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Hisar News: सिस्टम लाचार, लाभार्थियों पर कागज, कतार और क्लिक की मार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Feb 2026 12:45 AM IST
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The system is helpless, with beneficiaries burdened with paperwork, queues and clicks.
समाज कल्याण विभाग में पेंशन बनवाने के लिए आए बुजुर्ग।
हिसार। सिस्टम की खामियों और ऑनलाइन प्रक्रिया की जटिलता के कारण जिले में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोग कागज, कतार और क्लिक की मार झेलने को मजबूर हैं। पेंशन व अन्य योजनाओं के लिए बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग सुबह से जिला समाज कल्याण विभाग कार्यालय की कतारों में लग रहे हैं। पिछले करीब तीन माह से बुढ़ापा पेंशन न मिलने से परेशान लोग कागजात जमा कराने के बाद भी भटक रहे हैं। सोमवार को पड़ताल के दौरान लाडो लक्ष्मी योजना की लाभार्थी महिलाएं भी जिला समाज कल्याण विभाग कार्यालय में परेशान नजर आईं।
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महिलाओं के खातों में मिलने वाली 2100 रुपये मासिक राशि नहीं पहुंची। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने सत्यापन का विकल्प केवल मोबाइल एप पर दिया है, जिसे ग्रामीण महिलाओं को चलाना नहीं आता, इसलिए भुगतान अटका है। जिले में बुढ़ापा, विधवा, दिव्यांग, अविवाहित, महिला-पुरुष सहित विभिन्न श्रेणियों के 2,71,408 पेंशनधारक हैं, जिनकी पेंशन कागज व आय सत्यापन में उलझ रही है। रोजाना 100-200 लोग कागजात लेकर कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन नेट या एप की दिक्कत से काम अटक जाता है और ग्रामीणों को निराश लौटना पड़ता है। संवाद
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लाडो लक्ष्मी योजना का डाटा नहीं अपडेट
25 अक्टूबर 2025 से शुरू लाडो लक्ष्मी योजना के सबसे अधिक आवेदन आ रहे हैं, लेकिन विभाग के पास उच्च स्तर से डाटा अपडेट नहीं हुआ। आवेदक पहले सीएससी सेंटर और फिर समाज कल्याण कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
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एप नहीं आता चलाना
लाडो लक्ष्मी योजना के लिए नाम आया हुआ है। पिछले तीन माह से इस योजना का लाभ नहीं ले पाई हूं। मैं और मेरा पति अपनी दिहाड़ी छोड़ कर जिला समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगा रहे है। सोमवार को भी दोनों गांव से किराया लगाकर यहां पहुंचे है। यहां आने पर अधिकारियों ने उनकी मदद कर मोबाइल पर लाडो लक्ष्मी योजना एप चलाना सिखाने की कोशिश की, ताकि गांव से यहां न आना पड़े और खुद ही कागज अपलोड कर सकें लेकिन काफी कोशिश के बाद भी यह एप नहीं चला। इससे निराशा ही हाथ लगी।
- सुनीता, गांव भुगाना।
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बुढ़ापा पेंशन के लिए काट रही चक्कर
65 साल की उम्र में अकेली ही पेंशन बनवाने के लिए चक्कर काट रहूं। पिछले एक सप्ताह से अपने कागजात लेकर यहां आ रही हूं। हर बार कागजातों में कोई न कोई कमी बता दे दी जाती है। इस कारण निराश होकर जाना पड़ता है। किराया लगाकर भूखे ही घूमना पड़ता है।
- गुड्डी देवी, बाड़ा रागड़ान।

बैसाखी के सहारे दफ्तरों के चक्कर
कहने को तो सरकार ने दिव्यांगों के लिए पेंशन की योजना चलाई है लेकिन इसके लिए बहुत धक्के खाने पड़ रहे हैं। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। बूढ़ी पत्नी के साथ बैसाखी के सहारे सरकारी ऑफिसों के चक्कर काट रहा हूं। हर बार गांव से आने में 200-300 रुपये खर्च हो जाते हैं। पता नहीं पेंशन कब बनेगी। आज भी कागज पूरे नहीं हो पाए।
- रामधारी, गांव ढंढूर।

60 पार, फिर भी नहीं बनी पेंशन
60 साल से ऊपर की हो गई हूं। पेंशन नहीं बनी। बेटे के साथ यहां आई हूं। दो लोगों का किराया लगा है। कागजों में कमी पाई है। अब गांव जाकर फिर से कागज तैयार करवाने हैं। इसके बाद सत्यापन होगा। गांव के सरपंच से लेेकर मेंबर तक से गुहार लगा चुकी हूं लेकिन पेंशन नहीं बन रही। इस कारण अब यहां चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

- पानपति, गांव ढंढूर।
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जिले में पेंशनधारकों की स्थिति
बुढ़ापा : 1,58,021
दिव्यांग : 15,116
विधवा : 72,455
निराश्रित बच्चे : 19,474
लाडली योजना : 4,233
स्कूल न जाने वाले दिव्यांग बच्चे : 1,031
मंगलामुखी : 09
बौना : 04
एसिड अटैक पीड़ित : 03
विधुर : 201
कैंसर पीड़ित : 855
लाइलाज बीमारी : 06

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बुजुर्गों की पेंशन जारी होने से भीड़ कुछ कम हुई है। अब लाडो लक्ष्मी योजना के आवेदन ज्यादा हैं। एप और नेटवर्क समस्या से सत्यापन नहीं हो पाता। आवेदक मोबाइल में एप डाउनलोड कर दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं।
- धर्मबीर सिंह पानू, सहायक जिला अधिकारी, समाज कल्याण विभाग हिसार
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