फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Cows are dying in the cowshed, instead of being buried, dead bodies are being thrown in the open

Jind News: गोशाला में मौत का ग्रास बन रहा गोवंश, दफनाने की बजाय खुले में फेंके जा रहे शव

Mon, 23 Jan 2023 05:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jan 2023 05:30 AM IST
विज्ञापन
Cows are dying in the cowshed, instead of being buried, dead bodies are being thrown in the open
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

जींद। बीड़ बड़ा वन के पास बनी सुनंदी गोशाला में गोवंश के हालात बद् से बद्तर बने हुए हैं। हर रोज कई-कई गोवंश मौत का ग्रास बन रहे हैं, जिनको दफनाया भी नहीं बल्कि खुले में फें का जा रहा है। ऐसे में गोशाला के पास बदबूदार वातावरण बना हुआ है। आवारा कु त्ते मरे हुए गोवंश के अवशेषों को उठाकर सडक़ों तक ला रहे हैं। हालांकि बीड़ बड़ा वन की सुनंदी गोशाला का डीसी और नगराधीश भी दौरा कर चुके हैं। उन्होंने दौरा कर गोशाला की व्यवस्थाओं को सही बताया था। वहां के कर्मचारियों को दिशा-निर्देश भी दिए थे। इसके अलावा बीमार गोवंश को बचाने के लिए भी पशुपालन विभाग से एक चिकित्सक की प्रतिदिन डयूटी लगाई गई थी। अब गोवंश भूख और बीमारियों के कारण दम तोड़ रहे हैं। सुनंदी नंदीशाला में पिछले महीने जहां 800 के लगभग गोवंश थे, वह अब घटकर 750 रह गए हैं। इस गोशाला में गोवंश का पेट ही नहीं भर पा रहा है, क्योंकि वहां पर न तो कोई शहरवासी चारा डालने के लिए जा रहा है और न ही गोशाला कमेटी के पास इतनी राशि नहीं है कि वह चारा खरीदकर गोवंश का पेट भर सके। ऐसे में हर रोज गोवंश की मौत हो रही है।
डीसी और नगराधीश ने किया था दौरा
अमर उजाला की टीम ने दिसंबर महीने में गोशालों के बद्तर हालात को प्रमुखता से उठाया था। उसके बाद नगराधीश अमित कुमार ने बीड़ बड़ा वन की सुनंदी गोशाला का दौरा किया था। उन्होंने वहां जाकर गोवंश के हालात देखे थे वहीं गोवंश के लिए बचे हुए चारे बारे भी प्रबंधन सदस्यों से बातचीत की थी। उन्होंने कहा था कि वह गोवंश का पेट भरने के लिए शहरवासियों से अपील करेंगे कि वह गोवंश की सेवा के लिए आगे आएं, लेकिन प्रशासन की अपील का शहरवासियों पर कुछ असर नहीं हुआ। अब गोवंश भूखा मरने पर मजबूर है। इसके अलावा पिछले सप्ताह डीसी डॉ. मनोज ने भी गोशालाओं का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। डीसी ने गोशालाओं की व्यवस्थाओं को सही बताया था, लेकिन बीमारी और भूख से हर रोज कई-कई गोवंश दम तोड़ रहे हैं।
विज्ञापन

4 कर्मचारियों पर 830 गोवंश का जिम्मा
सुनंदी गोशाला में लगभग 750 गोवंश हैं। इनका जिम्मा चार कर्मचारियों पर है। ऐसे में गोवंश का रख-रखाव सही तरीके से नहीं हो पा रहा। इसको प्रशासन ने भी माना था। गोवंश के चारे की उचित व्यवस्था नहीं बन पाती और न ही बीमार गोवंश का अच्छे ढंग से ध्यान रखा जाता। बीमार गोवंश को चारा खिलाने और पानी पिलाने की व्यवस्था नहीं बनती। ऐसे में बीमार गोवंश भूख और प्यास से ही दम तोड़ देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीड़ बड़ा वन में दूसरी गोशालाओं से भी मृत गायों को दफनाया जाता है। शनिवार को सुनंदी गोशाला में भी कई गोवंश की मौत हो गई थी। जेसीबी खराब होने से सभी गोवंश के ऊपर मिट्टी नहीं डल पाई थी।
--स्वामी राघवानंद, अध्यक्ष, नंदीशाला कमेटी जींद।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed