फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   saga of bravery of Rohanat village, Stories of freedom struggle still resonate

रोहनात गांव की वीरता की गाथा: आज भी गूंजती है स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां, ग्रामीणों की जमीन हुई नीलाम

Fri, 09 Aug 2024 01:05 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, बवानी खेड़ा (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, बवानी खेड़ा (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Fri, 09 Aug 2024 01:05 PM IST
सार

रोहनात गांव में स्थित एक कुआं आज भी अंग्रेजों की क्रूरता की कहानी बयां करता है। जब अंग्रेज अधिकारियों ने गांव पर आक्रमण किया, तो गांव के निवासियों ने अपनी इज्जत बचाने के लिए इस कुएं में छलांग लगा दी। इस कुएं में हजारों ग्रामीणों ने अपने प्राण त्याग दिए।

विज्ञापन
saga of bravery of Rohanat village, Stories of freedom struggle still resonate
रोहनात गांव - फोटो : संवाद

विस्तार

हरियाणा के रोहनात गांव की गाथा आज भी इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। यह गांव, जो बवानी खेड़ा से मात्र 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था। जब 11 मई 1857 को दिल्ली में पहले स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी भड़की, तो रोहनात ने भी अपने वीर जवानों को इस युद्ध के मैदान में उतार दिया।

विज्ञापन

29 मई 1857 को बहादुर शाह के आदेश पर, रोहनात और आसपास के गांवों के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों पर हमला कर दिया। इस संघर्ष में तोशाम, हांसी और हिसार पर धावा बोला गया। इन वीरों ने अंग्रेजों के खजाने लूट लिए और जेलों को तोड़कर कैदियों को आज़ाद किया। इस दौरान हिसार में 12 और हांसी में 11 अंग्रेज अधिकारी मारे गए।

विज्ञापन

अंग्रेजों ने इस पर क्रूर बदला लिया। हांसी में पलटन भेजकर उन्होंने रोहनात सहित आसपास के गांवों को बर्बरतापूर्वक तबाह कर दिया। पुट्ठी मंगल खाँ गांव पर तोप से हमला किया गया और रोहनात को भून दिया गया। जमालपुर, हाजमपुर, भाटोल, खरड़, अलीपुर, और मंगाली जैसे गांवों में आग लगा दी गई। अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को पकड़कर हांसी लाकर रोड रोलर के नीचे कुचलकर उनकी जान ले ली। इस अत्याचार के कारण उस सड़क का नाम "लाल सड़क" पड़ गया, जो आज भी हांसी के बीचों-बीच से गुजरती है।

विज्ञापन
विज्ञापन


रोहनात के वीर नोंदाराम और वीरड़ादास स्वामी को भी इसी क्रूरता का शिकार बनाया गया। वीरड़ादास स्वामी को तोप से उड़ाया गया और नोंदाराम को हांसी में रोड रोलर के नीचे कुचल दिया गया।

14 सितंबर 1857 को, अंग्रेज अधिकारी मिस्टर विलियम ख्वाजा ने हांसी के तहसीलदार को आदेश दिया कि रोहनात गांव की पूरी जमीन नीलाम कर दी जाए। इसके तहत, 20 जुलाई 1858 को गांव की 20656 बीघा जमीन में से 13 बीघा 10 बिसवे को छोड़कर बाकी जमीन नीलाम कर दी गई। 8100 रुपये में 61 व्यक्तियों ने यह जमीन खरीदी, और आज भी इस जमीन का पट्टा उनके नाम पर ही है।

रोहनात गांव में स्थित एक कुआं आज भी अंग्रेजों की क्रूरता की कहानी बयां करता है। जब अंग्रेज अधिकारियों ने गांव पर आक्रमण किया, तो गांव के निवासियों ने अपनी इज्जत बचाने के लिए इस कुएं में छलांग लगा दी। इस कुएं में हजारों ग्रामीणों ने अपने प्राण त्याग दिए। रोहनात की वीरता और बलिदान की ये गाथाएं आज भी हमें याद दिलाती हैं कि हमारी स्वतंत्रता कितने संघर्षों और बलिदानों से प्राप्त हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed