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प्राध्यापकों ने बायोमैट्रिक अटेंडेंस का किया बहिष्कार
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
Updated Sun, 03 Apr 2016 02:02 AM IST
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राोष्ा
- फोटो : Bureau
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उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लगे प्राध्यापकों ने शनिवार को हरियाणा विद्यालय बोर्ड के बायोमैट्रिक अटेंडेंस लगाने के फैसला पर कड़ा एतराज जताते हुए इसका बहिष्कार किया है। प्राध्यापकों ने कहा कि बायोमैट्रिक मशीन में अक्सर फाल्ट आता है, जिससे उन्हें बेवजह परेशानी झेलनी पड़ती है।
बोर्ड की ओर से बायोमैट्रिक हाजिरी न लगाने पर किसी तरह से कोई कार्रवाई व उन पर दबाव बनाया गया तो वे आवाज बुलंद करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
रेलवे रोड स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाए उत्तर बारहवीं की पुस्तिका मूल्यांकन केंद्र पर कार्यरत प्राध्यापकों ने रोष स्वरूप एकत्रित होकर मनमाने फैसले पर रोष जताया। हस्ला के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह, मंजू, डॉ. कैलाश, संगीता, मंजू, रमेश, विनोद, राजवंती, सुनीता, मनीषा सहित कई अन्य प्राध्यापकों ने कहा कि वे बायोमैट्रिक अटेंडेंस के माध्यम से उन्हें परेशान किया जा रहा है। इसका पुरजोर विरोध करते हैं और आगे किसी भी दिन इससे अटेंडेंस नहीं लगाएंगे।
हितों पर नहीं कटौती पर दे रहे ध्यान
कप्तान सिंह ने कहा कि उन्हें उनके हितों को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। दिल्ली में उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन पर प्रति कापी 25 रुपये मिलते हैं, जबकि हरियाणा में 9 रुपये। ऐसे में यह उससे काफी कम है। सुबह से लेकर शाम तक प्राध्यापक व टीचर इसी काम में लगे रहते हैं। लेकिन उसके बाद भी उन्हें बराबर मानदेय नहीं दिया जा रहा।
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उन्होंने कहा कि डेली भत्ते के नाम भी खूब भेदभाव हो रहा है। उन्हें 40 रुपये तो बोर्ड फ्लाइंग को 200 रुपये दिया जा रहा है। इसी तरह से चाय का भत्ता भी 15 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से देने की मांग की गई।
हर रोज जांची जाए 20 कॉपी
प्राध्यापकों ने कहा कि हर रोज एक उन्हें कम से कम 30 कापी की हर हाल में जांच करनी है। कई बार तो एक ही कॉपी को जांचने में काफी समय लग जाता है। गुणवत्ता को ध्यान रखते हुए यह सब कार्य करना पड़ता है। यदि 30 की बजाय 20 कापी जांचने के लिए दी जाए तो प्राध्यापकों का काम का बोझ भी कम होगा और गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान रहेगा।
एक घंटा रहा कार्य बाधित
बायोमैट्रिक अटेंडेंस न लगाने को लेकर प्राध्यापकों में रोष देखने को मिला। उन्होंने बोर्ड अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष भी जताया। साथ में अपने संगठन पर भी बल दिया। प्राध्यापकों ने साढ़े आठ बजे से लेकर दस बजे तक एकत्रित होकर आवाज उठाई। इसके बाद वे फिर से मूल्यांकन कार्य में जुट गए। हालांकि उन्होंने बोर्ड को चेताया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया तो वे मूल्यांकन कार्य करने से भी अपने हाथ पीछे खींच लेंगे।
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बोर्ड की ओर से बायोमैट्रिक हाजिरी न लगाने पर किसी तरह से कोई कार्रवाई व उन पर दबाव बनाया गया तो वे आवाज बुलंद करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
रेलवे रोड स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाए उत्तर बारहवीं की पुस्तिका मूल्यांकन केंद्र पर कार्यरत प्राध्यापकों ने रोष स्वरूप एकत्रित होकर मनमाने फैसले पर रोष जताया। हस्ला के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह, मंजू, डॉ. कैलाश, संगीता, मंजू, रमेश, विनोद, राजवंती, सुनीता, मनीषा सहित कई अन्य प्राध्यापकों ने कहा कि वे बायोमैट्रिक अटेंडेंस के माध्यम से उन्हें परेशान किया जा रहा है। इसका पुरजोर विरोध करते हैं और आगे किसी भी दिन इससे अटेंडेंस नहीं लगाएंगे।
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हितों पर नहीं कटौती पर दे रहे ध्यान
कप्तान सिंह ने कहा कि उन्हें उनके हितों को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। दिल्ली में उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन पर प्रति कापी 25 रुपये मिलते हैं, जबकि हरियाणा में 9 रुपये। ऐसे में यह उससे काफी कम है। सुबह से लेकर शाम तक प्राध्यापक व टीचर इसी काम में लगे रहते हैं। लेकिन उसके बाद भी उन्हें बराबर मानदेय नहीं दिया जा रहा।
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उन्होंने कहा कि डेली भत्ते के नाम भी खूब भेदभाव हो रहा है। उन्हें 40 रुपये तो बोर्ड फ्लाइंग को 200 रुपये दिया जा रहा है। इसी तरह से चाय का भत्ता भी 15 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से देने की मांग की गई।
हर रोज जांची जाए 20 कॉपी
प्राध्यापकों ने कहा कि हर रोज एक उन्हें कम से कम 30 कापी की हर हाल में जांच करनी है। कई बार तो एक ही कॉपी को जांचने में काफी समय लग जाता है। गुणवत्ता को ध्यान रखते हुए यह सब कार्य करना पड़ता है। यदि 30 की बजाय 20 कापी जांचने के लिए दी जाए तो प्राध्यापकों का काम का बोझ भी कम होगा और गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान रहेगा।
एक घंटा रहा कार्य बाधित
बायोमैट्रिक अटेंडेंस न लगाने को लेकर प्राध्यापकों में रोष देखने को मिला। उन्होंने बोर्ड अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष भी जताया। साथ में अपने संगठन पर भी बल दिया। प्राध्यापकों ने साढ़े आठ बजे से लेकर दस बजे तक एकत्रित होकर आवाज उठाई। इसके बाद वे फिर से मूल्यांकन कार्य में जुट गए। हालांकि उन्होंने बोर्ड को चेताया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया तो वे मूल्यांकन कार्य करने से भी अपने हाथ पीछे खींच लेंगे।