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Jind News: विद्यार्थियों को ई-मेल पर मिले विश्वविद्यालय की हर सूचना, एबीवीपी ने उठाई मांग
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25जेएनडी11: मांगों को लेकर विद्यार्थी वीसी के ओएसडी को ज्ञापन सौंपते हुए। स्रोत : संगठन
जींद। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध करवाने की मांग उठाई है। परिषद के पदाधिकारियों ने चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय (सीआरएसयू) के कुलपति के नाम ओएसडी विजय कुमार को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक की तर्ज पर सीआरएसयू में भी ई-मेल आधारित सूचना एवं अलर्ट प्रणाली लागू की जाए, ताकि प्रवेश, परीक्षा, फीस, एडमिट कार्ड, परिणाम, मेरिट सूची, स्पेशल चांस, काउंसलिंग और अन्य प्रशासनिक सूचनाएं सीधे विद्यार्थियों तक समय पर पहुंच सकें।
एबीवीपी इकाई अध्यक्ष सतविंदर ढिल्लों ने कहा कि वर्तमान में विद्यार्थियों को विभिन्न सूचनाओं के लिए बार-बार विश्वविद्यालय की वेबसाइट, नोटिस बोर्ड और कॉलेज कार्यालयों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार समय पर जानकारी नहीं मिलने से विद्यार्थी फीस जमा करने, परीक्षा फॉर्म भरने, री-अपीयर और अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की अंतिम तिथि से वंचित रह जाते हैं।
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राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रोहन सैनी ने कहा कि ई-मेल अलर्ट प्रणाली लागू होने से विद्यार्थियों को बार-बार विश्वविद्यालय और कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही लेट फीस, अंतिम तिथि छूटने और सूचना के अभाव जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी।
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ज्ञापन में मांग की गई कि महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक की तर्ज पर सीआरएसयू में भी ई-मेल आधारित सूचना एवं अलर्ट प्रणाली लागू की जाए, ताकि प्रवेश, परीक्षा, फीस, एडमिट कार्ड, परिणाम, मेरिट सूची, स्पेशल चांस, काउंसलिंग और अन्य प्रशासनिक सूचनाएं सीधे विद्यार्थियों तक समय पर पहुंच सकें।
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एबीवीपी इकाई अध्यक्ष सतविंदर ढिल्लों ने कहा कि वर्तमान में विद्यार्थियों को विभिन्न सूचनाओं के लिए बार-बार विश्वविद्यालय की वेबसाइट, नोटिस बोर्ड और कॉलेज कार्यालयों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार समय पर जानकारी नहीं मिलने से विद्यार्थी फीस जमा करने, परीक्षा फॉर्म भरने, री-अपीयर और अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की अंतिम तिथि से वंचित रह जाते हैं।
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राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रोहन सैनी ने कहा कि ई-मेल अलर्ट प्रणाली लागू होने से विद्यार्थियों को बार-बार विश्वविद्यालय और कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही लेट फीस, अंतिम तिथि छूटने और सूचना के अभाव जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी।