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Hisar News: रक्षा का सूत्र बांधने निकलीं बहनें दिखीं बेबस
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हांसी के बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करतीं महिलाएं व अन्य यात्री।
हिसार। रक्षाबंधन पर्व पर रोडवेज बसों में मुफ्त सफर बहनों के लिए मुश्किलों भरा रहा। बसों के लिए बहनें बेबस नजर आईं। लोकल रूटों पर बसों की आवाजाही कम रही है, जिस कारण महिलाओं को डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। ऐसे में जब बस आई तो उनमें पांव रखने तक की जगह नहीं मिली। सीट के लिए भी मारामारी रही। बस स्टैंड पर सुबह से देर शाम तक भीड़ रही।
बुधवार सुबह से लेकर शाम तक बसों के लिए मारामारी का माहौल रहा। हालांकि रोडवेज की तरफ से बसों की व्यवस्था की हुई थी। निजी बसें भी समय पर काउंटर पर लग रही थी लेकिन लोकल रूट पर चलने वाली बसें काफी देर से आ रही थी। ऐसे में यात्रियों को काफी समय तक बसों का इंतजार करना पड़ रहा था। मंगलवार दोपहर 12 बजे से लेकर बुधवार रात 12 बजे तक रोडवेज और सहकारी समितियों की बस में महिलाओं और 15 साल तक के बच्चों के लिए निशुल्क सेवा है।
बस स्टैंड पर बैठी जाखोद खेड़ा गांव की रहने वाली महिला ने तारा देवी और गुलाबों ने बताया कि वह सुबह भाई को राखी बांधने के लिए शहर आई थी। भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद गांव जाने के लिए 11 बजे बस स्टैंड पर पहुंच गई थी। अब एक बज गया लेकिन अभी तक गांव को जाने वाली बस नहीं आई। सरकार ने बस में महिलाओं के लिए सेवा निशुल्क तो कर दी, लेकिन बसों की व्यवस्था नहीं की।
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किरमारा गांव जाने वाली भतेरी ने बताया कि रक्षाबंधन पर सरकार द्वारा महिलाओं के लिए बसों में निशुल्क सेवा सराहनीय काम है। लेकिन, बसों की कमी के कारण बस में चढ़ते समय धक्का-मुक्की होती है। इस बार सीट भी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि आधे घंटे से अधिक का समय गुजर गया, लेकिन गांव को जाने वाली बस अभी तक नहीं आई।
महलसरा गांव की रहने वाली विशपति ने बताया कि वह अपने गांव जाने के लिए आई थी। सुबह 12 बजे बस स्टैंड पर पहुंच गए थे। एक घंटे से अधिक समय बीत चुका है लेकिन, अभी तक आदमपुर की ओर जाने वाली बस नहीं आई। गर्मी और उमस में बुला हाल है। काफी देर में बस आने पर बस में सीट नहीं मिलती है। आते ही बस यात्रियों से भर जाती। पहले वाली बस इसी कारण से छूट गई थी। इसके बाद अभी तक बस नहीं आई।
जेल में भाइयों को देख झलके बहनों के आंसू
रक्षाबंधन पर्व पर केंद्रीय कारागार एक और दो में बुधवार सुबह से शाम तक बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधीं। भाइयों को सलाखों के पीछे देखकर बहनों की आंखों से आंसू झलक पड़े। इस दौरान बहनों ने भाइयों से अपराध छोड़ने व बुरी संगत से दूर रहने का आग्रह किया। वहीं जेल प्रशासन की तरफ से राखी व मिठाइयों की व्यवस्था की गई थी। जेल परिसर के अंदर दाखिल होने के बाद चेकिंग रूम में उनकी तलाशी हुई और उसके बाद जेल में बनी डयोढी में महिलाओं और उनके साथ आए बच्चों को जाने दिया।
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बुधवार सुबह से लेकर शाम तक बसों के लिए मारामारी का माहौल रहा। हालांकि रोडवेज की तरफ से बसों की व्यवस्था की हुई थी। निजी बसें भी समय पर काउंटर पर लग रही थी लेकिन लोकल रूट पर चलने वाली बसें काफी देर से आ रही थी। ऐसे में यात्रियों को काफी समय तक बसों का इंतजार करना पड़ रहा था। मंगलवार दोपहर 12 बजे से लेकर बुधवार रात 12 बजे तक रोडवेज और सहकारी समितियों की बस में महिलाओं और 15 साल तक के बच्चों के लिए निशुल्क सेवा है।
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बस स्टैंड पर बैठी जाखोद खेड़ा गांव की रहने वाली महिला ने तारा देवी और गुलाबों ने बताया कि वह सुबह भाई को राखी बांधने के लिए शहर आई थी। भाई की कलाई पर राखी बांधने के बाद गांव जाने के लिए 11 बजे बस स्टैंड पर पहुंच गई थी। अब एक बज गया लेकिन अभी तक गांव को जाने वाली बस नहीं आई। सरकार ने बस में महिलाओं के लिए सेवा निशुल्क तो कर दी, लेकिन बसों की व्यवस्था नहीं की।
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किरमारा गांव जाने वाली भतेरी ने बताया कि रक्षाबंधन पर सरकार द्वारा महिलाओं के लिए बसों में निशुल्क सेवा सराहनीय काम है। लेकिन, बसों की कमी के कारण बस में चढ़ते समय धक्का-मुक्की होती है। इस बार सीट भी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि आधे घंटे से अधिक का समय गुजर गया, लेकिन गांव को जाने वाली बस अभी तक नहीं आई।
महलसरा गांव की रहने वाली विशपति ने बताया कि वह अपने गांव जाने के लिए आई थी। सुबह 12 बजे बस स्टैंड पर पहुंच गए थे। एक घंटे से अधिक समय बीत चुका है लेकिन, अभी तक आदमपुर की ओर जाने वाली बस नहीं आई। गर्मी और उमस में बुला हाल है। काफी देर में बस आने पर बस में सीट नहीं मिलती है। आते ही बस यात्रियों से भर जाती। पहले वाली बस इसी कारण से छूट गई थी। इसके बाद अभी तक बस नहीं आई।
जेल में भाइयों को देख झलके बहनों के आंसू
रक्षाबंधन पर्व पर केंद्रीय कारागार एक और दो में बुधवार सुबह से शाम तक बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधीं। भाइयों को सलाखों के पीछे देखकर बहनों की आंखों से आंसू झलक पड़े। इस दौरान बहनों ने भाइयों से अपराध छोड़ने व बुरी संगत से दूर रहने का आग्रह किया। वहीं जेल प्रशासन की तरफ से राखी व मिठाइयों की व्यवस्था की गई थी। जेल परिसर के अंदर दाखिल होने के बाद चेकिंग रूम में उनकी तलाशी हुई और उसके बाद जेल में बनी डयोढी में महिलाओं और उनके साथ आए बच्चों को जाने दिया।