रोहनात गांव की वीरता की गाथा: आज भी गूंजती है स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां, ग्रामीणों की जमीन हुई नीलाम
रोहनात गांव में स्थित एक कुआं आज भी अंग्रेजों की क्रूरता की कहानी बयां करता है। जब अंग्रेज अधिकारियों ने गांव पर आक्रमण किया, तो गांव के निवासियों ने अपनी इज्जत बचाने के लिए इस कुएं में छलांग लगा दी। इस कुएं में हजारों ग्रामीणों ने अपने प्राण त्याग दिए।
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हरियाणा के रोहनात गांव की गाथा आज भी इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। यह गांव, जो बवानी खेड़ा से मात्र 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था। जब 11 मई 1857 को दिल्ली में पहले स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी भड़की, तो रोहनात ने भी अपने वीर जवानों को इस युद्ध के मैदान में उतार दिया।
29 मई 1857 को बहादुर शाह के आदेश पर, रोहनात और आसपास के गांवों के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों पर हमला कर दिया। इस संघर्ष में तोशाम, हांसी और हिसार पर धावा बोला गया। इन वीरों ने अंग्रेजों के खजाने लूट लिए और जेलों को तोड़कर कैदियों को आज़ाद किया। इस दौरान हिसार में 12 और हांसी में 11 अंग्रेज अधिकारी मारे गए।
अंग्रेजों ने इस पर क्रूर बदला लिया। हांसी में पलटन भेजकर उन्होंने रोहनात सहित आसपास के गांवों को बर्बरतापूर्वक तबाह कर दिया। पुट्ठी मंगल खाँ गांव पर तोप से हमला किया गया और रोहनात को भून दिया गया। जमालपुर, हाजमपुर, भाटोल, खरड़, अलीपुर, और मंगाली जैसे गांवों में आग लगा दी गई। अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को पकड़कर हांसी लाकर रोड रोलर के नीचे कुचलकर उनकी जान ले ली। इस अत्याचार के कारण उस सड़क का नाम "लाल सड़क" पड़ गया, जो आज भी हांसी के बीचों-बीच से गुजरती है।
रोहनात के वीर नोंदाराम और वीरड़ादास स्वामी को भी इसी क्रूरता का शिकार बनाया गया। वीरड़ादास स्वामी को तोप से उड़ाया गया और नोंदाराम को हांसी में रोड रोलर के नीचे कुचल दिया गया।
14 सितंबर 1857 को, अंग्रेज अधिकारी मिस्टर विलियम ख्वाजा ने हांसी के तहसीलदार को आदेश दिया कि रोहनात गांव की पूरी जमीन नीलाम कर दी जाए। इसके तहत, 20 जुलाई 1858 को गांव की 20656 बीघा जमीन में से 13 बीघा 10 बिसवे को छोड़कर बाकी जमीन नीलाम कर दी गई। 8100 रुपये में 61 व्यक्तियों ने यह जमीन खरीदी, और आज भी इस जमीन का पट्टा उनके नाम पर ही है।
रोहनात गांव में स्थित एक कुआं आज भी अंग्रेजों की क्रूरता की कहानी बयां करता है। जब अंग्रेज अधिकारियों ने गांव पर आक्रमण किया, तो गांव के निवासियों ने अपनी इज्जत बचाने के लिए इस कुएं में छलांग लगा दी। इस कुएं में हजारों ग्रामीणों ने अपने प्राण त्याग दिए। रोहनात की वीरता और बलिदान की ये गाथाएं आज भी हमें याद दिलाती हैं कि हमारी स्वतंत्रता कितने संघर्षों और बलिदानों से प्राप्त हुई है।