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जाटों ने सरकार को दिया 3 दिन का अल्टीमेटम
Hisar
Updated Tue, 15 Mar 2016 12:11 AM IST
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जाट आंदोलन
- फोटो : Bureau
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अपनी मांगों को लेकर जाट समाज के लोगों ने प्रदेश सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है। लघु सचिवालय के गेट पर जुटे जाटों ने आंदोलन के शहीदों को मौन धारण करने के बाद पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद जाट एकता के नारे लगाते हुए लघु सचिवालय से डीसी आवास तक पैदल मार्च निकाला।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले जाट समाज के लोग सोमवार को लघु सचिवालय परिसर पहुंचे। करीब ढाई घंटे तक लघु सचिवालय पर धरना दिया। इसके बाद प्रदर्शन करते हुए डीसी आवास पर पहुंचे। यहां डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे तथा एसपी अश्विन शैणवी को ज्ञापन सौंपा। जाट प्रतिनिधियों ने कहा कि 2005-06 से हरियाणा में आंदोलन चल रहा है। प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक ने कहा कि 13 राज्यों में चल रहे जाट आंदोलन में कभी हिंसा नहीं हुई।
सत्तारूढ़ दल तथा विपक्ष के दलों ने षडयंत्र के तहत जाट आरक्षण को बदनाम करने की कोशिश की है। केंद्र तथा प्रदेश सरकार 22 फरवरी को मानी गई 7 मांगों को जल्द पूरा करे। इसमें हरियाणा में विधेयक लाकर जाटों को आरक्षण प्रदान किया जाए। केंद्रीय स्तर पर ओबीसी आयोग संशोधन बिल लाकर विसंगतियों को दूर करे। गोली चलाने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही हो।
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आंदोलन में शहीद हुए लोगों को मुआवजा व नौकरी दी जाए। पिछले व वर्तमान आंदोलन के केस वापस लिए जाएं। राजकुमार सैनी पर कार्यवाही की जाए। इन मांगों को सरकार ने माना था अब इन्हें जल्द लागू किया जाए। इन मांगों को लागू नहीं किया गया तो 13 राज्यों के जाट फिर से आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर सकते हैं।
जाटों की सात प्रमुख मांग
- 22 फरवरी को मानी गई मांगों को पूरा किया जाए।
- सरकार की ओर से बनाए गए झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं।
- पूछताछ समाज के लोगों के सामने की ही जाए।
- सरकार के मंत्री, विधायक, सांसदों की ओर से किए जा रहे दुष्प्रचार को बंद कराएं।
- आंदोलन के समय हुई हिंसा की जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से कराएं।
- फर्जी मुकदमों में फंसाए गए जाट समाज के युवाओं को रिहा किया जाए।
- जिन जिलों में शांतिपूर्वक आंदोलन रहा वहां झूठे मुकदमे तुरंत रद्द किए जाएं।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर रामभगत मलिक, सतबीर पूनिया, महेंद्र पूनिया, कृष्ण किरमारा, दलजीत पंघाल, देवी प्रसन्न दहिया, दलीप सहारण, अशोक कुमार, सुरेश सिंह, जय सिंह, छबीला, राजेंद्र जाखड़, सत्यवान पूनिया, संजय, विजय, दिनेश नैन, अमित, नीरज गिल, तेजबीर, कमलदीप, हरबंस सहारण, पृथ्वी भोजराज, जय सिंह डूूडी, महेंद्र सहित अन्य उपस्थित थे।
28 शहीदों को श्रद्धांजलि
जाट समाज के लोगों ने 28 शहीदों की फोटो लगाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। फ्लैक्स पर लगाए गए फोटो पर पुष्प अर्पित कर उन्हें सम्मान दिया। इसमें 2016 के अलावा पिछले आंदोलन के तीन शहीदों को भी शामिल किया गया। इन सभी के नाम के साथ संक्षिप्त ब्यौरा भी दिया गया।
गांव स्तर पर बनेगी कमेटी
जाटों ने फैसला लिया कि हर गांव स्तर पर एक कमेटी का गठन किया जाएगा। जो निर्दोषों की गिरफ्तारी रोकने के लिए काम करेगी। आंदोलन के लिए प्रदेश स्तरीय कमेटी का निर्देश मिलने पर इसे तुरंत गांव में अमल में लाना कमेेटी की जिम्मेदारी होगी।
जाट गेट के बाहर, आरएएफ-पुलिस अंदर
जाट समाज के लोगों की ओर से धरने को लेकर पुलिस सोमवार सुबह दस बजे से ही अलर्ट थी। जाट समाज के लोग लघु सचिवालय परिसर में गेट के बाहर धरने पर रहे। पुलिस तथा आरएएफ के जवान गेट के अंदर पार्क में रहे। रैपिड एक्शन फोर्स के 150 से अधिक जवान लगाए गए थे। पुलिस के 110 जवानों के अलावा महिला पुलिस भी तैनात की गई थी। पुलिस बल लाठी, शील्ड, हेलमेट, जैकेट, आंसू गैस के गोले, वाटर कैनन लेकर पहुंचे थे।
क्रांतिमान पार्क की बजाए पहुंचे लघु सचिवालय
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले जाट समाज के लोग सोमवार को लघु सचिवालय परिसर पहुंचे। करीब ढाई घंटे तक लघु सचिवालय पर धरना दिया। इसके बाद प्रदर्शन करते हुए डीसी आवास पर पहुंचे। यहां डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे तथा एसपी अश्विन शैणवी को ज्ञापन सौंपा। जाट प्रतिनिधियों ने कहा कि 2005-06 से हरियाणा में आंदोलन चल रहा है। प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक ने कहा कि 13 राज्यों में चल रहे जाट आंदोलन में कभी हिंसा नहीं हुई।
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सत्तारूढ़ दल तथा विपक्ष के दलों ने षडयंत्र के तहत जाट आरक्षण को बदनाम करने की कोशिश की है। केंद्र तथा प्रदेश सरकार 22 फरवरी को मानी गई 7 मांगों को जल्द पूरा करे। इसमें हरियाणा में विधेयक लाकर जाटों को आरक्षण प्रदान किया जाए। केंद्रीय स्तर पर ओबीसी आयोग संशोधन बिल लाकर विसंगतियों को दूर करे। गोली चलाने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही हो।
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आंदोलन में शहीद हुए लोगों को मुआवजा व नौकरी दी जाए। पिछले व वर्तमान आंदोलन के केस वापस लिए जाएं। राजकुमार सैनी पर कार्यवाही की जाए। इन मांगों को सरकार ने माना था अब इन्हें जल्द लागू किया जाए। इन मांगों को लागू नहीं किया गया तो 13 राज्यों के जाट फिर से आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर सकते हैं।
जाटों की सात प्रमुख मांग
- 22 फरवरी को मानी गई मांगों को पूरा किया जाए।
- सरकार की ओर से बनाए गए झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं।
- पूछताछ समाज के लोगों के सामने की ही जाए।
- सरकार के मंत्री, विधायक, सांसदों की ओर से किए जा रहे दुष्प्रचार को बंद कराएं।
- आंदोलन के समय हुई हिंसा की जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से कराएं।
- फर्जी मुकदमों में फंसाए गए जाट समाज के युवाओं को रिहा किया जाए।
- जिन जिलों में शांतिपूर्वक आंदोलन रहा वहां झूठे मुकदमे तुरंत रद्द किए जाएं।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर रामभगत मलिक, सतबीर पूनिया, महेंद्र पूनिया, कृष्ण किरमारा, दलजीत पंघाल, देवी प्रसन्न दहिया, दलीप सहारण, अशोक कुमार, सुरेश सिंह, जय सिंह, छबीला, राजेंद्र जाखड़, सत्यवान पूनिया, संजय, विजय, दिनेश नैन, अमित, नीरज गिल, तेजबीर, कमलदीप, हरबंस सहारण, पृथ्वी भोजराज, जय सिंह डूूडी, महेंद्र सहित अन्य उपस्थित थे।
28 शहीदों को श्रद्धांजलि
जाट समाज के लोगों ने 28 शहीदों की फोटो लगाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। फ्लैक्स पर लगाए गए फोटो पर पुष्प अर्पित कर उन्हें सम्मान दिया। इसमें 2016 के अलावा पिछले आंदोलन के तीन शहीदों को भी शामिल किया गया। इन सभी के नाम के साथ संक्षिप्त ब्यौरा भी दिया गया।
गांव स्तर पर बनेगी कमेटी
जाटों ने फैसला लिया कि हर गांव स्तर पर एक कमेटी का गठन किया जाएगा। जो निर्दोषों की गिरफ्तारी रोकने के लिए काम करेगी। आंदोलन के लिए प्रदेश स्तरीय कमेटी का निर्देश मिलने पर इसे तुरंत गांव में अमल में लाना कमेेटी की जिम्मेदारी होगी।
जाट गेट के बाहर, आरएएफ-पुलिस अंदर
जाट समाज के लोगों की ओर से धरने को लेकर पुलिस सोमवार सुबह दस बजे से ही अलर्ट थी। जाट समाज के लोग लघु सचिवालय परिसर में गेट के बाहर धरने पर रहे। पुलिस तथा आरएएफ के जवान गेट के अंदर पार्क में रहे। रैपिड एक्शन फोर्स के 150 से अधिक जवान लगाए गए थे। पुलिस के 110 जवानों के अलावा महिला पुलिस भी तैनात की गई थी। पुलिस बल लाठी, शील्ड, हेलमेट, जैकेट, आंसू गैस के गोले, वाटर कैनन लेकर पहुंचे थे।
क्रांतिमान पार्क की बजाए पहुंचे लघु सचिवालय
जाट समाज के लोगों को क्रांतिमान पार्क में एकत्र होकर श्रद्धांजलि सभा करनी थी। इसके बाद यहां से प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय जाना था। सोमवार की सुबह पार्क पहुंचे तो यहां पार्क निर्माण कार्य के चलते पार्क में पानी भरा हुआ था। इसके बाद जाट आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य सीधे लघु सचिवालय पहुंच गए। जाटों ने आरोप लगाया कि साजिश के तहत प्रशासन ने पार्क में पानी भराया।