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Jhajjar-Bahadurgarh News: शिल्पकारों से हस्तकला और चित्रकारी के गुर सीख रही महिलाएं और युवा
Mon, 28 Oct 2024 03:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 28 Oct 2024 03:57 AM IST
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-फोटो 61 : मेले में पहुंची महिलाएं खरीदारी करते हुए।
बहादुरगढ़। शहर के सेक्टर-6 स्थित कम्युनिटी सेंटर में चल रहे राष्ट्रीय हस्तशिल्प एवं सांस्कृतिक उत्सव में आने वाले शिल्पियों से मिलने और उसकी कृतियां देखने और खरीदने के लिए भीड़ उमड़ रही है। युवा और महिलाएं भी उनसे चित्रकारी और हस्तकला के गुर सीख रहे हैं। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पी मेले में आने वाले कला प्रेमियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। रविवार को छुट्टी के दिन लोगों की बहुत भीड़ रही। शाम को लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लिया।
राजस्थान के जयपुर से आए नेशनल अवार्डी चित्रकार हनुमान सैनी अपने स्टाल में ही छात्र छात्राओं को मिनिएचर पेंटिंग सिखा रहे हैं। रविवार को भी काफी विद्यार्थियों ने इसका लाभ उठाया। नाबार्ड के सहयोग से प्राचीन हस्तशिल्प कारीगर एसोसिएशन बहादुरगढ़ व रूरल एंड अर्बन डेवलपमेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए शिल्पकार व बुनकर आदि भाग ले रहे हैं। तमिलनाडु से दक्षिण भारतीय साड़ियां, असम का कपड़ा व शिल्प कला, गुजरात का हाथ से बना हुआ कपड़ा, जम्मू कश्मीर व हिमाचल का शॉल, उत्तराखंड का कपड़ा, पंजाब की जूती व फुलकारी सूट, बंगाल की ज्वेलरी, बंगाल का कपड़ा व जूट शिल्प कला, राजस्थान के सांगानेरी प्रिंट व शानदार मिनिएचर पेंटिंग, आदिवासी क्षेत्र से गोंड पेंटिंग, बनारसी साड़ी, लाख की चूड़ियां, उत्तर प्रदेश की पीतल की मूर्तियां, हरियाणा के रेवाड़ी में बने पीतल के बर्तन और हरियाणा व राजस्थान की लकड़ी पर नक्काशी लोगों को खूब लुभा रही है।
महिलाओं के विभिन्न समूहों द्वारा शिल्पकला से बनाई हुई वस्तुएं, दिवाली के अवसर पर मिट्टी के दीये, गणेश लक्ष्मी की प्रतिमाएं व सजावटी सामान भी बिक रहा है। भारतीय किसानों के द्वारा तैयार ऑर्गेनिक उत्पादों को नाबार्ड के इस मेले में खासतौर पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व जम्मू कश्मीर के किसानों द्वारा ऑर्गेनिक खेती से पैदा किए गए उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। हिमाचल के परंपरागत व्यंजनों में लोग रुचि दिखा रहे हैं। उज्बेकिस्तान के कपड़े, ज्वेलरी, चीनी मिट्टी से बने बर्तन और वहां की पारंपरिक वेशभूषा मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हैं। यह सांस्कृतिक उत्सव 30 अक्तूबर तक चलेगा। इस दिन रंगारंग कार्यक्रम होंगे।
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राजस्थान के जयपुर से आए नेशनल अवार्डी चित्रकार हनुमान सैनी अपने स्टाल में ही छात्र छात्राओं को मिनिएचर पेंटिंग सिखा रहे हैं। रविवार को भी काफी विद्यार्थियों ने इसका लाभ उठाया। नाबार्ड के सहयोग से प्राचीन हस्तशिल्प कारीगर एसोसिएशन बहादुरगढ़ व रूरल एंड अर्बन डेवलपमेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए शिल्पकार व बुनकर आदि भाग ले रहे हैं। तमिलनाडु से दक्षिण भारतीय साड़ियां, असम का कपड़ा व शिल्प कला, गुजरात का हाथ से बना हुआ कपड़ा, जम्मू कश्मीर व हिमाचल का शॉल, उत्तराखंड का कपड़ा, पंजाब की जूती व फुलकारी सूट, बंगाल की ज्वेलरी, बंगाल का कपड़ा व जूट शिल्प कला, राजस्थान के सांगानेरी प्रिंट व शानदार मिनिएचर पेंटिंग, आदिवासी क्षेत्र से गोंड पेंटिंग, बनारसी साड़ी, लाख की चूड़ियां, उत्तर प्रदेश की पीतल की मूर्तियां, हरियाणा के रेवाड़ी में बने पीतल के बर्तन और हरियाणा व राजस्थान की लकड़ी पर नक्काशी लोगों को खूब लुभा रही है।
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महिलाओं के विभिन्न समूहों द्वारा शिल्पकला से बनाई हुई वस्तुएं, दिवाली के अवसर पर मिट्टी के दीये, गणेश लक्ष्मी की प्रतिमाएं व सजावटी सामान भी बिक रहा है। भारतीय किसानों के द्वारा तैयार ऑर्गेनिक उत्पादों को नाबार्ड के इस मेले में खासतौर पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व जम्मू कश्मीर के किसानों द्वारा ऑर्गेनिक खेती से पैदा किए गए उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। हिमाचल के परंपरागत व्यंजनों में लोग रुचि दिखा रहे हैं। उज्बेकिस्तान के कपड़े, ज्वेलरी, चीनी मिट्टी से बने बर्तन और वहां की पारंपरिक वेशभूषा मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हैं। यह सांस्कृतिक उत्सव 30 अक्तूबर तक चलेगा। इस दिन रंगारंग कार्यक्रम होंगे।
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