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टीकरी बार्डर पर बढ़ रही किसानों की संख्या
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बहादुरगढ़। टीकरी बार्डर पर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले साढ़े सात माह से ज्यादा समय से किसान सड़क पर बैठकर धरना दे रहेे हैं। कई महीने से सरकार व किसानों के बीच कोई वार्ता नहीं होने से किसानों में सरकार के प्रति रोष पनप रहा है। वीरवार को टीकरी बार्डर पर हुई सभा में किसानों को दिल्ली, हरियाणा व पंजाब समेत कई राज्यों से आए किसान नेताओं और अन्य संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।
महिलाओं ने भी बार्डर पर पहुंचकर किसानों के हक की आवाज बुलंद की। पिछले 2-3 माह से धरने पर किसानों की संख्या कम हो रही थी लेकिन अब फिर बढ़ने लगी है। किसानों ने सरकार को चेताया कि चाहे गर्मी का मौसम हो या फिर बारिश या सर्दी का मौसम हो वे तब तक यहां से नहीं उठेंगे जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता। तीनों कृषि कानून उनके हित में नहीं है बल्कि पूंजीवादी व्यवस्था को बढ़ावा देते हैं। वीरवार को काफी लोगों ने टीकरी बार्डर पहुंचकर किसानों का समर्थन किया। पंजाब से काफी किसान रेलगाड़ियों से बहादुरगढ़ पहुंचे। दिल्ली गेट झज्जर से आए जगबीर ने कहा कि महंगाई चरम सीमा पर है। किसानों की जमीन को पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है। हर वर्ग के लोग सरकार से नाखुश हैं। उन्होंने कहा कि हमें भाजपा सरकार को उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी हराना है।
दिल्ली से आए रमेश ढुल, भारतीय किसान यूनियन जुलाना के कुलदीप ढांडा ने भी किसानों का समर्थन किया। प्रो. रणजीत सिंह गुम्मड़ चंडीगढ़, बारूराम नरवाना जींद, जोगेंद्र नैन, सदानंद प्रधान बाडो पट्टी टोल प्लाजा, राम सिंह बाड़ो टोल पट्टी हिसार, दिल्ली से सेवानिवृत्त प्राचार्य शारदा दीक्षित, सुमन हुड्डा रोहतक, उमेद सिंह हिसार, धोला जेवरा हिसार, बलवान सिंह हिसार, बलबीर पांतड़ा और भारतीय किसान यूनियन नीलवाल दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष महावीर राठी ने भी टीकरी बार्डर पर आंदोलनरत किसानों को समर्थन दिया।
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सुमन हुड्डा ने कहा कि बाडो टोल पट्टी हिसार से जो काफिला आया है जिसमें महिलाओं की संख्या ज्यादा रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में नारी शक्ति बढ़चढ़ कर भाग ले रही है। महिलाएं अब बार्डर पर बैठकर अपने हकों के लिए बोलती हैं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक संख्या में महिलाओं को आंदोलन का हिस्सा बनना चाहिए। संयुक्त किसान मोर्चा कमेटी ने प्रो. रणजीत सिंह को हरा पटका देकर सम्मानित किया। राम सिंह के साथ काफी संख्या में किसान टीकरी बार्डर पहुंचकर आंदोलन का हिस्सा बने। मंच से वक्ताओं ने कहा कि वे गत वर्ष से तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर दिल्ली की दहलीज पर आंदोलन चला रहे हैं मगर अभी तक सरकार कोई सुध नहीं ले रही बल्कि अपनी हठधर्मिता पर अड़ी है। किसानों ने कहा कि तीनों कानून निरस्त होने तक वे यहां से नहीं हटेंगे।
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महिलाओं ने भी बार्डर पर पहुंचकर किसानों के हक की आवाज बुलंद की। पिछले 2-3 माह से धरने पर किसानों की संख्या कम हो रही थी लेकिन अब फिर बढ़ने लगी है। किसानों ने सरकार को चेताया कि चाहे गर्मी का मौसम हो या फिर बारिश या सर्दी का मौसम हो वे तब तक यहां से नहीं उठेंगे जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता। तीनों कृषि कानून उनके हित में नहीं है बल्कि पूंजीवादी व्यवस्था को बढ़ावा देते हैं। वीरवार को काफी लोगों ने टीकरी बार्डर पहुंचकर किसानों का समर्थन किया। पंजाब से काफी किसान रेलगाड़ियों से बहादुरगढ़ पहुंचे। दिल्ली गेट झज्जर से आए जगबीर ने कहा कि महंगाई चरम सीमा पर है। किसानों की जमीन को पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है। हर वर्ग के लोग सरकार से नाखुश हैं। उन्होंने कहा कि हमें भाजपा सरकार को उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी हराना है।
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दिल्ली से आए रमेश ढुल, भारतीय किसान यूनियन जुलाना के कुलदीप ढांडा ने भी किसानों का समर्थन किया। प्रो. रणजीत सिंह गुम्मड़ चंडीगढ़, बारूराम नरवाना जींद, जोगेंद्र नैन, सदानंद प्रधान बाडो पट्टी टोल प्लाजा, राम सिंह बाड़ो टोल पट्टी हिसार, दिल्ली से सेवानिवृत्त प्राचार्य शारदा दीक्षित, सुमन हुड्डा रोहतक, उमेद सिंह हिसार, धोला जेवरा हिसार, बलवान सिंह हिसार, बलबीर पांतड़ा और भारतीय किसान यूनियन नीलवाल दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष महावीर राठी ने भी टीकरी बार्डर पर आंदोलनरत किसानों को समर्थन दिया।
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सुमन हुड्डा ने कहा कि बाडो टोल पट्टी हिसार से जो काफिला आया है जिसमें महिलाओं की संख्या ज्यादा रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में नारी शक्ति बढ़चढ़ कर भाग ले रही है। महिलाएं अब बार्डर पर बैठकर अपने हकों के लिए बोलती हैं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक संख्या में महिलाओं को आंदोलन का हिस्सा बनना चाहिए। संयुक्त किसान मोर्चा कमेटी ने प्रो. रणजीत सिंह को हरा पटका देकर सम्मानित किया। राम सिंह के साथ काफी संख्या में किसान टीकरी बार्डर पहुंचकर आंदोलन का हिस्सा बने। मंच से वक्ताओं ने कहा कि वे गत वर्ष से तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर दिल्ली की दहलीज पर आंदोलन चला रहे हैं मगर अभी तक सरकार कोई सुध नहीं ले रही बल्कि अपनी हठधर्मिता पर अड़ी है। किसानों ने कहा कि तीनों कानून निरस्त होने तक वे यहां से नहीं हटेंगे।