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Jind News: 58 सालों से रामलीला में अभिनय कर रहे 67 वर्षीय हरीश गुप्ता
Thu, 18 Sep 2025 11:50 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 18 Sep 2025 11:50 PM IST
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18जेएनडी39-कैकई की वेशभूषा में कलाकार हरीश गुप्ता।
नरवाना। शहर में हर वर्ष होने वाली रामलीला में कलाकार वर्षों से लगातार अपनी कला से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं 67 वर्षीय हरीश गुप्ता 58 सालों से रामलीला के मंच पर अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह रहे हैं।
हरीश गुप्ता 1980 से अब तक सुलोचना और कैकई के किरदार निभा रहे हैं। बीच में वर्ष 2005 से लेकर करीब चार साल तक उन्होंने विभीषण की भूमिका भी निभाई थी। खास बात यह है कि गुप्ता अभिनय के साथ-साथ अपनी रोजी-रोटी के लिए रंग-रोगन की दुकान भी चलाते हैं लेकिन इसके बावजूद वह रोजाना रामलीला अभ्यास में समय निकालकर पूरी निष्ठा से अपनी तैयारी करते हैं।
रामायण के पात्रों पर एक नजर
रामायण के पात्रों की गहराई से समझ दर्शकों को प्रभावित करती है। सुलोचना मेघनाद की पत्नी थीं जो अपने पति के प्रति असीम निष्ठा और प्रेम के लिए जानी जाती हैं। उनका चरित्र त्याग और पतिव्रता धर्म का आदर्श उदाहरण माना जाता है। कैकई अयोध्या की रानी और भरत की माता थीं, जिन्होंने कभी राम को वनवास भेजने की जिद की लेकिन उनका हृदय परिवर्तन हुआ और वह राम के प्रति पछतावे से भर गईं। वहीं विभीषण रावण का भाई थे जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए राम का साथ दिया और लंका का राजा बनाए गए। इन पात्रों को मंच पर जीवंत करना कलाकार के लिए बड़ी चुनौती होती है जिसे गुप्ता दशकों से बखूबी निभा रहे हैं।
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कोरोना काल में भी निभाया किरदार
हरीश गुप्ता का रामलीला के प्रति समर्पण इतना गहरा है कि वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उसी वर्ष रामलीला मंचन में अपने किरदार पूरे जोश से निभाए और दर्शकों को मनोरंजन और प्रेरणा दी।
गायन में भी है विशेष योगदान
अभिनय के साथ-साथ गुप्ता का मुख्य योगदान गायन में भी है। वह हर साल रामलीला मंचन में लगभग 12 गीत गाते हैं जिनकी गूंज पूरे मंचन को भक्तिमय बना देती है। अभिनय और गायन दोनों क्षेत्रों में उनकी पकड़ रामलीला को और भी जीवंत बनाती है।
आने वाली पीढ़ी को संदेश
श्री भारतीय कला केंद्र में मैनेजर के पद पर कार्यरत गुप्ता का मानना है कि आने वाली पीढ़ी को अपने कार्य के प्रति पूर्ण निष्ठा और लगन रखनी चाहिए। माता-पिता के संस्कारों का आदर करना और भाई-बहनों के बीच प्रेम व सम्मान बनाए रखना ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि रामलीला हमें यही सिखाती है कि रिश्ते कैसे निभाए जाएं और धर्म के मार्ग पर कैसे चला जाए।
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हरीश गुप्ता 1980 से अब तक सुलोचना और कैकई के किरदार निभा रहे हैं। बीच में वर्ष 2005 से लेकर करीब चार साल तक उन्होंने विभीषण की भूमिका भी निभाई थी। खास बात यह है कि गुप्ता अभिनय के साथ-साथ अपनी रोजी-रोटी के लिए रंग-रोगन की दुकान भी चलाते हैं लेकिन इसके बावजूद वह रोजाना रामलीला अभ्यास में समय निकालकर पूरी निष्ठा से अपनी तैयारी करते हैं।
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रामायण के पात्रों पर एक नजर
रामायण के पात्रों की गहराई से समझ दर्शकों को प्रभावित करती है। सुलोचना मेघनाद की पत्नी थीं जो अपने पति के प्रति असीम निष्ठा और प्रेम के लिए जानी जाती हैं। उनका चरित्र त्याग और पतिव्रता धर्म का आदर्श उदाहरण माना जाता है। कैकई अयोध्या की रानी और भरत की माता थीं, जिन्होंने कभी राम को वनवास भेजने की जिद की लेकिन उनका हृदय परिवर्तन हुआ और वह राम के प्रति पछतावे से भर गईं। वहीं विभीषण रावण का भाई थे जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए राम का साथ दिया और लंका का राजा बनाए गए। इन पात्रों को मंच पर जीवंत करना कलाकार के लिए बड़ी चुनौती होती है जिसे गुप्ता दशकों से बखूबी निभा रहे हैं।
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कोरोना काल में भी निभाया किरदार
हरीश गुप्ता का रामलीला के प्रति समर्पण इतना गहरा है कि वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उसी वर्ष रामलीला मंचन में अपने किरदार पूरे जोश से निभाए और दर्शकों को मनोरंजन और प्रेरणा दी।
गायन में भी है विशेष योगदान
अभिनय के साथ-साथ गुप्ता का मुख्य योगदान गायन में भी है। वह हर साल रामलीला मंचन में लगभग 12 गीत गाते हैं जिनकी गूंज पूरे मंचन को भक्तिमय बना देती है। अभिनय और गायन दोनों क्षेत्रों में उनकी पकड़ रामलीला को और भी जीवंत बनाती है।
आने वाली पीढ़ी को संदेश
श्री भारतीय कला केंद्र में मैनेजर के पद पर कार्यरत गुप्ता का मानना है कि आने वाली पीढ़ी को अपने कार्य के प्रति पूर्ण निष्ठा और लगन रखनी चाहिए। माता-पिता के संस्कारों का आदर करना और भाई-बहनों के बीच प्रेम व सम्मान बनाए रखना ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि रामलीला हमें यही सिखाती है कि रिश्ते कैसे निभाए जाएं और धर्म के मार्ग पर कैसे चला जाए।