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Jind News: पढ़ाई के साथ पिता का सहारा बन गोसेवा कर रहीं आशा

Wed, 24 Dec 2025 12:29 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 24 Dec 2025 12:29 AM IST
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Along with her studies, Asha is supporting her father and serving cows.
23जेएनडी18 : बाजार में जाकर राशन एकत्रित करती आशा। संवाद
कर्मवीर
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जुलाना। कस्बे की 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली आशा ने विपरीत परिस्थितियों में हार मानने के बजाय हौसले और मेहनत से अपनी अलग पहचान बनाई है। आशा आज न केवल अपने परिवार का सहारा बनी हुई हैं बल्कि गोसेवा के माध्यम से समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई है।

आशा की मां की कई साल पहले मौत हो गई थी। आशा के परिवार में दो छोटे भाई और एक बहन हैं। आशा सबसे बड़ी हैं। आशा के पिता लंबे समय से कस्बे की गोशाला के लिए रिक्शा चलाने का कार्य करते हैं। वह पूरे कस्बे में घर-घर जाकर गायों के लिए अन्न, सब्जी और अन्य भोजन सामग्री एकत्रित करते हैं।
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सेवा के बदले गोशाला की ओर से उन्हें मानदेय मिलता है। इससे परिवार की आजीविका चल रही थी लेकिन बीते कुछ समय से पिता की उम्र और बीमारी के चलते वे इस कार्य को नियमित रूप से करने में असमर्थ हो गए। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया।
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आशा ने हिम्मत दिखाई और पढ़ाई के साथ-साथ पिता के काम को संभालने का फैसला किया। आशा ने रिक्शा चलाकर घर-घर जाना शुरू किया और गायों के लिए भोजन सामग्री एकत्रित करने लगीं। शुरुआत में यह काम उसके लिए कठिन था लेकिन आशा ने कभी हार नहीं मानी। पिता भी उनका मार्गदर्शन व सहयोग कर रहे हैं।

आशा सुबह स्कूल जाने से पहले रिक्शा खींचते हुए वह पूरे कस्बे का चक्कर लगाती हैं और लोगों से गायों के लिए भोजन एकत्रित करती हैं। उसके बाद स्कूल जाती हैं। उनकी मेहनत और लगन से न केवल परिवार की बिगड़ती आर्थिक स्थिति संभल गई है बल्कि गौशाला को भी नियमित रूप से चारा और भोजन मिलने लगा है।


लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र में आशा ने जिम्मेदारी उठाकर यह साबित कर दिया है कि बेटियां किसी से कम नहीं होती। पढ़ाई के साथ-साथ गोसेवा जैसे पुण्य कार्य में योगदान देना आज की पीढ़ी के लिए एक मिसाल है। आशा का सपना है कि वह पढ़-लिखकर आगे बढ़े और अपने पिता को एक बेहतर जीवन दे। संवाद
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