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Jind News: कैंसर मरीजों का इलाज व रोकथाम में भी सक्रिय भागीदारी करें चिकित्सक
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पीजीआई में चल रहे कैंसर एवं कीमोथेरेपी से संबंधित प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर प्रतिभागियो
रोहतक। प्रदेश के सात जिलों सोनीपत, सिरसा, फतेहाबाद, रोहतक, जींद, हिसार और भिवानी के 12 मेडिकल ऑफिसर को कैंसर और कीमोथेरेपी से संबंधित दो महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण प्रत्येक जिला अस्पताल में डे-केयर कैंसर सेंटर शुरू करने की पहल का हिस्सा था।
पीजीआई निदेशक डॉ. एसके सिंगल ने कहा कि प्रशिक्षित डॉक्टर न केवल कैंसर मरीजों का इलाज करें बल्कि कैंसर की रोकथाम और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी करें।
यह कार्यक्रम 10 जुलाई से 9 सितंबर 2025 तक पीजीआई के कैंसर विभाग में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के नोडल ऑफिसर डॉ. सुधीर अत्री थे। रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अशोक चौहान के मार्गदर्शन में यह प्रशिक्षण दिया।
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डॉ. अभिषेक सोनी को इसके लिए विशेष रूप से नियुक्त किया गया था। प्रशिक्षण के समापन पर पीजीआई के निदेशक डॉ. एसके सिंगल, डॉ. अशोक चौहान और रोहतक के सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंदर आर्य ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए।
डॉ. अशोक चौहान ने उन्हें किसी भी समस्या के लिए कैंसर विशेषज्ञों से तुरंत संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कैंसर का इलाज मरीजों को उनके नजदीकी जिला अस्पतालों में ही उपलब्ध हो सके।
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पीजीआई निदेशक डॉ. एसके सिंगल ने कहा कि प्रशिक्षित डॉक्टर न केवल कैंसर मरीजों का इलाज करें बल्कि कैंसर की रोकथाम और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी करें।
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यह कार्यक्रम 10 जुलाई से 9 सितंबर 2025 तक पीजीआई के कैंसर विभाग में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के नोडल ऑफिसर डॉ. सुधीर अत्री थे। रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अशोक चौहान के मार्गदर्शन में यह प्रशिक्षण दिया।
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डॉ. अभिषेक सोनी को इसके लिए विशेष रूप से नियुक्त किया गया था। प्रशिक्षण के समापन पर पीजीआई के निदेशक डॉ. एसके सिंगल, डॉ. अशोक चौहान और रोहतक के सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंदर आर्य ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए।
डॉ. अशोक चौहान ने उन्हें किसी भी समस्या के लिए कैंसर विशेषज्ञों से तुरंत संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कैंसर का इलाज मरीजों को उनके नजदीकी जिला अस्पतालों में ही उपलब्ध हो सके।