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टीकरी बार्डर पर तमिलनाडु के किसानों ने किया प्रदर्शन
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खिलाडिय़ों की जीत की खुशी में दूसरों को मिठाई खिलाते सतीश छिकारा।
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। किसान आंदोलन के समर्थन व कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर रविवार को टीकरी बॉर्डर पर तमिलनाडु के किसान पहुंचे और केंद्र सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व तमिलनाडु किसान सभा के राज्य नेता पी पेरूमल, दातागीर, राममूर्ति, सदाशिवम और किसान सभा हरियाणा के राज्य सचिव सुमित सिंह ने किया।
पूरे देश का आंदोलन : पेरूमल
टीकरी बॉर्डर धरने पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने तमिलनाडु के किसानों का स्वागत किया। तमिलनाडु के किसान नेता पी पेरूमल ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि हम 2000 किलोमीटर का सफर तय करके आंदोलन में हिस्सा लेने आए हैं और मोदी सरकार को यह बताना चाहते हैं कि यह दो राज्यों का नहीं बल्कि अपनी फसल और जमीन को बचाने के लिए देशभर के किसानों का आंदोलन है। आज देश के किसानों की फसलों की सरकारी खरीद नहीं होती। किसान मजबूरीवश एमएसपी से कम रेट पर फसल बेचने और घाटा उठाने को मजबूर है, लाभकारी मूल्य नहीं मिलता इसलिए किसानों पर कर्ज है। तमिलनाडु से आए किसानों के नारों ने बॉर्डर पर बैठे दूसरे किसानों में भी जोश भर किया। हरियाणा किसान सभा के नेतृत्व के अलावा, अतर सिंह हुड्डा, साहिब और विकास आदि भी तमिलनाडु के किसानों के साथ रहे।
खाद्यान्न का संकट बढ़ाएंगे नए कानून
पेरूमल ने कहा कि इन तीन कृषि कानूनों के लागू होने के बाद तो खेती में कंपनी राज आ जाएगा और जिस तरह से अंग्रेजों ने देश की जनता को लूटा ये कॉरपोरेट घराने भी देश के किसानों की लूट करेंगे। इनका उद्देश्य खुद का मुनाफा बढ़ाना है न कि लोगों की खाद्यान्न की जरूरतों को पूरा करना। उन्होंने कहा कि आज मोदी सरकार और कॉरपोरेट घराने देश की मंडी व्यवस्था को बर्बाद कर प्राइवेट खरीदारों के हवाले करना चाहते हैं इसके चलते किसान की भी लूट होगी और साथ ही करोड़ों देशवासियों के लिए खाद्य का संकट भी पैदा हो जाएगा।
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पूरे देश का आंदोलन : पेरूमल
टीकरी बॉर्डर धरने पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने तमिलनाडु के किसानों का स्वागत किया। तमिलनाडु के किसान नेता पी पेरूमल ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि हम 2000 किलोमीटर का सफर तय करके आंदोलन में हिस्सा लेने आए हैं और मोदी सरकार को यह बताना चाहते हैं कि यह दो राज्यों का नहीं बल्कि अपनी फसल और जमीन को बचाने के लिए देशभर के किसानों का आंदोलन है। आज देश के किसानों की फसलों की सरकारी खरीद नहीं होती। किसान मजबूरीवश एमएसपी से कम रेट पर फसल बेचने और घाटा उठाने को मजबूर है, लाभकारी मूल्य नहीं मिलता इसलिए किसानों पर कर्ज है। तमिलनाडु से आए किसानों के नारों ने बॉर्डर पर बैठे दूसरे किसानों में भी जोश भर किया। हरियाणा किसान सभा के नेतृत्व के अलावा, अतर सिंह हुड्डा, साहिब और विकास आदि भी तमिलनाडु के किसानों के साथ रहे।
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खाद्यान्न का संकट बढ़ाएंगे नए कानून
पेरूमल ने कहा कि इन तीन कृषि कानूनों के लागू होने के बाद तो खेती में कंपनी राज आ जाएगा और जिस तरह से अंग्रेजों ने देश की जनता को लूटा ये कॉरपोरेट घराने भी देश के किसानों की लूट करेंगे। इनका उद्देश्य खुद का मुनाफा बढ़ाना है न कि लोगों की खाद्यान्न की जरूरतों को पूरा करना। उन्होंने कहा कि आज मोदी सरकार और कॉरपोरेट घराने देश की मंडी व्यवस्था को बर्बाद कर प्राइवेट खरीदारों के हवाले करना चाहते हैं इसके चलते किसान की भी लूट होगी और साथ ही करोड़ों देशवासियों के लिए खाद्य का संकट भी पैदा हो जाएगा।
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