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Agriculture: अमरूद की खेती से 15 लाख रुपये सालाना कमा रहे संदीप और अजय, अपना रहे यह तरीका

Mon, 01 Aug 2022 06:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह सुमित दलाल, संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)
सुमित दलाल, संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 01 Aug 2022 06:01 AM IST
सार

दोनों दोस्त समय पर सिंचाई और देसी खाद का प्रयोग करते हैं। मंडी में भी अधिक भाव मिलता है। संदीप से प्रभावित होकर उसके दोस्त अजय ने भी चार एकड़ में अमरूद का बाग लगाया। 

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Sandeep and Ajay earning Rs 15 lakh annually from guava cultivation
अमरूद का बाग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के झज्जर जिले में अहरी गांव का संदीप और दादनपुर गांव का युवा किसान अजय दोनों दोस्त हैं। संदीप ने अपनी रिश्तेदारी में रहकर अमरूद की खेती की जानकारी जुटाई और फिर दो एकड़ में अमरूद का बाग लगाया। अच्छी किस्म का बीज और देशी खाद के प्रयोग से अच्छा उत्पादन हासिल किया। प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये सालाना कमाया। अच्छी कमाई से खेती दो से बढ़ाकर आठ एकड़ में कर दी। संदीप से प्रभावित होकर उसके दोस्त अजय ने भी चार एकड़ में अमरूद का बाग लगाया। दोनों दोस्त आज 15 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। 

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अहरी गांव के किसान संदीप ने अपना अनुभव सांझा करते हुए बताया कि वह दस साल तक जोंधी गांव में अपने रिश्तेदार के यहां रहा था। उसने वहां के किसानों से अमरूद के बाग के बारे में पूरी जानकारी ली। जिसके बाद उसने अमादलपुर गांव में अपने दो एकड़ में अमरूद का बाग लगाया। अच्छी क्वालिटी का अमरूद लगाया जो खाने में मीठा और स्वादिष्ट था।
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उसने गोबर की खाद का प्रयोग किया। समय पर बुआई, खाद और सिंचाई की। नतीजा रहा कि अच्छी पैदावार हुई। मंडी में उसके अमरूद की अलग पहचान थी। इसलिए दूसरे किसानों से दाम भी अच्छे मिलते थे। अच्छा मुनाफा होता गया और वह हर साल दो एकड़ बाग बढ़ाता गया। वर्तमान में वह 8 एकड़ के बाग से अच्छी आमदनी कर रहा है ।
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उसकी खेती और अच्छा मुनाफा देखकर उसका दोस्त अजय भी प्रभावित हुआ। उसने भी चार एकड़ में अमरूद का बाग लगाया और आज वह भी 4 लाख रुपये तक सालाना कमा रहा है। अजय ने बताया कि परंपरागत खेती से अधिक अमरूद के बाग सालाना ज्यादा बचत होती है। किसान अजय ने 4 एकड़ जमीन में अमरूद का बाग लगा रखा है। एक एकड़ बाग ठेके पर दे रखा है।

Sandeep and Ajay earning Rs 15 lakh annually from guava cultivation
किसान अजय स्थानीय निवासी को पौधों के बारे में जानकारी देते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

दोनों दोस्तों ने साथ शुरू की नर्सरी 
दोनों दोस्तों ने साथ मिलकर दो साल पहले नर्सरी की शुरूआत की उन्होंने बताया कि कोरोना काल में जब सब पौधा रोपन कर रहे थे। उस समय नर्सरी की शुरूआत करने की सोची। लोगों के अच्छे रुझान को देखते हुए नर्सरी में फलदार, छायादार और सब्जियों की पौध तैयार कर रहे है। इस नर्सरी से वह सालाना करीबन दो लाख रुपये की कमाई कर रहे है।

अजय ने बताया कि वह अपनी नर्सरी को ओर अधिक आधुनिक बनाने की तैयारी कर रहे। जिसके बाद किसानों को हर समय सब्जियों की पौध तैयार मिल सकेगी। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीबन एक साल में यह नर्सरी बनकर तैयार हो जाएगी। नर्सरी में तैयार फलदार व छायादार पौधे 20 रुपये से एक हजार रुपये तक  बेचते है।

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