{"_id":"61994941b210f7353b138fe3","slug":"withdrawal-of-law-is-half-the-battle-will-stand-on-the-front-hisar-news-hsr6173942187","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानून वापसी लेना आधी लड़ाई, मोर्चो पर डटे रहेंगे : खाप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानून वापसी लेना आधी लड़ाई, मोर्चो पर डटे रहेंगे : खाप
विज्ञापन
रामनिवास लोहान संवाद
- फोटो : Hisar
नारनौंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानून वापसी लेने पर खाप पदाधिकारियों का कहना है कि कानून वापसी लेना किसानों की आधी लड़ाई है। एमएसपी लागू करवाना और आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों की आर्थिक मदद करना उनकी असली लड़ाई है। जब तक ये चीजें पूरी नहीं हो जाती और कानूनी वापसी को कानूनी अमलीजामा नहीं पहनाया जाता वो अपने मोर्चो पर डटे रहेंगे।
यह किसान आंदोलन देश का सबसे बड़ा आंदोलन है। यह कोई ऐसा आंदोलन नहीं है कि बिना किसी कारण के शुरू हुआ है और ऐसे ही खत्म हो जाएगा। किसानों की जो पुरानी समस्याएं हैं उनको भी अब पटल पर रखा जाएगा। जब देश में इन तीन कानूनों को लागू नहीं किया गया था तब भी किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन किए हैं। किसान काफी समय से कर्ज में डूबे हुए हैं। अब तक कि सरकारों ने किसानों से एमएसपी को लागू करने का दावा कर उनका फायदा उठाया है। लेकिन अब किसान राजनैतिक लोगों की बातों में आने वाले नहीं है। उन्होंने अपने हक लेना सीख लिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करना किसान, मजदूर, कर्मचारी व सामाजिक भाईचारे व लोकतंत्र की जीत है। यह आंदोलन किसान की फसल और नस्ल को बचाने की जंग भी है। इसमें किसान की ऐतिहासिक जीत हुई है, लेकिन यह लड़ाई पूरी उस दिन मानी जाएगी। जब संसद में बिल वापसी को वापस किया जाएगा और एमएसपी पर कानून बनाया जाएगा। किसान मजदूर ने पूरे विश्व को दिखाया है कि एकता में बल है। जोकि बड़े से बड़े तानाशाह को झुकाने का काम कर सकती है। जब तक पूरी प्रक्रिया अपनाकर संसद में इसे वापस नहीं लिया जाता वो संतुष्ट नहीं होंगे। - राजकुमार राखी, प्रधान, राखी बारह खाप
विज्ञापन
प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की जो घोषणा की है उसका हम स्वागत करते हैं। कानून रद्द करने के अलावा उन्होंने एमएसपी लागू करने व करीब 700 जो किसान शहीद हुए हैं उनके परिवारों व किसानों पर दर्ज मुकदमों के बारे में उन्होंने कुछ नहीं बोला हैं। हम इसको अभी अधूरा मानते हैं। जब तक कानूनी रूप से यह रद्द नहीं हो जाते तब तक इनको रद्द नहीं माना जा सकता। देर आए दुरुस्त आए सरकार एक कदम आगे बढ़ी है। हमारी मांग है कि जल्द से जल्द एमएसपी पर कानून बनाया जाए, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस हो और किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिवारों को मुआवजा राशि प्रदान की जाए।
- सुमेर डाटा, प्रधान, रोघी खाप
यह जीत किसानों के आत्मसम्मान की है, उनके संघर्ष की कहानी अगली पीढ़ियों को इतिहास की किताबों में पढ़ाई जाएगी। उन्होंने न सिर्फ अपनी फसल व नस्ल की रक्षा की बल्कि तानाशाही दबाव में एक दम तोड़ती लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान, संवैधानिक अधिकारों और लोकतंत्र को भी प्राण दिए। किसान आंदोलन में शहीद हुए 700 से ज्यादा किसानों को नमन करते हैं। आपकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं गई। सरकार को आखिरकार झुकना ही पड़ा। किसानों की एकता व धैर्य की जीत हुई है लेकिन यह आधी जीत है जब तक एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं मिल जाती, शहीद किसानों को आर्थिक मदद व किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस नहीं हो जाते तब तक आंदोलन जारी रहेगा। - रामनिवास लोहान, प्रधान, सतरोल खाप
कानून वापसी की सिर्फ घोषणा हुई है, जब तक इसको सही रूप में कानूनी अमलीजामा नहीं पहनाया जाता तब तक हम इसको वापसी नहीं मान सकते। अभी तक किसानों की आधी अधूरी जीत है। किसान व मजदूर ने मिलकर सरकार के घमंड को चूर-चूर कर दिया। अब अगली लड़ाई एमएसपी लागू करवाना, किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिवारों की आर्थिक मदद और किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर सभी दर्ज मुकदमे वापस करवाना है। यह आंदोलन देश का सबसे बड़ा आंदोलन के रूप में उभरा है। किसान आंदोलन वैसे तो किसान काफी समय से लड़ते आ रहे हैं लेकिन अब किसान अपनी सभी समस्याओं को सरकार के समक्ष रखेंगे। - रघबीर कापड़ो, पूर्व प्रधान, पंचग्रामी खाप
विज्ञापन
यह किसान आंदोलन देश का सबसे बड़ा आंदोलन है। यह कोई ऐसा आंदोलन नहीं है कि बिना किसी कारण के शुरू हुआ है और ऐसे ही खत्म हो जाएगा। किसानों की जो पुरानी समस्याएं हैं उनको भी अब पटल पर रखा जाएगा। जब देश में इन तीन कानूनों को लागू नहीं किया गया था तब भी किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन किए हैं। किसान काफी समय से कर्ज में डूबे हुए हैं। अब तक कि सरकारों ने किसानों से एमएसपी को लागू करने का दावा कर उनका फायदा उठाया है। लेकिन अब किसान राजनैतिक लोगों की बातों में आने वाले नहीं है। उन्होंने अपने हक लेना सीख लिया है।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करना किसान, मजदूर, कर्मचारी व सामाजिक भाईचारे व लोकतंत्र की जीत है। यह आंदोलन किसान की फसल और नस्ल को बचाने की जंग भी है। इसमें किसान की ऐतिहासिक जीत हुई है, लेकिन यह लड़ाई पूरी उस दिन मानी जाएगी। जब संसद में बिल वापसी को वापस किया जाएगा और एमएसपी पर कानून बनाया जाएगा। किसान मजदूर ने पूरे विश्व को दिखाया है कि एकता में बल है। जोकि बड़े से बड़े तानाशाह को झुकाने का काम कर सकती है। जब तक पूरी प्रक्रिया अपनाकर संसद में इसे वापस नहीं लिया जाता वो संतुष्ट नहीं होंगे। - राजकुमार राखी, प्रधान, राखी बारह खाप
विज्ञापन
प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की जो घोषणा की है उसका हम स्वागत करते हैं। कानून रद्द करने के अलावा उन्होंने एमएसपी लागू करने व करीब 700 जो किसान शहीद हुए हैं उनके परिवारों व किसानों पर दर्ज मुकदमों के बारे में उन्होंने कुछ नहीं बोला हैं। हम इसको अभी अधूरा मानते हैं। जब तक कानूनी रूप से यह रद्द नहीं हो जाते तब तक इनको रद्द नहीं माना जा सकता। देर आए दुरुस्त आए सरकार एक कदम आगे बढ़ी है। हमारी मांग है कि जल्द से जल्द एमएसपी पर कानून बनाया जाए, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस हो और किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिवारों को मुआवजा राशि प्रदान की जाए।
- सुमेर डाटा, प्रधान, रोघी खाप
यह जीत किसानों के आत्मसम्मान की है, उनके संघर्ष की कहानी अगली पीढ़ियों को इतिहास की किताबों में पढ़ाई जाएगी। उन्होंने न सिर्फ अपनी फसल व नस्ल की रक्षा की बल्कि तानाशाही दबाव में एक दम तोड़ती लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान, संवैधानिक अधिकारों और लोकतंत्र को भी प्राण दिए। किसान आंदोलन में शहीद हुए 700 से ज्यादा किसानों को नमन करते हैं। आपकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं गई। सरकार को आखिरकार झुकना ही पड़ा। किसानों की एकता व धैर्य की जीत हुई है लेकिन यह आधी जीत है जब तक एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं मिल जाती, शहीद किसानों को आर्थिक मदद व किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस नहीं हो जाते तब तक आंदोलन जारी रहेगा। - रामनिवास लोहान, प्रधान, सतरोल खाप
कानून वापसी की सिर्फ घोषणा हुई है, जब तक इसको सही रूप में कानूनी अमलीजामा नहीं पहनाया जाता तब तक हम इसको वापसी नहीं मान सकते। अभी तक किसानों की आधी अधूरी जीत है। किसान व मजदूर ने मिलकर सरकार के घमंड को चूर-चूर कर दिया। अब अगली लड़ाई एमएसपी लागू करवाना, किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिवारों की आर्थिक मदद और किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर सभी दर्ज मुकदमे वापस करवाना है। यह आंदोलन देश का सबसे बड़ा आंदोलन के रूप में उभरा है। किसान आंदोलन वैसे तो किसान काफी समय से लड़ते आ रहे हैं लेकिन अब किसान अपनी सभी समस्याओं को सरकार के समक्ष रखेंगे। - रघबीर कापड़ो, पूर्व प्रधान, पंचग्रामी खाप

सुमेर। संवाद- फोटो : Hisar

राजकुमार। संवाद- फोटो : Hisar

रघबीर। संवाद- फोटो : Hisar