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फर्जी दस्तावेज के आधार पर गलत रिपोर्ट बनवाने का आरोपी गिरफ्तार
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फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गलत चिकित्सा रिपोर्ट बनवाने के आरोपी हिसार के जवाहर नगर निवासी नकुल को सिविल लाइन थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।
जेल उपाधीक्षक राकेश कुमार ने 9 सितंबर 2019 को पुलिस में शिकायत दी थी कि जिला जेल में बंद कैदी विकास उर्फ बिल्लु निवासी चाबरी द्वारा अपने पिता रघबीर निवासी चाबरी के कैंसर से पीड़ित होने के कारण इलाज के लिए पैरोल की अर्जी लगाई थी। बंदी के पिता द्वारा 16 अगस्त 2019 को आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसी चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र बीकानेर से करवाए जा रहे इलाज से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए। जब चिकित्सा से संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया तो पाया कि आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसर चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र बीकानेर द्वारा बंदी के पिता का इलाज डिस्चार्ज फालोअप कार्ड की आरओपीडी में दर्ज निरावाना डायगोनोस्टीक सेंटर पीजीआई रोड रोहतक सेंटर की बायोपसी को आधार मानकर किया गया है। बंदी के हार्डकोर कैदी की श्रेणी में आने व शातिर प्रवृत्ति होने के कारण दस्तावेजों की जांच की गइ। वहीं बंदी द्वारा जेल में बंदियों को परिजनों से फोन पर बात करने की सुविधा की रिकार्डिंग की जांच की गई। इसके बाद दस्तावेज जांच किए गए तो यह बायोपसी बुआना निवासी वजीर के नाम से करवाई गई थी न की रघबीर के द्वारा करवाई गई थी। यही नहीं संबंधित मरीज इलाज के लिए बीकानेर अस्पताल में भी नहीं आया। रिकार्डिंग में सामने आया कि पैरोल से संबंधित सभी जाली दस्तावेज बंदी द्वारा अपने पिता रघबीर, चचेरा भाई नकुल, कैंसर से पीड़ित वजीर से मिलीभगत करके तैयार कर माननीय हाईकोर्ट में पेश किए गए। पुलिस ने शिकायत पर कैदी विकास, रघबीर, नकुल व वजीर के खिलाफ केस दर्ज किया था। सिविल लाइन थाना प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में आरोपी नकुल को गिरफ्तार किया है।
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जेल उपाधीक्षक राकेश कुमार ने 9 सितंबर 2019 को पुलिस में शिकायत दी थी कि जिला जेल में बंद कैदी विकास उर्फ बिल्लु निवासी चाबरी द्वारा अपने पिता रघबीर निवासी चाबरी के कैंसर से पीड़ित होने के कारण इलाज के लिए पैरोल की अर्जी लगाई थी। बंदी के पिता द्वारा 16 अगस्त 2019 को आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसी चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र बीकानेर से करवाए जा रहे इलाज से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए। जब चिकित्सा से संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया तो पाया कि आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसर चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र बीकानेर द्वारा बंदी के पिता का इलाज डिस्चार्ज फालोअप कार्ड की आरओपीडी में दर्ज निरावाना डायगोनोस्टीक सेंटर पीजीआई रोड रोहतक सेंटर की बायोपसी को आधार मानकर किया गया है। बंदी के हार्डकोर कैदी की श्रेणी में आने व शातिर प्रवृत्ति होने के कारण दस्तावेजों की जांच की गइ। वहीं बंदी द्वारा जेल में बंदियों को परिजनों से फोन पर बात करने की सुविधा की रिकार्डिंग की जांच की गई। इसके बाद दस्तावेज जांच किए गए तो यह बायोपसी बुआना निवासी वजीर के नाम से करवाई गई थी न की रघबीर के द्वारा करवाई गई थी। यही नहीं संबंधित मरीज इलाज के लिए बीकानेर अस्पताल में भी नहीं आया। रिकार्डिंग में सामने आया कि पैरोल से संबंधित सभी जाली दस्तावेज बंदी द्वारा अपने पिता रघबीर, चचेरा भाई नकुल, कैंसर से पीड़ित वजीर से मिलीभगत करके तैयार कर माननीय हाईकोर्ट में पेश किए गए। पुलिस ने शिकायत पर कैदी विकास, रघबीर, नकुल व वजीर के खिलाफ केस दर्ज किया था। सिविल लाइन थाना प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में आरोपी नकुल को गिरफ्तार किया है।
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