फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   jbt teachers future in black shadow

भर्ती रद्द होने पर नहीं जला घरों में चूल्हा

Wed, 08 Jan 2014 10:25 PM IST
भिवानी/सुरेश मेहरा
भिवानी/सुरेश मेहरा Updated Wed, 08 Jan 2014 10:25 PM IST
विज्ञापन
jbt teachers future in black shadow
उन्होंने तो भर्ती की सारी औपचारिकताएं पूरी की हैं, उनकी कोई गलती नहीं
विज्ञापन
है। एक दशक हो गया बच्चों का भविष्य बनाते-बनाते, लेकिन अब तो उनका खुद का ही भविष्य अंधेरे में डूब गया है।


पंजाब एवं हरियाणा कोर्ट द्वारा वर्ष 2000 में हुई 3206 जेबीटी अध्यापकों की भर्ती को रद्द करने के फैसले से आहत जेबीटी अध्यापकों का यह दर्द है। पीड़ित अध्यापकों ने कहा कि अब उनकी उम्र भी 45 पार हो गई है। किसी तरह बच्चों का लालन पालन कर रहे हैं नौकरी गई तो वे अपने परिवार को कैसे पालेंगे। अब तो हरियाणा सरकार ही उनकी पैरवी करे। जब से टीवी पर सरकार के इस फैसले के बारे में पता चला है उनके घर तो चूल्हा भी नहीं जला। कोर्ट ने जेबीटी भर्ती में धांधली की वजह से यह फैसला लिया है।
 
पूरे परिवार का खर्च मुझ विधवा के ऊपर : मुकेश
गांव मंदोली निवासी मुकेश ने बताया कि अब उसके पति भी नहीं रहे। नौकरी गई तो बच्चे की परवरिश कैसे हो पाएगी। अब मेरे सिर पर ही परिवार की जिम्मेदारी है। दूसरी नौकरी पाने की उम्र भी नहीं रही। भगवान जाने अब उनके साथ क्या होगा। सरकार ही उनकी सुध ले। विकलांग अध्यापक कमल सिंह ने कहा कि किसी तरह जेबीटी अध्यापक की नौकरी मिली थी। घर का गुजारा चल रहा था, हाईकोर्ट के फैसले ने तो उनके प्राण ही निकाल दिए हैं। सरकार ही उनकी नौकरी को बचा सकती है।

छह-छह बहनों का भार सिर पर है
जेबीटी अध्यापक सोमबीर सिंह ने कहा कि छह-छह बहनों का भार उन्हीं पर है। उनकी शादी करने के अलावा परिवार का सारा बोझ उनके ही सिर पर है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनके घर तो चूल्हा तक नहीं जला है। सब चिंता में हैं कि अब क्या होगा। कैसे होगा परिवार का गुजारा।

अब तक तो कन्फर्म हो जाने चाहिए थे
जेबीटी अध्यापक रमेश अटेला, राजपाल, लीलाराम, रमेश कुमार, ओमवीर सिंह, संजय कुमार और कृष्ण कुमार आदि जेबीटी अध्यापकों ने बताया कि उनको वर्ष 2000 में जेबीटी अध्यापक के पद पर नौकरी मिली थी। नौकरी लगे 13 साल हो गए। सरकार के नार्म्स के अनुसार भी 10 साल की नौकरी के बाद उनको कन्फर्म किया जाना चाहिए था, लेकिन उनका मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण कन्फर्म भी नहीं हो पाए।

सरकार जेबीटी अध्यापकों का ख्याल करे: मंदोला
हरियाणा अध्यापक संघ के राज्य कोषाध्यक्ष एवं हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान जेबीटी अध्यापक संजीव मंदोला ने कहा कि वर्ष 2000 में जो जेबीटी अध्यापक लगे थे उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी की हैं। उनको नौकरी लगे 13 साल हो गए हैं, जबकि 10 साल की नौकरी के बाद सरकार कन्फर्म कर देती है। उस समय के सभी अध्यापक 45 की उम्र के पार पहुंच गए हैं, अब वे कहां जाएं। प्रदेश सरकार ही उनकी पैरवी करे और उनकी नौकरी बरकरार रखने के लिए ठोस कदम उठाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed