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भारत बंद को सफल बनाने के लिए किसान नेताओं ने बाजारों में कराई मुनादी
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रेलवे रोड पर वीरवार को मुनादी करती हुई किसान नेताओं की गाड़ी।
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। 26 मार्च शुक्रवार को भारत बंद के आह्वान को लेकर किसानों द्वारा लगातार व्यापारियों, दुकानदारों, ट्रांसपोर्टरों से समर्थन की अपील की जा रही है। वीरवार को किसान नेताओं ने अपने वाहनों पर लाउड स्पीकर लगाकर शहर के बाजारों में बंद में शामिल होने के लिए मुनादी भी कराई।
किसान संगठनों द्वारा तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। पिछले दिनों किसान नेताओं ने 26 मार्च को भारत बंद का एलान किया था। इसको लेकर लगातार किसान संगठन विचार विमर्श करते रहे हैं। साथ ही गांवों में भी दौरे करके ग्रामीणों से इस बंद में शामिल होने का आह्वान किया गया है।
पंजाब के किसान नेता परगट सिंह ने कहा कि 26 मार्च को भारत बंद के दौरान एंबुलेंस, प्राइवेट वाहन में मरीज, दूध और जरूरी सेवाओं के वाहनों को नहीं रोका जाएगा। वे तो शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चला रहे हैं, लेकिन सरकार के इशारे पर मामले को तूल देने का कार्य हो रहा है। वे बार्डर पर चार माह से अधिक समय ये आंदोलन चला रहे हैं और शांति व्यवस्था बनाते हुए अपनी आवाज उठा रहे हैं। जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को निरस्त नहीं करती तब तक उनका आंदोलन चलता रहेगा। सरकार वार्ता के लिए बुलाएगी तो किसान संगठनों से जुड़े नेता जाएंगे भी। उन्होंने कहा कि किसान दुकानें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बंद कराएंगे। इस बंद में व्यापारियों, शिक्षक संघ, छात्र संघों से जुड़े लोगों को भी बंद में शामिल किया जाएगा।
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पहले से अलग होगा यह बंद : नैन
हरियाणा किसान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर व हरियाणा के किसान नेता जोगेंद्र नैन ने कहा कि 26 मार्च को होने वाला बंद पहले बुलाए गए बंद से अलग होगा। इसका असर देश के सभी राज्यों और शहरों में देखने को मिलेगा। गांव-गांव जाकर लोगों से भी इसमें शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है। किसान संगठन के नेताओं ने कहा कि संगठित और असंगठित क्षेत्र की ट्रेड यूनियनों, व्यापारियों, आढ़ती संघों, मजदूर यूनियन, कृषि यूनियन, ट्रांसपोर्ट संघ, शिक्षक संघ युवाओं और छात्र संघ के नेता भी भारत बंद में शामिल होंगे। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने पर उतारू है, लेकिन आए दिन इसमें हरियाणा, पंजाब के अलावा अन्य प्रदेशों के किसानों की भीड़ बढ़ती जा रही है। चाहे टीकरी बॉर्डर हो, सिंघु बार्डर या फिर गाजीपुर बॉर्डर दिल्ली के सभी बॉर्डरों पर किसान अपना डेरा डाले हुए हैं और किसान इन सीमाओं से तभी वापस जाएंगे, जब उनकी मांगे मान ली जाएंगी।
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किसान संगठनों द्वारा तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। पिछले दिनों किसान नेताओं ने 26 मार्च को भारत बंद का एलान किया था। इसको लेकर लगातार किसान संगठन विचार विमर्श करते रहे हैं। साथ ही गांवों में भी दौरे करके ग्रामीणों से इस बंद में शामिल होने का आह्वान किया गया है।
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पंजाब के किसान नेता परगट सिंह ने कहा कि 26 मार्च को भारत बंद के दौरान एंबुलेंस, प्राइवेट वाहन में मरीज, दूध और जरूरी सेवाओं के वाहनों को नहीं रोका जाएगा। वे तो शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चला रहे हैं, लेकिन सरकार के इशारे पर मामले को तूल देने का कार्य हो रहा है। वे बार्डर पर चार माह से अधिक समय ये आंदोलन चला रहे हैं और शांति व्यवस्था बनाते हुए अपनी आवाज उठा रहे हैं। जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को निरस्त नहीं करती तब तक उनका आंदोलन चलता रहेगा। सरकार वार्ता के लिए बुलाएगी तो किसान संगठनों से जुड़े नेता जाएंगे भी। उन्होंने कहा कि किसान दुकानें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बंद कराएंगे। इस बंद में व्यापारियों, शिक्षक संघ, छात्र संघों से जुड़े लोगों को भी बंद में शामिल किया जाएगा।
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पहले से अलग होगा यह बंद : नैन
हरियाणा किसान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर व हरियाणा के किसान नेता जोगेंद्र नैन ने कहा कि 26 मार्च को होने वाला बंद पहले बुलाए गए बंद से अलग होगा। इसका असर देश के सभी राज्यों और शहरों में देखने को मिलेगा। गांव-गांव जाकर लोगों से भी इसमें शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है। किसान संगठन के नेताओं ने कहा कि संगठित और असंगठित क्षेत्र की ट्रेड यूनियनों, व्यापारियों, आढ़ती संघों, मजदूर यूनियन, कृषि यूनियन, ट्रांसपोर्ट संघ, शिक्षक संघ युवाओं और छात्र संघ के नेता भी भारत बंद में शामिल होंगे। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने पर उतारू है, लेकिन आए दिन इसमें हरियाणा, पंजाब के अलावा अन्य प्रदेशों के किसानों की भीड़ बढ़ती जा रही है। चाहे टीकरी बॉर्डर हो, सिंघु बार्डर या फिर गाजीपुर बॉर्डर दिल्ली के सभी बॉर्डरों पर किसान अपना डेरा डाले हुए हैं और किसान इन सीमाओं से तभी वापस जाएंगे, जब उनकी मांगे मान ली जाएंगी।