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Hisar News: मन में ठान लिया और छोड़ दिया नशा, अब जी रहे खुशहाल जिंदगी
Sun, 12 Jan 2025 02:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 12 Jan 2025 02:48 AM IST
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हिसार। नशे से लड़ा जा सकता है। मनोबल ऊंचा और दृढ़ इच्छाशक्ति है तो नशे के दलदल से बाहर निकलना कोई मुश्किल काम नहीं है। जिले के अनेक ऐसे युवा हैं, जिनकी जिंदगी नशा करने से नरक जैसी हो गई थी। घर-समाज में कोई कद्र नहीं रह गई थी। काम-धंधा छुट गया था। नशे की पूर्ति के लिए घर का सामान बेच दिया। नशा नहीं मिलता तो दम निकलने लगता था, लेकिन आज इस नरक जैसी जिंदगी से बाहर निकलकर समाज की मुख्यधारा में आ चुके हैं। इनका यही संदेश है कि नशे से लड़ें न की टूट जाएं। मन में जिस दिन संकल्प कर लोगे, उसी दिन नशे से मुक्त हो जाओगे।
मां के देहांत के बाद छोड़ा नशा
जिले के एक गांव के रहने वाले विकास (परिवर्तित नाम) ने बताया कि ऐसे युवकों से दोस्ती हो गई थी, जो नशा करते थे। चिट्टे का नशा करने लगा। काम से जो भी कमाता नशे में बर्बाद कर देता। घर पर एक भी रुपया नहीं दे पाता था। नशा न मिलने पर पागलों जैसी हालत हो जाती। करीब तीन साल पहले मां का देहांत हो गया। उस समय मन में नशा छोड़ने का ढृढ़ संकल्प लिया और पुलिस की नशा मुक्ति टीम ने भी मदद की। उपचार और काउंसलिंग करवाई। अब नशा छोड़ फिर से डेकोरेशन का काम करने लगा हूं।
दोस्त ने नशा करने की लत डाली
जिले के एक गांव के रहने वाले राहुल (परिवर्तित नाम) ने बताया कि गांव में साथ में रहने वाले दो तीन युवक चिट्टे का नशा करते थे। उन्होंने ही उसे नशा करने की लत डाली। नशे की पूर्ति के लिए रुपये न होने पर घर का सामान बेचने की नौबत तक आ गई। घरवालों को पता चला तो मारपीट भी की। करीब छह माह पहले गांव में पुलिस की नशा मुक्ति टीम आई। घर वालों की हालत को देखते हुए नशा छोड़ने का प्रण लिया। नशा छोड़ने की दवाई कम असर करती थी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और अब नशा छोड़कर घर वालों का काम में हाथ बटा रहा हूं।
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बुरी संगत में फंसने के कारण लगी लत
शहर की एक कॉलोनी में रहने वाले अमन (परिवर्तित नाम) ने बताया कि करीब तीन साल पहले ऐसे युवाओं की संगत में पड़ा जो चिट्टे का नशा करते थे। उनके साथ रहने से धीरे-धीरे मैं भी नशा करने लगा। शुरुआत में आंनद आता था, लेकिन जब नशा नहीं मिलता तो पूरा शरीर तड़पने लगता। परिजनों ने संभाला और नशा छोड़ने के लिए अस्पताल लेकर आए। धीरे-धीरे दवाइयों के सेवन और काउंसलिंग के जरिए नशा छोड़ दिया। मेरी युवाओं से अपील की है कि वे नशे से दूर रहें और खेलों की तरफ ध्यान दें।
नशा न मिलने पर तड़पता था शरीर
राकेश (परिवर्तित नाम) ने बताया गांव में ही रहने वाले एक युवक उसे नशा करने के लिए कहा। बोला-बहुत मजा आएगा। उसने मेरे हाथ में एक सीरिंज लगा दी। अब नशे की पूर्ति के लिए घर का सामान तक बेचने लगा था। मजदूरी से जो रुपये मिलते थे उससे नशा करता। नशा न मिलने से तड़पने लगता। नशे की पूर्ति के लिए दोस्तों के पास जाता, जो नशा करते थे। उनसे रुपये भी उधार लेता। करीब आठ माह पहले नशामुक्ति टीम के संपर्क में आया। इलाज मिला और आज नशामुक्त हो चुका हूं।
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मां के देहांत के बाद छोड़ा नशा
जिले के एक गांव के रहने वाले विकास (परिवर्तित नाम) ने बताया कि ऐसे युवकों से दोस्ती हो गई थी, जो नशा करते थे। चिट्टे का नशा करने लगा। काम से जो भी कमाता नशे में बर्बाद कर देता। घर पर एक भी रुपया नहीं दे पाता था। नशा न मिलने पर पागलों जैसी हालत हो जाती। करीब तीन साल पहले मां का देहांत हो गया। उस समय मन में नशा छोड़ने का ढृढ़ संकल्प लिया और पुलिस की नशा मुक्ति टीम ने भी मदद की। उपचार और काउंसलिंग करवाई। अब नशा छोड़ फिर से डेकोरेशन का काम करने लगा हूं।
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दोस्त ने नशा करने की लत डाली
जिले के एक गांव के रहने वाले राहुल (परिवर्तित नाम) ने बताया कि गांव में साथ में रहने वाले दो तीन युवक चिट्टे का नशा करते थे। उन्होंने ही उसे नशा करने की लत डाली। नशे की पूर्ति के लिए रुपये न होने पर घर का सामान बेचने की नौबत तक आ गई। घरवालों को पता चला तो मारपीट भी की। करीब छह माह पहले गांव में पुलिस की नशा मुक्ति टीम आई। घर वालों की हालत को देखते हुए नशा छोड़ने का प्रण लिया। नशा छोड़ने की दवाई कम असर करती थी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और अब नशा छोड़कर घर वालों का काम में हाथ बटा रहा हूं।
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बुरी संगत में फंसने के कारण लगी लत
शहर की एक कॉलोनी में रहने वाले अमन (परिवर्तित नाम) ने बताया कि करीब तीन साल पहले ऐसे युवाओं की संगत में पड़ा जो चिट्टे का नशा करते थे। उनके साथ रहने से धीरे-धीरे मैं भी नशा करने लगा। शुरुआत में आंनद आता था, लेकिन जब नशा नहीं मिलता तो पूरा शरीर तड़पने लगता। परिजनों ने संभाला और नशा छोड़ने के लिए अस्पताल लेकर आए। धीरे-धीरे दवाइयों के सेवन और काउंसलिंग के जरिए नशा छोड़ दिया। मेरी युवाओं से अपील की है कि वे नशे से दूर रहें और खेलों की तरफ ध्यान दें।
नशा न मिलने पर तड़पता था शरीर
राकेश (परिवर्तित नाम) ने बताया गांव में ही रहने वाले एक युवक उसे नशा करने के लिए कहा। बोला-बहुत मजा आएगा। उसने मेरे हाथ में एक सीरिंज लगा दी। अब नशे की पूर्ति के लिए घर का सामान तक बेचने लगा था। मजदूरी से जो रुपये मिलते थे उससे नशा करता। नशा न मिलने से तड़पने लगता। नशे की पूर्ति के लिए दोस्तों के पास जाता, जो नशा करते थे। उनसे रुपये भी उधार लेता। करीब आठ माह पहले नशामुक्ति टीम के संपर्क में आया। इलाज मिला और आज नशामुक्त हो चुका हूं।

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