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जान को जोखिम में डाल बगैर पीपीई किट के काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मी
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बिना पीपीई किट सैंपल लेता स्वास्थ्यकर्मी। संवाद
- फोटो : Jhjhar
झज्जर। कोरोना का संक्रमण फिर से शुरू हो जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कम नहीं हो रही है। दूसरों को सजग करने वाला स्वास्थ्य विभाग अपने कर्मियों को जोखिम में डाल रहा है। विभाग के कर्मियों को बिना पीपीई किट के ही जांच के लिए भेजा जा रहा है। जिले में करीब 1450 स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी, चिकित्सक व अधिकारी कोरोना से लोगों को बचाव के काम में जुटे हैं। इनमें से काफी कर्मचारी, अधिकारी व डॉक्टर पहले भी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी पीपीई किट नहीं पहनी जा रही है। विभाग की ओर से क्षेत्र में भेजी जाने वाली टीम हो या अस्पतालों में स्टाफ कोई भी पीपीई किट नहीं पहन रहा है। जिले में कोरोना संक्रमितों का आंकड़े तेजी से बढ़ रहा है।
सैंपलिंग के स्थान पर भी लापरवाही
जिले के अस्पतालों में कर्मियों को ड्यूटी करते देख स्वास्थ्य विभाग क ी लापरवाही साफ नजर आ रही है। अस्पतालों में जिस स्थान पर कोरोना की सैकड़ों लोगों की जांच हो रही है, उस स्थान पर बिना पीपीई किट के स्वास्थ्यकर्मी काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी जान का खतरा है। इस बात का अंदाजा शायद उनको नहीं है। विभाग के आला अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जब पिछले साल अप्रैल के अंत में जब कोरोना की शुरुआत हुई थी तो किट के बिना कोई भी स्वास्थ्य कर्मी जांच के लिए भेजा नहीं जाता था। कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के केवल दस्ताने के भरोसे मरीजों के बीच में ड्यूटी कर रहे हैं। पहले एक केस मिल जाने पर पूरे क्षेत्र को हॉट स्पाट बना दिया जाता था। बांस-बल्ली लगाकर यातायात रोका जाता था। लेकिन अब प्राथमिक कदम भी नहीं उठाया जा रहा है। विभाग की ओर से कोरोना संक्रमित को होम आईसोलेशन में रखा जा रहा है।
इन स्थानों पर होना चाहिए पीपीई किट का प्रयोग
-स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा सैंपलिंग करने के दौरान।
-कोरोना संक्रमितों का इलाज करने वाला स्टाफ।
-कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में ले जाने वाला स्टाफ।
-कंटेनमेंट जोन में जाने वाले कर्मचारी।
स्वास्थ्य विभाग के के कर्मचारी जिस स्थान पर आवश्यकता होती है वहां पर पीपीई किट का प्रयोग करते हैं। आवश्यकता के अनुसार सभी तैयारियां विभाग के पास हैं। जिस समय कोरोना संक्रमण फैलने की शुरूआत हुई उस समय हालात कुछ और थे। उसके बाद नए नियम बने हैं। हर जगह पीपीई किट पहन की स्वास्थ्य कर्मचारी घूमेंगे तो उससे डर फैलेगा। लेकिन जिस स्थान पर पीपीई किट की आवश्यकता होगी वहां पर कर्मचारी पीपीई किट अवश्य पहनेंगे।
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- डॉ. संजीव मलिक, नोडल अधिकारी, झज्जर।
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सैंपलिंग के स्थान पर भी लापरवाही
जिले के अस्पतालों में कर्मियों को ड्यूटी करते देख स्वास्थ्य विभाग क ी लापरवाही साफ नजर आ रही है। अस्पतालों में जिस स्थान पर कोरोना की सैकड़ों लोगों की जांच हो रही है, उस स्थान पर बिना पीपीई किट के स्वास्थ्यकर्मी काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी जान का खतरा है। इस बात का अंदाजा शायद उनको नहीं है। विभाग के आला अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जब पिछले साल अप्रैल के अंत में जब कोरोना की शुरुआत हुई थी तो किट के बिना कोई भी स्वास्थ्य कर्मी जांच के लिए भेजा नहीं जाता था। कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के केवल दस्ताने के भरोसे मरीजों के बीच में ड्यूटी कर रहे हैं। पहले एक केस मिल जाने पर पूरे क्षेत्र को हॉट स्पाट बना दिया जाता था। बांस-बल्ली लगाकर यातायात रोका जाता था। लेकिन अब प्राथमिक कदम भी नहीं उठाया जा रहा है। विभाग की ओर से कोरोना संक्रमित को होम आईसोलेशन में रखा जा रहा है।
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इन स्थानों पर होना चाहिए पीपीई किट का प्रयोग
-स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा सैंपलिंग करने के दौरान।
-कोरोना संक्रमितों का इलाज करने वाला स्टाफ।
-कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में ले जाने वाला स्टाफ।
-कंटेनमेंट जोन में जाने वाले कर्मचारी।
स्वास्थ्य विभाग के के कर्मचारी जिस स्थान पर आवश्यकता होती है वहां पर पीपीई किट का प्रयोग करते हैं। आवश्यकता के अनुसार सभी तैयारियां विभाग के पास हैं। जिस समय कोरोना संक्रमण फैलने की शुरूआत हुई उस समय हालात कुछ और थे। उसके बाद नए नियम बने हैं। हर जगह पीपीई किट पहन की स्वास्थ्य कर्मचारी घूमेंगे तो उससे डर फैलेगा। लेकिन जिस स्थान पर पीपीई किट की आवश्यकता होगी वहां पर कर्मचारी पीपीई किट अवश्य पहनेंगे।
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- डॉ. संजीव मलिक, नोडल अधिकारी, झज्जर।