वन विभाग के अधिकारियों ने किया मुआयना, सामाजिक संस्थाओं ने दी चेतावनी
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जीजेयू के वाटर वर्क्स में कीकर के जंगल की चल रही कटाई के बाद सामाजिक संस्थाओं और वन विभाग ने संज्ञान लिया है। शुक्रवार सुबह ही वन विभाग की टीम को फौरी तौर पर मौके पर भेजा गया, जिसने मामले की छानबीन की। वहीं अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा के सदस्यों को विश्वविद्यालय में नहीं जाने दिया गया, जिसके बाद सदस्यों ने अपने उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत करवाया है। वहीं जीजेयू के वाटर वर्क्स के दोनों गेटों पर ताला लगाए रखा गया। साथ ही चौकीदार बैठा दिया गया। जीजेयू प्रशासन का कहना है कि बड़े पेड़ों को किसी भी कीमत पर नहीं काटा जाएगा। उन्हें फरवरी में ट्रांसप्लांट किया जाएगा। फिलहाल केवल झाड़ियां हटाई जाएगी। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद सामाजिक संस्थाएं एवं वन्य विभाग के साथ साथ जीजेयू प्रशासन भी सतर्क हो गया है।
झाड़ियां भी काटनी है तो फरवरी के बाद ही काटी जाएं
वन्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जीजेयू ऑटोनोमस बॉडी है। वे मामले को देख सकते हैं। लेकिन किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करना वन्य विभाग अधिकार क्षेत्र में नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक यदि विकास के नाम पर अगर नाममात्र झाड़ियां भी साफ की जा रही हैं, तो भी यह काम फरवरी के बाद किया जाना चाहिए। अब सर्दियों में वहां रहने वाले वन्य पक्षियों को समस्या होगी। मौसम ठीक होने के बाद वन्य पक्षियों को अपना नया ठिकाना ढूंढने में आसानी होगी।
यह था मामला
शुक्रवार को जीजेयू के वॉटर वर्क्स में बड़े क्षेत्र में खड़े कीकर के जंगल को गुपचुप तरीके से काटना शुरू कर दिया गया। यहां बड़ी संख्या में झाड़ियों भी उगी हुई हैं। इस जंगल में मोर व अन्य वन्य पक्षियों का बसेरा है।
हमने अनौपचारिक तौर पर अपने अधिकारियों को मौका देखने के लिए भेजा था। यह मामला विश्वविद्यालय प्रशासन का है।
- राजेश वत्स, डीएफओ, हिसार
हमने कोई पेड़ नहीं काटा और न ही काटेंगे। केवल एक एकड़ से भी कम जगह की झाड़ियां साफ की जाएगी। रास्ते में आने वाले पेड़ों को फरवरी में दूसरी जगह पर ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
- रघुबीर सिंह, एक्सईएन, पब्लिक हेल्थ
हम मौके का मुआयना करने के लिए विश्वविद्यालय में गए थे। लेकिन हमें अंदर नहीं जाने दिया गया। इससे लगता है कि विश्वविद्यालय में गड़बड़ की जा रही है।
- कुलदीप बिश्नोई, सदस्य, अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा