनसे बातचीत कर स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन, रहने की व्यवस्था और उपचार प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की।उन्होंने केंद्र संचालकों और स्टाफ को निर्देश दिए कि मरीजों की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।
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उन्होंने उपचाराधीन व्यक्तियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।साथ ही बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 पर घर बैठे निशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने जानकारी दी कि 12 सितंबर 2026 को जींद, नरवाना और सफीदों न्यायिक परिसरों में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाएगी जबकि प्रत्येक कार्य दिवस पर विशेष लोक अदालत भी लगाई जा रही है।
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जींद। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं डीएलएसए सचिव अमित सिहाग ने रविवार को नरवाना रोड स्थित नशा मुक्ति केंद्र बियोंड केयर का निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, उपचार व्यवस्था और वहां रह रहे व्यक्तियों के रहन-सहन की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए घातक है इसलिए इससे दूर रहना आवश्यक है।
अमित सिहाग ने नशे के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि भारत में वर्ष 1985 से नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम लागू है। इसके तहत नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं और इनमें कठोर दंड का प्रावधान है।
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निरीक्षण के दौरान केंद्र में नौ उपचाराधीन व्यक्ति मौजूद थे। सचिव ने उनसे बातचीत कर स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन, रहने की व्यवस्था और उपचार प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की।उन्होंने केंद्र संचालकों और स्टाफ को निर्देश दिए कि मरीजों की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।
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उन्होंने उपचाराधीन व्यक्तियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।साथ ही बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 पर घर बैठे निशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने जानकारी दी कि 12 सितंबर 2026 को जींद, नरवाना और सफीदों न्यायिक परिसरों में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाएगी जबकि प्रत्येक कार्य दिवस पर विशेष लोक अदालत भी लगाई जा रही है।