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Jhajjar-Bahadurgarh News: गांव आसौदा में लगा दादा बूढ़े का परंपरागत मेला
Sun, 13 Sep 2026 04:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 13 Sep 2026 04:49 PM IST
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फोटो 85 : मेला परिसर में लगी खिलौनों की दुकानों पर खरीदारी करती महिलाएं और बच्चे। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। हर वर्ष की तरह इस बार भी आसौदा गांव में रविवार को दादा बूढ़ा मंदिर में भादों दूज मेले में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में बने तालाब से मिट्टी निकालकर मन्नतें मांगी। शाम के समय विशाल कुश्ती का आयोजन हुआ। इसमें आसपास के गांवों के अलावा कई जिलों के खिलाड़ियों ने भाग लिया।
रविवार की घनी सुबह ही दादा बूढ़ा मंदिर परिसर में दूज के अवसर पर ज्योति जला प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगने के लिए लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। दोपहर बाद तक मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगने वालों का तांता लगा रहा। हजारों लोगों विशेषकर पहले पुत्र को जन्म देने वाली पुत्रवती बेटियों ने बूढ़े के मंदिर में पूजा कर गांव में भेलियां बांटी।
हर वर्ष भादों माह की दूज को आयोजित होने वाले इस विशाल मेले में गांव से बाहर जाकर बसे परिवारों के अलावा दिल्ली व हरियाणा प्रदेश के दूसरे अनेक शहरों से लोगों ने यहां पहुंचकर दादा बूढ़ा के दर्शन किए और शीश झुकाकर सुख-शांति की कामना की। साथ ही दिल खोलकर लोगों ने दान भी दिया। मंदिर के आसपास खिलौनों की दुकानें भी लगी थी।
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आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण अपने-अपने पूरे परिवारों समेत यहां पहुंचे। दिनभर पूजा अर्चना का दौर जारी रहा। इसके कारण गांव से गुजरने वाले वाहनों की लंबी कतारों के कारण जाम लगा रहा।
मंदिर परिसर में बने तालाब से मिट्टी निकालने की वर्षों पुरानी परंपरा भी श्रद्धालुओं ने निभाई। मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी की। शाम के समय विशाल कुश्ती दंगल आयोजित किया गया। इसमें क्षेत्र के नामी पहलवानों के अलावा कई जिलों के पहलवान भी अपनी प्रतिभा का जोहर दिखाने के लिए यहां पहुंचे। आसौदा के अलावा मांडोठी व टांडाहेड़ी में भी हर साल की तरह दादा बूढ़े के मेले का आयोजन धूमधाम से किया गया। यहां दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश समेत दूर-दूर से लोग पहुंचे।
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बहादुरगढ़। हर वर्ष की तरह इस बार भी आसौदा गांव में रविवार को दादा बूढ़ा मंदिर में भादों दूज मेले में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में बने तालाब से मिट्टी निकालकर मन्नतें मांगी। शाम के समय विशाल कुश्ती का आयोजन हुआ। इसमें आसपास के गांवों के अलावा कई जिलों के खिलाड़ियों ने भाग लिया।
रविवार की घनी सुबह ही दादा बूढ़ा मंदिर परिसर में दूज के अवसर पर ज्योति जला प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगने के लिए लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। दोपहर बाद तक मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगने वालों का तांता लगा रहा। हजारों लोगों विशेषकर पहले पुत्र को जन्म देने वाली पुत्रवती बेटियों ने बूढ़े के मंदिर में पूजा कर गांव में भेलियां बांटी।
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हर वर्ष भादों माह की दूज को आयोजित होने वाले इस विशाल मेले में गांव से बाहर जाकर बसे परिवारों के अलावा दिल्ली व हरियाणा प्रदेश के दूसरे अनेक शहरों से लोगों ने यहां पहुंचकर दादा बूढ़ा के दर्शन किए और शीश झुकाकर सुख-शांति की कामना की। साथ ही दिल खोलकर लोगों ने दान भी दिया। मंदिर के आसपास खिलौनों की दुकानें भी लगी थी।
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आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण अपने-अपने पूरे परिवारों समेत यहां पहुंचे। दिनभर पूजा अर्चना का दौर जारी रहा। इसके कारण गांव से गुजरने वाले वाहनों की लंबी कतारों के कारण जाम लगा रहा।
मंदिर परिसर में बने तालाब से मिट्टी निकालने की वर्षों पुरानी परंपरा भी श्रद्धालुओं ने निभाई। मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी की। शाम के समय विशाल कुश्ती दंगल आयोजित किया गया। इसमें क्षेत्र के नामी पहलवानों के अलावा कई जिलों के पहलवान भी अपनी प्रतिभा का जोहर दिखाने के लिए यहां पहुंचे। आसौदा के अलावा मांडोठी व टांडाहेड़ी में भी हर साल की तरह दादा बूढ़े के मेले का आयोजन धूमधाम से किया गया। यहां दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश समेत दूर-दूर से लोग पहुंचे।

फोटो 85 : मेला परिसर में लगी खिलौनों की दुकानों पर खरीदारी करती महिलाएं और बच्चे। संवाद