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पैथालॉजिस्ट ने ड्यूटी से रिजाइन को लेकर लिखा पत्र

Wed, 03 Aug 2016 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर Updated Wed, 03 Aug 2016 12:28 AM IST
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हेल्‍थ्‍ा क्राइम - फोटो : Desk
चार माह पहले नागरिक अस्पताल में पैथालाजिस्ट की जिम्मेदारी संभालने वाली एक डॉक्टर यहां की व्यवस्थाओं से नाखुश होकर अब सरकारी स्वास्थ्य सेवा से मुंह मोड़ने के लिए तैयारी कर ली है। अस्पताल में अंदर खाने क्या कुछ चल रहा है इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं को लेकर कई कर्मचारियों में अंदर ही अंदर रोष पनपा रहता है। खासतौर पर विशेषज्ञ डॉक्टर पोस्टमार्टम ड्यूटी को आपत्ति जताते रहते हैं। ऐसे में अंदर खाने में डाक्टर ड्यूटी रोस्टर को लेकर सवाल खड़े करते रहते हैं। जिस दिन स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की ड्यूटी पोस्टमार्टम प्रक्रिया के लिए लगाई जाती है उस दिन ओपीडी में मरीज भी कई-कई देर तक बिना इलाज के लिए परेशान ही दिखते हैं।
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अस्पताल सूत्रों के अनुसार कुछ रोज पूर्व ड्यूटी रोस्टर को लेकर ही यहां की पैथालॉजिस्ट ने आपत्ति जताई थी। इस पर प्रबंधन ने यह काम ड्यूटी में ही शामिल होने का तर्क दिया तो उन्होंने इस पर एतराज जताते हुए नौकरी से रिजाइन देने की ठान ली। अस्पताल की पैथालॉजिस्ट कहना है कि उन्हें पोस्टमार्टम ड्यूटी को लेकर स्थिति सही से स्पष्ट तक नहीं होती। लैब में जांच का कार्य प्रभावित होने से मरीज भी परेशान हो जाते हैं। ऐसे में परेशान होकर अब उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से मुंह मोड़ने की ठान ली है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को पत्र भी लिखा है। नौकरी से रिजाइन के पीछे उन्होंने तर्क दिया कि जब भी ड्यूटी रोस्टर बनाया जाता है तो उसको लेकर चर्चा तक नहीं होती। उधर, इस मामले में जब अस्पताल के एमएस डॉ. जितेंद्र कादयान व आरएमओ डॉ. विनय देसवाल से बात की गई तो उनके संज्ञान में रिजाइन करने की कोई बात नहीं आई है। यदि रिजाइन देना ही है तो इसका फैसला भी उच्च अधिकारियों के स्तर पर ही होना है। उन्हें इसके बारे में कुछ भी पता नहीं।  
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बता दें कि बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में लंबे अर्से से पैथालॉजिस्ट की कमी खल रही थी। जिसके कारण किसी भी तरह की गांठ व अन्य गंभीर बीमारी की जांच का कार्य नहीं हो पा रहा था, लेकिन इसी वर्ष 29 मार्च को ही यहां पैथालॉजिस्ट ड्यूटी ज्वाइन की थी, लेकिन अभी चार माह ही बीते थे कि उन्होंने इसके लिए हाथ खड़े कर दिए। इसके लिए अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी खड़ा किया।
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होने लगी थी एफएनएसी
पैथालॉजिस्ट के आने से टीबी और दूसरी बीमारी से संबंधित गांठ व अन्य जांच की सुविधा मिलनी शुरू हो गई थी। बाहर से एफएनएसी करवाने पर कम से कम 500 से 600 रुपये एक मरीज को खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन पैथालॉजिस्ट के उपलब्ध होने पर उन्हें यहां इसके लिए कोई चार्ज नहीं देना पड़ रहा। अप्रैल माह से लेकर अब तक यहां पर अनेक लोग एफएनएसी जांच का फायदा उठा चुके हैं।
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