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कृषि मेला : नई तकनीक के साथ किया कदमताल और बन गए प्रगतिशील किसान
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हिसार -चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मेले में 12 फीट लंबी ज्वार की किस्म को देख
- फोटो : Hisar
हिसार। नई तकनीकी का प्रयोग कर खेती को भी लाभकारी बनाया जा सकता है। प्रदेश के किसान परंपरागत खेती छोड़कर नई तकनीक के साथ कदमताल कर प्रगतिशील किसान बन गए हैं।
एचएयू के कृषि मेले में सम्मानित किसानों ने इसे साबित किया है। हिसार के डॉ. विकास वर्मा ड्राई ऑस्टर मशरूम के विशेषज्ञ बन गए हैं तो वहीं सिरसा के रमेश भादू ने ड्रिप सिस्टम से सिंचाई कर कपास में रिकॉर्ड उत्पादन किया है। फतेहाबाद के राधेश्याम ने धान की बिजाई कर पानी की खपत को लगभग 80 प्रतिशत तक कम किया है तो वहीं भिवानी के अशोक शर्मा बागवानी में नई राह दिखा रहे हैं। अलग-अलग गांवों के इन किसानों ने खेती तो परंपरागत ढंग से ही शुरू की थी, लेकिन थोड़े से बदलाव ने इन्हें संपन्न किसानों की श्रेणी में ला दिया है।
खेती को लेकर युवा पीढ़ी में अभी भी हिचकिचाहट है। अधिक लागत व कम मुनाफे के साथ-साथ मौसम की मार का हवाला देकर युवा पीढ़ी खेती के बजाय नौकरी को अधिक तवज्जो दे रही है, लेकिन एचएयू के कृषि मेले में सम्मानित किसानों ने जो राह दिखाई है, उससे बदलाव का एहसास होता है। सिरसा के प्रगतिशील किसान रमेश भादू ने कपास के साथ-साथ बागवानी में भी कमाल दिखाया है। उन्होंने बताया कि खेती में भी नई तकनीकी का प्रयोग जरूरी है। कपास की सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम का प्रयोग करने से सिंचाई की लागत घटने के साथ ही उत्पादन भी बढ़ा है। अच्छा उत्पादन होने पर अन्य सारी समस्याओं का समाधान खुद ही किया।
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फतेहाबाद के किसान राधेश्याम ने बताया कि उनके गांव में अधिकांश किसान परंपरागत विधि से धान की खेती करते थे। हमने नई तकनीक अपनाई और धान की रोपाई की जगह बिजाई की। इससे एक तो खेत में पानी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, दूसरे कम पानी में ही सिंचाई भी हो जाती है। इस विधि से धान की खेती में करीब 80 फीसदी तक पानी की बचत होती है।
भिवानी के किसान अशोक शर्मा ने बागवानी में नया प्रयोग किया। खेत में कम्पोस्ट की मात्रा बढ़ाने व सिंचाई की नई विधियों को अपनाने से न केवल उत्पादन बढ़ा, बल्कि लागत में भी कमी आई है। हिसार के विकास वर्मा ने भी मशरूम की खेती में नया प्रयोग किया और अब तो इनकी कंपनी दूसरे किसानों को मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग देने लगी है। खेती में आ रहा यह नया बदलाव सुखद है।
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एचएयू के कृषि मेले में सम्मानित किसानों ने इसे साबित किया है। हिसार के डॉ. विकास वर्मा ड्राई ऑस्टर मशरूम के विशेषज्ञ बन गए हैं तो वहीं सिरसा के रमेश भादू ने ड्रिप सिस्टम से सिंचाई कर कपास में रिकॉर्ड उत्पादन किया है। फतेहाबाद के राधेश्याम ने धान की बिजाई कर पानी की खपत को लगभग 80 प्रतिशत तक कम किया है तो वहीं भिवानी के अशोक शर्मा बागवानी में नई राह दिखा रहे हैं। अलग-अलग गांवों के इन किसानों ने खेती तो परंपरागत ढंग से ही शुरू की थी, लेकिन थोड़े से बदलाव ने इन्हें संपन्न किसानों की श्रेणी में ला दिया है।
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खेती को लेकर युवा पीढ़ी में अभी भी हिचकिचाहट है। अधिक लागत व कम मुनाफे के साथ-साथ मौसम की मार का हवाला देकर युवा पीढ़ी खेती के बजाय नौकरी को अधिक तवज्जो दे रही है, लेकिन एचएयू के कृषि मेले में सम्मानित किसानों ने जो राह दिखाई है, उससे बदलाव का एहसास होता है। सिरसा के प्रगतिशील किसान रमेश भादू ने कपास के साथ-साथ बागवानी में भी कमाल दिखाया है। उन्होंने बताया कि खेती में भी नई तकनीकी का प्रयोग जरूरी है। कपास की सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम का प्रयोग करने से सिंचाई की लागत घटने के साथ ही उत्पादन भी बढ़ा है। अच्छा उत्पादन होने पर अन्य सारी समस्याओं का समाधान खुद ही किया।
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फतेहाबाद के किसान राधेश्याम ने बताया कि उनके गांव में अधिकांश किसान परंपरागत विधि से धान की खेती करते थे। हमने नई तकनीक अपनाई और धान की रोपाई की जगह बिजाई की। इससे एक तो खेत में पानी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, दूसरे कम पानी में ही सिंचाई भी हो जाती है। इस विधि से धान की खेती में करीब 80 फीसदी तक पानी की बचत होती है।
भिवानी के किसान अशोक शर्मा ने बागवानी में नया प्रयोग किया। खेत में कम्पोस्ट की मात्रा बढ़ाने व सिंचाई की नई विधियों को अपनाने से न केवल उत्पादन बढ़ा, बल्कि लागत में भी कमी आई है। हिसार के विकास वर्मा ने भी मशरूम की खेती में नया प्रयोग किया और अब तो इनकी कंपनी दूसरे किसानों को मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग देने लगी है। खेती में आ रहा यह नया बदलाव सुखद है।

एचएयू के कृषि मेले में फूलों की पौध के बारेमें जानकारी देते डॉ. अरविंद मलिक। संवाद- फोटो : Hisar

हिसार- एचएयू के कृषि मेले में प्रगतिशील किसानों को सम्मानित करते कुलपति प्रो. बीआर कांबोज, लुवास ?- फोटो : Hisar

हर सार -एचएयू में कृषि मेले में सूक्ष्म सिंचाई के लिए लगाए प्रदर्शनी प्लांट को देखते किसान। संवाद- फोटो : Hisar