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किरण बनी कोरोना काल में लोगों की उम्मीद की किरण
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झज्जर। कोरोना काल से लेकर अब तक प्रवासी श्रमिकों, कैंसर के मरीजों की सेवाओं और महिलाओं की मदद करने वाली महिला थाना प्रभारी किरण देवीसमाज के लिए एक प्ररेणा बनी हैं। कविता लिखने और सुनने की शौकीन किरण अब अपनी कविता के जरिए लोगों को नशे से मुक्ति दिलाने की मुहिम छेडे़ हैं। पुलिस और सामाजिक संगठन भी सम्मानित कर चुके हैं।
कविता वर्ष 2003 में पुलिस की नौकरी में आईं। उन्होंने बताया कि पुलिस में नौकरी के चलते काफी व्यस्त समय होने के बावजूद समय निकालकर कविता लिखतीं और सुनते का भी शौक रखतीं हैं। इन कविताओं के माध्यम से ही उन्होंने कोरोना काल में लोगों का हौंसला बनाए रखा। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में उनकी ड्यूटी बाढ़सा एम्स स्थित पुलिस चौकी मे थी। एम्स में मरीजों की मारामारी थी। रोज 450 से 500 मरीज पहुंच रहे थे, ऑक्सीजन को लेकर मारामारी मची थी, उन्होंने दिन रात ड्यूटी करके व्यवस्था बनाई और मरीजों को भर्ती कराया। उन्हेंऑक्सीजन के प्रबंध में भी सहयोग किया।
प्रवासी श्रमिकों को राहत देने के लिए उनके लिए शेल्टर होम, खाने पीने की व्यवस्था की। महिला और बच्चों का विशेष ध्यान रखा। इन दिनों वे कविताओं के माध्यम से लोगों को नशा न करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। नशा मुक्ति को लेकर कविताओं के माध्यम से आमजन को जागरूक करने का काम कर रही हैं। वहीं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, पौधरोपण, नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने का काम लगातार कर रही हैं।
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उन्होंने बताया कि जब वे चरखी दादरी के जनता कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें कविताओं का शौक लगा। कुमार विश्वास और कवि हरिओम पंवार उनके पसंदीदा कवि हैं जिनकी कविताएं सुुनती रहती है। सरकार की ओर से कोरोना वारियर्स के रूप में उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। कई संस्थाओं ने भी सामाजिक सेवाओं के लिए उन्हें सम्मानित किया है।
बकौल किरण कोरोना के दौरान उनके पति कुलदीप सिंह बेटी और सास मां कोरोना की चपेट में आ गई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने परिजनों की देखभाल के साथ अपनी ड्यूटी भी जिम्मेदारी से निभाई। बाढ़सा एम्स के अलावा बादली क्षेत्र से होकर गुजरने वाले केएमपी एक्सप्रेसवे पर भी उन्होंने प्रवासी श्रमिकों की देखभाल करने का काम किया। बाढ़सा एम्स में भर्ती कैंसर के मरीजों की सेवा भी उन्होंने जी जान से की थी।
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कविता वर्ष 2003 में पुलिस की नौकरी में आईं। उन्होंने बताया कि पुलिस में नौकरी के चलते काफी व्यस्त समय होने के बावजूद समय निकालकर कविता लिखतीं और सुनते का भी शौक रखतीं हैं। इन कविताओं के माध्यम से ही उन्होंने कोरोना काल में लोगों का हौंसला बनाए रखा। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में उनकी ड्यूटी बाढ़सा एम्स स्थित पुलिस चौकी मे थी। एम्स में मरीजों की मारामारी थी। रोज 450 से 500 मरीज पहुंच रहे थे, ऑक्सीजन को लेकर मारामारी मची थी, उन्होंने दिन रात ड्यूटी करके व्यवस्था बनाई और मरीजों को भर्ती कराया। उन्हेंऑक्सीजन के प्रबंध में भी सहयोग किया।
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प्रवासी श्रमिकों को राहत देने के लिए उनके लिए शेल्टर होम, खाने पीने की व्यवस्था की। महिला और बच्चों का विशेष ध्यान रखा। इन दिनों वे कविताओं के माध्यम से लोगों को नशा न करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। नशा मुक्ति को लेकर कविताओं के माध्यम से आमजन को जागरूक करने का काम कर रही हैं। वहीं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, पौधरोपण, नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने का काम लगातार कर रही हैं।
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उन्होंने बताया कि जब वे चरखी दादरी के जनता कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें कविताओं का शौक लगा। कुमार विश्वास और कवि हरिओम पंवार उनके पसंदीदा कवि हैं जिनकी कविताएं सुुनती रहती है। सरकार की ओर से कोरोना वारियर्स के रूप में उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। कई संस्थाओं ने भी सामाजिक सेवाओं के लिए उन्हें सम्मानित किया है।
बकौल किरण कोरोना के दौरान उनके पति कुलदीप सिंह बेटी और सास मां कोरोना की चपेट में आ गई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने परिजनों की देखभाल के साथ अपनी ड्यूटी भी जिम्मेदारी से निभाई। बाढ़सा एम्स के अलावा बादली क्षेत्र से होकर गुजरने वाले केएमपी एक्सप्रेसवे पर भी उन्होंने प्रवासी श्रमिकों की देखभाल करने का काम किया। बाढ़सा एम्स में भर्ती कैंसर के मरीजों की सेवा भी उन्होंने जी जान से की थी।