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Jhajjar-Bahadurgarh News: स्वयंसेविकाओं ने दिया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश
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रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना करती प्राचार्या डॉ. आशा शर्मा।
बहादुरगढ़। वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय द्वारा गोद लिए गांव बामनोली के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में स्वास्तिक हॉस्पिटल बहादुरगढ़ के तत्वाधान में राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। स्वयंसेविकाओं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर रैली निकालकर गांव के लोगों को जागरूक किया। रैली को महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. आशा शर्मा द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। हॉस्पिटल से डॉ. मनीषा सैनी व उनकी टीम ने बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की। जिसमें विशेष तौर पर किशोरावस्था प्राप्त कर चुकी बालिकाओं के लिए स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की गई।
प्राचार्या डॉ. आशा शर्मा ने अतिथियों का माला व स्मृति चिन्ह देकर अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है जिसका उद्देश्य लोगों में बालिकाओं को असमानताओं और अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करना है। उन्होने बालिकाओं को जागरूक करते हुए बताया कि भारत में आज भी ऐसी रूढ़िवादी सोच के परिवार हैं जो बेटियों को जन्म नहीं देना चाहते या फिर उनके पैदा होने पर शोक मनाते हैं। डॉ. मनीषा सैनी ने बताया कि किशोरावस्था को जीवन की सबसे कठिन अवस्था कहा गया है। यह अवस्था है जब किशोर न तो बालक रहता है एवं न पूर्ण युवा बन पाता है। इसे परिवर्तन की अवस्था भी कहा गया है क्योंकि इस अवस्था में परिवर्तनों का अंबार लग जाता हैं। किशोरावस्था भावनात्मक असंतुलन और तनाव की अवधि है। उन्होंने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक परिवर्तनों के विषय में तथा उनके समाधान के बारे में बताया। शिविर में लगभग 75 बालिकाओं व स्टाफ सदस्यों की रक्तचाप, हीमोग्लोबिन व मासिक धर्म से संबंधित समस्या की जांच एवं दवा वितरित की गई। शिविर में मालती (डीडीओ) व नीलम (पीटीआई) का सहयोग सराहनीय रहा। इस कार्यक्रम का आयोजन वाईआरसी, एनएसएस, आउटरीच सेल व महिला प्रकोष्ठ द्वारा किया गया।
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प्राचार्या डॉ. आशा शर्मा ने अतिथियों का माला व स्मृति चिन्ह देकर अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है जिसका उद्देश्य लोगों में बालिकाओं को असमानताओं और अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करना है। उन्होने बालिकाओं को जागरूक करते हुए बताया कि भारत में आज भी ऐसी रूढ़िवादी सोच के परिवार हैं जो बेटियों को जन्म नहीं देना चाहते या फिर उनके पैदा होने पर शोक मनाते हैं। डॉ. मनीषा सैनी ने बताया कि किशोरावस्था को जीवन की सबसे कठिन अवस्था कहा गया है। यह अवस्था है जब किशोर न तो बालक रहता है एवं न पूर्ण युवा बन पाता है। इसे परिवर्तन की अवस्था भी कहा गया है क्योंकि इस अवस्था में परिवर्तनों का अंबार लग जाता हैं। किशोरावस्था भावनात्मक असंतुलन और तनाव की अवधि है। उन्होंने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक परिवर्तनों के विषय में तथा उनके समाधान के बारे में बताया। शिविर में लगभग 75 बालिकाओं व स्टाफ सदस्यों की रक्तचाप, हीमोग्लोबिन व मासिक धर्म से संबंधित समस्या की जांच एवं दवा वितरित की गई। शिविर में मालती (डीडीओ) व नीलम (पीटीआई) का सहयोग सराहनीय रहा। इस कार्यक्रम का आयोजन वाईआरसी, एनएसएस, आउटरीच सेल व महिला प्रकोष्ठ द्वारा किया गया।
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