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Jhajjar-Bahadurgarh News: बॉर्डर सील...ऊंची दीवार, कंटीले तार फांद बना रहे रास्ता

Sun, 18 Feb 2024 03:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sun, 18 Feb 2024 03:12 AM IST
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Border sealed...high wall, barbed wire crossing making way
पत्थर और तारों को कूदकर दिल्ली सीमा में प्रवेश करते यात्री।
बहादुरगढ़/बादली । किसान आंदोलन के चलते पांच दिन से टीकरी बॉर्डर सील है। इसका खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं। नौकरी पेशा ड्यूटी पर जाने के लिए परेशान हैं तो बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। हालत ये है कि लोग जान जोखिम में डालकर ऊंची दीवार, कंटीले तारों के ऊपर से ये बॉर्डर पार करके निकल रहे हैं। इनमें मासूम बच्चे भी हैं। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो गई है।
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किसान आंदोलन के चलते बहादुरगढ़ सेक्टर-9 मोड़ और टीकरी बॉर्डर पर छह दिन पहले नाकाबंदी कर दी गई थी। दोनों नाकों से केवल दो-दो फीट का रास्ता ही पैदल राहगीरों के लिए छोड़ा गया है। यहां भीड़ अधिक होने की वजह से लोग आासपास बनी ऊंची दीवार को पार करके दिल्ली की तरफ जा रहे हैं। पुलिस द्वारा लगाए गए कंटीले तार और भारी पत्थरों को पार करना पड़ता है जिससे हादसा होने का भी डर बना है।
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टीकरी बॉर्डर पर मेट्रो स्टेशन के नजदीक दिल्ली के दो सरकारी स्कूल हैं। इनमें बहादुरगढ़ के अलग-अलग इलाकों से काफी संख्या में विद्यार्थी पढ़ने के लिए जाते हैं, लेकिन अब बॉर्डर सील होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। टीकरी बॉर्डर पर स्कूल में पढ़ने वाली सातवीं कक्षा की छात्रा पूनम, रिंकी, सुषमा, अमिता, सीमा ने बताया कि वे टीकरी बॉर्डर को पैदल पार करके स्कूल जाती हैं। दीवार चढ़नी पड़ती है। कंटीले तार भी चुभते हैं। बहादुरगढ़ से उन जैसी अनेक छात्राएं यहां पढ़ने के लिए आती हैं। वे ऑटो में बैठकर स्कूल जाती हैं तो लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इससे टाइम भी ज्यादा लगता है। कई बार स्कूल जाने में देरी हो जाती है। इसी तरह की समस्या स्कूल से छुट्टी के बाद घर पहुंचने में झेलनी पड़ती है।
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पुलिस अंकल...कब खुलेगा रास्ता
शनिवार को कई छात्र व छात्राओं ने टीकरी बॉर्डर पर तैनात पुलिस कर्मियों से सवाल कर रही थी कि सीमा सील होने से वह परेशान हैं। ये कब खुलेगी। वाहनों का आवागमन नहीं हो पाने से उनको समस्या हो रही है। उनको पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ रहा है। छुट्टी के बाद घर जाने में उन्हें इसी तरह की समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है।

बुजुर्ग और बच्चे भी परेशान
बादली। ढांसा बार्डर के रास्ते दिल्ली में जाना आमजन के लिए जान जोखिम में डालने के समान है। हालांकि पुलिस की ओर एडवाईजरी में ढांसा बार्डर को पूरी तरह से बंद किया गया है लेकिन आमजन लंबे रास्ता तय करने की बजाए कटीले तार और पत्थरों को कूदकर दिल्ली में प्रवेश कर रहे हैं। दिल्ली जाने के लिए क्षेत्र के लोगों के लिए ढांसा बार्डर सबसे छोटा रास्ता है लेकिन किसान आंदोलन के चलते बार्डर को शत प्रतिशत बंद कर दिया गया है। कई बार बड़े बुजर्ग और बच्चे भी जान जोखिम में डाल रहे हैं। क्षेत्र के सामाजिक लोगों ने पुलिस प्रशासन से पैदल यात्रियों के लिए रास्ता खोलने की गुहार भी लगाई गई है।

-फोटो 58 : टीकरी बॉर्डर से बहादुरगढ़ की तरफ आती छात्राएं।
फोटो 71: पत्थर और तारों को कूदकर दिल्ली सीमा में प्रवेश करते यात्री।
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