{"_id":"6133d1ae8ebc3eb3b44d7b1f","slug":"not-afraid-of-maths-mamta-s-students-play-with-questions-hisar-news-hsr610805819","type":"story","status":"publish","title_hn":"गणित से डरते नहीं, सवालों के साथ खेलते हैं ममता के छात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गणित से डरते नहीं, सवालों के साथ खेलते हैं ममता के छात्र
विज्ञापन
अपने परिवार के साथ प्रवक्ता ममता पालीवाल।
- फोटो : Bhiwani
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नवनीत शर्मा
भिवानी। गणित विषय से ज्यादातर विद्यार्थी डरते हैं, लेकिन भिवानी के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राएं गणित के सवालों के साथ खेलती हैं। दरअसल उनकी शिक्षक ममता पालीवाल का गणित को पढ़ाने का तरीका ही कुछ अलग है। इसी की बदौलत ममता पालीवाल को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। रविवार को उन्हें चंडीगढ़ स्थित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र में यह पुरस्कार उन्हें राष्ट्रपति द्वारा वर्चुअल कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा।
बचपन की पढ़ाई से लेकर इस पुरस्कार को पाने तक ममता पालीवाल की अथक मेहनत और कड़ा संघर्ष है। अपने संघर्ष की कहानी उन्होंने हमारे संवाददाता के साथ साझा की।
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर गणित प्रवक्ता कार्यरत सेक्टर-13 निवासी ममता पालीवाल ने बताया कि स्नातक में दाखिले के दौरान बड़े भाई डॉ. संदीप ने उन्हें गणित लेने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उनकी गणित में रुचि बढ़ गई। उसके बाद लगातार वे गणित में हर रोज नए प्रयोग करने लगीं। बच्चों को गणित से जोड़ने के लिए उन्होंने इस तरह के मॉडल बनाए कि बच्चे खेल-खेल में गणित के कठिन से कठिन सवालों को भी आसानी से हल कर लेते हैं। ममता पालीवाल को जिला प्रशासन भी दो बार 15 अगस्त और 26 जनवरी के जिला स्तरीय कार्यक्रम में सम्मानित किया जा चुका है।
विज्ञापन
परिवार और कॅरिअर एक साथ संभालना था चुनौती
ममता पालीवाल ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती परिवार और कॅरिअर को एक साथ आगे बढ़ाना था। इसके लिए उन्होंने फैसला कि वे अपने नए प्रयोगों के लिए रात को समय निकालेंगी। कई बार तो किसी प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए पूरी रात जागकर निकल जाती थी। उसके बाद सुबह घर का सारा काम करने के साथ ही अगले दिन की ड्यूटी भी शुरू हो जाती थी।
कोरोना संक्रमित होते हुए भी पढ़ाई जारी रखी
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ममता पालीवाल भी संक्रमण की चपेट में आ गईं। उनकी तबीयत खराब होने के बाद भी वे अपनी छात्राओं को ऑनलाइन नोट्स और यूट्यूब के जरिये पढ़ाना जारी रखा। कई बार तो हालत इतनी खराब हो जाती थी कि उनसे बैठा रहना भी मुश्किल हो जाता था।
निजी स्कूल से की थी कॅरिअर की शुरुआत
ममता पालीवल ने वर्ष 2007 में निजी स्कूल में गणित अध्यापिका की नौकरी शुरू की थी। इसके बाद वे वर्ष 2011 में राजकीय कन्या हाईस्कूल देवराला में गणित अध्यापिका लगी थीं। इसके बाद उनका प्रमोशन वर्ष 2016 में भिवानी स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर प्रवक्ता हो गया। फिलहाल में इसी स्कूल में कार्यरत हैं।
टीचिंग लर्निंग मॉड्यूल से बनाई अलग पहचान
ममता पालीवाल ने बताया कि पंचकूला में नेशनल ज्यूरी को उनके टीचिंग लर्निंग मॉड्यूल यानी मैथमेटिक्स के एजुकेशनल गेम्स बहुत पसंद आए। नेशनल ज्यूरी ने भी इनके टीचिंग लर्निंग मैटीरियल को सबसे ज्यादा पसंद किया है और इनके द्वारा बनाए गए वीडियो भी मंगवाए। उन्होंने खुद के फॉर्मूला और गेम्स बनाने शुरू कर दिए। वे रोजाना स्कूल में गणित पढ़ने-पढ़ाने, मॉडल बनाने, फॉर्मूला तैयार करने व गेम्स बनाने आदि में सात-आठ घंटे लगाती हैं। उन्होंने गुणनखंड, समीकरण, भागखंड, समय-दूरी के सवाल आदि के गेम्स बनाए हुए हैं।
कोरोना काल में अपनाया डिजिटल प्लेटफार्म
प्रवक्ता ममता पालीवाल ने बताया कि वे गणित पर विशेष शोध में लंबे समय से जुटी हुईं हैं। उनके पति बीर सिंह भी शिक्षक हैं। वह भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। कोरोना काल के दौरान उनके पति बीर सिंह ने उन्हें डिजिटल माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रति प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने अपना खुद का यूट्यूब चैनल, ऑनलाइन नोट, एजुसेट पर वीडियो, ऑनलाइन क्विज तैयार किए। इन सब में खुद का ही डाटा बनाकर विद्यार्थियों को भेजा। इस दौरान वे कई बार तो पूरी-पूरी रात जागते रहते थे और रात को दो से तीन बजे तक सोना तो सामान्य हो गया था। इस दौरान उनके पति का विशेष सहयोग रहा। उनका बेटा विशेष आठवीं कक्षा और बेटी दिव्यांशी चौथी कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं। (संवाद)
विज्ञापन
भिवानी। गणित विषय से ज्यादातर विद्यार्थी डरते हैं, लेकिन भिवानी के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राएं गणित के सवालों के साथ खेलती हैं। दरअसल उनकी शिक्षक ममता पालीवाल का गणित को पढ़ाने का तरीका ही कुछ अलग है। इसी की बदौलत ममता पालीवाल को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। रविवार को उन्हें चंडीगढ़ स्थित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र में यह पुरस्कार उन्हें राष्ट्रपति द्वारा वर्चुअल कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा।
बचपन की पढ़ाई से लेकर इस पुरस्कार को पाने तक ममता पालीवाल की अथक मेहनत और कड़ा संघर्ष है। अपने संघर्ष की कहानी उन्होंने हमारे संवाददाता के साथ साझा की।
विज्ञापन
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर गणित प्रवक्ता कार्यरत सेक्टर-13 निवासी ममता पालीवाल ने बताया कि स्नातक में दाखिले के दौरान बड़े भाई डॉ. संदीप ने उन्हें गणित लेने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उनकी गणित में रुचि बढ़ गई। उसके बाद लगातार वे गणित में हर रोज नए प्रयोग करने लगीं। बच्चों को गणित से जोड़ने के लिए उन्होंने इस तरह के मॉडल बनाए कि बच्चे खेल-खेल में गणित के कठिन से कठिन सवालों को भी आसानी से हल कर लेते हैं। ममता पालीवाल को जिला प्रशासन भी दो बार 15 अगस्त और 26 जनवरी के जिला स्तरीय कार्यक्रम में सम्मानित किया जा चुका है।
विज्ञापन
परिवार और कॅरिअर एक साथ संभालना था चुनौती
ममता पालीवाल ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती परिवार और कॅरिअर को एक साथ आगे बढ़ाना था। इसके लिए उन्होंने फैसला कि वे अपने नए प्रयोगों के लिए रात को समय निकालेंगी। कई बार तो किसी प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए पूरी रात जागकर निकल जाती थी। उसके बाद सुबह घर का सारा काम करने के साथ ही अगले दिन की ड्यूटी भी शुरू हो जाती थी।
कोरोना संक्रमित होते हुए भी पढ़ाई जारी रखी
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ममता पालीवाल भी संक्रमण की चपेट में आ गईं। उनकी तबीयत खराब होने के बाद भी वे अपनी छात्राओं को ऑनलाइन नोट्स और यूट्यूब के जरिये पढ़ाना जारी रखा। कई बार तो हालत इतनी खराब हो जाती थी कि उनसे बैठा रहना भी मुश्किल हो जाता था।
निजी स्कूल से की थी कॅरिअर की शुरुआत
ममता पालीवल ने वर्ष 2007 में निजी स्कूल में गणित अध्यापिका की नौकरी शुरू की थी। इसके बाद वे वर्ष 2011 में राजकीय कन्या हाईस्कूल देवराला में गणित अध्यापिका लगी थीं। इसके बाद उनका प्रमोशन वर्ष 2016 में भिवानी स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर प्रवक्ता हो गया। फिलहाल में इसी स्कूल में कार्यरत हैं।
टीचिंग लर्निंग मॉड्यूल से बनाई अलग पहचान
ममता पालीवाल ने बताया कि पंचकूला में नेशनल ज्यूरी को उनके टीचिंग लर्निंग मॉड्यूल यानी मैथमेटिक्स के एजुकेशनल गेम्स बहुत पसंद आए। नेशनल ज्यूरी ने भी इनके टीचिंग लर्निंग मैटीरियल को सबसे ज्यादा पसंद किया है और इनके द्वारा बनाए गए वीडियो भी मंगवाए। उन्होंने खुद के फॉर्मूला और गेम्स बनाने शुरू कर दिए। वे रोजाना स्कूल में गणित पढ़ने-पढ़ाने, मॉडल बनाने, फॉर्मूला तैयार करने व गेम्स बनाने आदि में सात-आठ घंटे लगाती हैं। उन्होंने गुणनखंड, समीकरण, भागखंड, समय-दूरी के सवाल आदि के गेम्स बनाए हुए हैं।
कोरोना काल में अपनाया डिजिटल प्लेटफार्म
प्रवक्ता ममता पालीवाल ने बताया कि वे गणित पर विशेष शोध में लंबे समय से जुटी हुईं हैं। उनके पति बीर सिंह भी शिक्षक हैं। वह भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। कोरोना काल के दौरान उनके पति बीर सिंह ने उन्हें डिजिटल माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रति प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने अपना खुद का यूट्यूब चैनल, ऑनलाइन नोट, एजुसेट पर वीडियो, ऑनलाइन क्विज तैयार किए। इन सब में खुद का ही डाटा बनाकर विद्यार्थियों को भेजा। इस दौरान वे कई बार तो पूरी-पूरी रात जागते रहते थे और रात को दो से तीन बजे तक सोना तो सामान्य हो गया था। इस दौरान उनके पति का विशेष सहयोग रहा। उनका बेटा विशेष आठवीं कक्षा और बेटी दिव्यांशी चौथी कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं। (संवाद)