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Hisar News: दस साल में पूरा हुआ 12 लोगों की टीम का सपना 9 मंजिला भारत मित्र स्तंभ
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9 मंजिला भारत मित्र स्तंभ
हिसार। कैप्टन अभिमन्यु तथा कैप्टन रूद्रसेन का भारत मित्र स्तंभ का सपना पूरा हो गया है। इस सपने को साकार करने के पीछे 12 लोगों की टीम की दस साल की मेहनत है। गांव खांडाखेड़ी में बनाए गया भारत मित्र स्तंभ को राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन स्थल के तौर पर पहचान दिलाई जाएगी। राखी गढ़ी में सिंधु घाटी की सभ्यता को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए यह स्थान भी महत्वपूर्ण होगा। इस स्तंभ में न केवल भारतीय संस्कृति, इतिहास, धर्म व सामाजिक परिवेश का समावेश है। ब्रह्मांड की उत्पति से लेकर वर्तमान तक के कालखंडों को भी संजोया गया है। हर एक मंजिल पर वहां लगे चित्रों की कहानी बताने के लिए बैक ग्राउंड म्यूजिक रहेगा। जिसमें 5 से लेकर 12 मिनट में पूरी जानकारी दी जाएगी।
गांव खांडा खेड़ी में अढाई एकड़ के परिसर में यह स्तंभ बनाया गया है। इसके प्रांगण में वैदिक शोध व अनुसंधान केंद्र चलाया जाएगा। इस परियोजना का हिस्सा रहे सतपाल श्योराण ने बताया कि वर्ष 2013 में स्वामी रामदेव ने इसकी आधारशिला रखी थी। इस स्तंभ की हर एक मंजिल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर अध्ययन किया गया है। जिसमें चितौड़गढ़ के महाराण प्रताप के किले, उदयपुर में महाराणा प्रताप का स्मारक, दिल्ली के बिरला मंदिर, हरिद्वार के भारत माता मंदिर का भ्रमण किया। वहां के हर एक चित्र से लेकर प्रतिमा तक मुआयना किया और वहां की विशेषताओं को दर्ज किया गया। वहां की वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी तैयार कर उसका इतिहास जुटाया गया। इसे एक पुस्तक के स्वरुप में तैयार किया। 12 लोगों की टीम इस पर पूरा मंथन करती थी। जिसमें कुछ नए सुझाव शामिल किए जाते थे। एक मंजिल तैयार होने के बाद दूसरी मंजिल के लिए काम शुरू किया गया।
आर्किटेक्ट वीरेंद्र ढांडा ने इस स्तंभ को मूर्त रूप दिया। कैप्टन अभिमन्यु व कैप्टन रूद्रसेन ने हर एक बारीकी से अंतिम रूप दिया। आर्य समाज के विशेषज्ञ सहदेव समर्पित ने आर्य समाज तथा साहित्य से जुड़े हर एक हिस्से को फाइनल किया। प्रवीण परुथी ने डिजाइन तैयार किए। प्रदीप ने मूर्ति व चित्र बनाए। जिसमें धातु, फाइबर, चाक मिट्टी, प्लास्टर से प्रतिमाएं तैयार की। सतपाल श्योराण ने अलग-अलग स्थानों का भ्रमण कर पूरा साहित्य जुटाया। इंडस संस्था के निदेशक सुभाष श्योराण ने हर एक कार्य की निगरानी करते हुए निर्देशन किया।
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कहां क्या दिखेगा...
इस स्तंभ को देखने के लिए लिफ्ट से 8वें मंजिल पर पहुंचेंगे। यहां से दूरबीन से आसपास के मनोहर दृश्य देखे जा सकेंगे।
सातवीं मंजिल पर ब्रह्मांड की उत्पत्ति और रचना को सुंदर कलाकृतियों के माध्यम से समझाया जाएगा हैं।
छठवीं मंजिल पर रामायण, महाभारत और भगवत गीता के संदेशों का अध्यायवार सार दिया गया है। राम परिवार की सुंदर प्रतिमा मन मोह लेती है।
पांचवें तल पर मध्यकालीन भारत के समूचे इतिहास से रूबरू होने का मौका मिलेगा। वेदांत दर्शन, गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी की मनमोहक प्रतिमाएं हैं।
चौथे तल हरियाणा को समर्पित है जिसमें हरियाणा की प्राचीन कला और संस्कृति के अतिरिक्त भारत की प्रगति में हरियाणा के योगदान को भी दर्शाया गया है।
तीसरे तल आधुनिक भारत के गौरवशाली इतिहास को समर्पित है। शहीदों की कुर्बानियों को जीवंत करने वाली प्रतिमाओं और कलाकृतियों को देख सकेंगे
दूसरे तल आर्य समाज के योगदान, संस्कृति के अतिरिक्त भारत की प्रगति में हरियाणा के योगदान को भी दर्शाया गया है।
प्रथम तल पर पुस्तकालय बनाया गया है। इस तल पर चौधरी मित्र सेन की प्रेरणादायक जीवन यात्रा की झांकी भी बनाई गई हैं।
ग्राउंड पर यज्ञशाला बनाई गई है। जिसमें वैदिक यज्ञ किया जाएगा।
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गांव खांडा खेड़ी में अढाई एकड़ के परिसर में यह स्तंभ बनाया गया है। इसके प्रांगण में वैदिक शोध व अनुसंधान केंद्र चलाया जाएगा। इस परियोजना का हिस्सा रहे सतपाल श्योराण ने बताया कि वर्ष 2013 में स्वामी रामदेव ने इसकी आधारशिला रखी थी। इस स्तंभ की हर एक मंजिल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर अध्ययन किया गया है। जिसमें चितौड़गढ़ के महाराण प्रताप के किले, उदयपुर में महाराणा प्रताप का स्मारक, दिल्ली के बिरला मंदिर, हरिद्वार के भारत माता मंदिर का भ्रमण किया। वहां के हर एक चित्र से लेकर प्रतिमा तक मुआयना किया और वहां की विशेषताओं को दर्ज किया गया। वहां की वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी तैयार कर उसका इतिहास जुटाया गया। इसे एक पुस्तक के स्वरुप में तैयार किया। 12 लोगों की टीम इस पर पूरा मंथन करती थी। जिसमें कुछ नए सुझाव शामिल किए जाते थे। एक मंजिल तैयार होने के बाद दूसरी मंजिल के लिए काम शुरू किया गया।
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आर्किटेक्ट वीरेंद्र ढांडा ने इस स्तंभ को मूर्त रूप दिया। कैप्टन अभिमन्यु व कैप्टन रूद्रसेन ने हर एक बारीकी से अंतिम रूप दिया। आर्य समाज के विशेषज्ञ सहदेव समर्पित ने आर्य समाज तथा साहित्य से जुड़े हर एक हिस्से को फाइनल किया। प्रवीण परुथी ने डिजाइन तैयार किए। प्रदीप ने मूर्ति व चित्र बनाए। जिसमें धातु, फाइबर, चाक मिट्टी, प्लास्टर से प्रतिमाएं तैयार की। सतपाल श्योराण ने अलग-अलग स्थानों का भ्रमण कर पूरा साहित्य जुटाया। इंडस संस्था के निदेशक सुभाष श्योराण ने हर एक कार्य की निगरानी करते हुए निर्देशन किया।
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कहां क्या दिखेगा...
इस स्तंभ को देखने के लिए लिफ्ट से 8वें मंजिल पर पहुंचेंगे। यहां से दूरबीन से आसपास के मनोहर दृश्य देखे जा सकेंगे।
सातवीं मंजिल पर ब्रह्मांड की उत्पत्ति और रचना को सुंदर कलाकृतियों के माध्यम से समझाया जाएगा हैं।
छठवीं मंजिल पर रामायण, महाभारत और भगवत गीता के संदेशों का अध्यायवार सार दिया गया है। राम परिवार की सुंदर प्रतिमा मन मोह लेती है।
पांचवें तल पर मध्यकालीन भारत के समूचे इतिहास से रूबरू होने का मौका मिलेगा। वेदांत दर्शन, गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी की मनमोहक प्रतिमाएं हैं।
चौथे तल हरियाणा को समर्पित है जिसमें हरियाणा की प्राचीन कला और संस्कृति के अतिरिक्त भारत की प्रगति में हरियाणा के योगदान को भी दर्शाया गया है।
तीसरे तल आधुनिक भारत के गौरवशाली इतिहास को समर्पित है। शहीदों की कुर्बानियों को जीवंत करने वाली प्रतिमाओं और कलाकृतियों को देख सकेंगे
दूसरे तल आर्य समाज के योगदान, संस्कृति के अतिरिक्त भारत की प्रगति में हरियाणा के योगदान को भी दर्शाया गया है।
प्रथम तल पर पुस्तकालय बनाया गया है। इस तल पर चौधरी मित्र सेन की प्रेरणादायक जीवन यात्रा की झांकी भी बनाई गई हैं।
ग्राउंड पर यज्ञशाला बनाई गई है। जिसमें वैदिक यज्ञ किया जाएगा।