उत्पात करने वाले असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई हो, लेकिन झूठे केस बनाकर निर्दोष किसानों का उत्पीड़न न हो। न्याय ये कहता है कि निर्दोष फंसे नहीं और दोषी बचे नहीं। चंद असामाजिक तत्वों की शरारत की सजा देश की 70 फीसदी किसान आबादी को नहीं देनी चाहिए। दिल्ली में जिन असामाजिक तत्वों ने उपद्रव किया उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो, लेकिन बेगुनाह किसानों के खिलाफ किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यह बात राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने झज्जर में एक कार्यक्रम में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कही।
उन्होंने सरकार से मांग की कि तीनों कृषि कानूनों को तुरंत वापस ले और किसानों की मांग के अनुरूप एमएसपी की कानूनी गारंटी का नया कानून बनाए। दीपेंद्र ने कहा कि किसानों की मांगों का मैं समर्थन करता हूं। उन्होंने कहा कि दो महीने से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा किसान आंदोलन सफलता के करीब पहुंचकर बड़ी साजिश का शिकार हो गया। किसानों की शांतिप्रियता इसी से साबित होती है कि दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों और प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर 175 से ज्यादा किसानों की शहादत के बावजूद कहीं कोई हिंसा नहीं हुई। पूरा आंदोलन शांति और अनुशासन के साथ चला। इतना ही नहीं, जब सरकार ने शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे, कड़ाके की सर्दी में पानी से वाटर कैनन की बौछारें मारी, रास्तों को खोद दिया, बड़े-बड़े पत्थरों से अवरोध डाले, किसानों पर लाठीचार्ज किया तब भी किसानों ने अपना संयम नहीं खोया। इस दौरान मुख्य रूप से विधायक डॉ. रघुबीर सिंह कादियान सहित अन्य मौजूद रहे।