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Hisar News: ऑस्ट्रेलिया में चाइल्ड सेफ्टी ऑफिसर बनीं हिसार की बेटी श्वेता, भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग लेफ्टिनेंट बड़ी बहन
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श्वेता रोहिल
हिसार। हिसार के भिवानी रोहिल्ला गांव की बेटी श्वेता रोहिल ऑस्ट्रेलिया में चाइल्ड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त हुई हैं। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, गांव में खुशी का माहौल है और लगातार बधाई संदेश आ रहे हैं। श्वेता ने 2020 में ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ सोशल वर्क कोर्स में दाखिला लिया था। जनवरी 2025 में कोर्स पूरा होने के कुछ महीने बाद ही उन्हें ऑस्ट्रेलिया में सरकारी पद पर नियुक्ति मिल गई।
उनकी बड़ी बहन कीर्ति रोहिल भारतीय वायुसेना में बतौर फ्लाइंग लेफ्टिनेंट देश सेवा कर रही हैं तो पिता आजाद रोहिल भी एयरफोर्स में 18 साल सेवा दे चुके हैं। मां नवीना गृहिणी हैं। श्वेता के माता-पिता का कहना है बेटों और बेटियों में फर्क नहीं समझा जाए तो बेटियां कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।
हमें बेटियों पर गर्व
श्वेता और कीर्ति की माता नवीना और पिता आजाद रोहिल ने कहा कि उन्हें अपनी बेटियों पर गर्व है। हरियाणा की बेटियां आए दिन किसी न किसी क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। हर बेटी इसी तरह से मंच मिले तो मंजिल तक पहुंचने का रास्ता वे ही खुद बना लेती हैं। लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी और बेटियों की शिक्षा पर ध्यान देना होगा। श्वेता को 12वीं पास करते ही ऑस्ट्रेलिया भेजने का फैसला मुश्किल था। लेकिन हमने पाबंदी नहीं लगाई और उसे शिक्षा ग्रहण करने का अवसर दिया। आज मेहनत की बदौलत दोनों बेटियों अपने सपनों को साकार कर सकी हैं।
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ऑपरेशन सिंदूर में प्रहरी बनकर डटी हुई थी बड़ी बहन
श्वेता की मां नवीना ने बताया कि छोटी बेटी श्वेता बचपन से ही खुल व्यक्तित्व की हैं और देश का नाम रोशन की करने की चाह उसके मन में बसी हुई थी। इसी तरह बड़ी बेटी कीर्ति रोहिल में भी ऐसा ही जज्बा था। 2020 में कीर्ति एयरफोर्स में फ्लाइंग आफिसर के पद पर नियुक्ति हुई थी। मार्च पास्ट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैज लगाए थे। वर्तमान में वे फ्लाइंग लेफ्टिनेंट हैं। ऑपरेशन सिंदूर और इसके बाद उपजे तनाव के बाद मेरी बेटी देश की सीमा पर प्रहरी बनकर डटीं थी। उस वक्त उन्हें डर नहीं लगा बल्कि बेटी का साहस देख हिम्मत कई गुना बढ़ गई थी।
बेटियों को बचाने और पढ़ाने में अग्रणी है गांव
श्वेता के पिता आजाद ने कहा कि उनका गांव बेटियों के विकास के लिए हमेशा ही अग्रणी रहा है। 2015 में गांव में सर्वसम्मति से प्रदेश की पहली महिला पंचायत चुनकर अनोखा उदाहरण पेश किया था। इस पंचायत में सरंपच से लेकर सभी पंच महिलाएं थीं। तत्कालीन सीएम मनोहर लाल ने भी पंचायत को सम्मानित किया था। इतना ही नहीं गांव की बेटियां कबड्डी और बेसबॉल खेल में नेशनल तक खेल चुकी हैं। बेटियों को बचाने और पढ़ाने की परंपरा को मजबूत करने के लिए गांव पूरा सहयोग कर रहा है।
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उनकी बड़ी बहन कीर्ति रोहिल भारतीय वायुसेना में बतौर फ्लाइंग लेफ्टिनेंट देश सेवा कर रही हैं तो पिता आजाद रोहिल भी एयरफोर्स में 18 साल सेवा दे चुके हैं। मां नवीना गृहिणी हैं। श्वेता के माता-पिता का कहना है बेटों और बेटियों में फर्क नहीं समझा जाए तो बेटियां कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।
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हमें बेटियों पर गर्व
श्वेता और कीर्ति की माता नवीना और पिता आजाद रोहिल ने कहा कि उन्हें अपनी बेटियों पर गर्व है। हरियाणा की बेटियां आए दिन किसी न किसी क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। हर बेटी इसी तरह से मंच मिले तो मंजिल तक पहुंचने का रास्ता वे ही खुद बना लेती हैं। लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी और बेटियों की शिक्षा पर ध्यान देना होगा। श्वेता को 12वीं पास करते ही ऑस्ट्रेलिया भेजने का फैसला मुश्किल था। लेकिन हमने पाबंदी नहीं लगाई और उसे शिक्षा ग्रहण करने का अवसर दिया। आज मेहनत की बदौलत दोनों बेटियों अपने सपनों को साकार कर सकी हैं।
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ऑपरेशन सिंदूर में प्रहरी बनकर डटी हुई थी बड़ी बहन
श्वेता की मां नवीना ने बताया कि छोटी बेटी श्वेता बचपन से ही खुल व्यक्तित्व की हैं और देश का नाम रोशन की करने की चाह उसके मन में बसी हुई थी। इसी तरह बड़ी बेटी कीर्ति रोहिल में भी ऐसा ही जज्बा था। 2020 में कीर्ति एयरफोर्स में फ्लाइंग आफिसर के पद पर नियुक्ति हुई थी। मार्च पास्ट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैज लगाए थे। वर्तमान में वे फ्लाइंग लेफ्टिनेंट हैं। ऑपरेशन सिंदूर और इसके बाद उपजे तनाव के बाद मेरी बेटी देश की सीमा पर प्रहरी बनकर डटीं थी। उस वक्त उन्हें डर नहीं लगा बल्कि बेटी का साहस देख हिम्मत कई गुना बढ़ गई थी।
बेटियों को बचाने और पढ़ाने में अग्रणी है गांव
श्वेता के पिता आजाद ने कहा कि उनका गांव बेटियों के विकास के लिए हमेशा ही अग्रणी रहा है। 2015 में गांव में सर्वसम्मति से प्रदेश की पहली महिला पंचायत चुनकर अनोखा उदाहरण पेश किया था। इस पंचायत में सरंपच से लेकर सभी पंच महिलाएं थीं। तत्कालीन सीएम मनोहर लाल ने भी पंचायत को सम्मानित किया था। इतना ही नहीं गांव की बेटियां कबड्डी और बेसबॉल खेल में नेशनल तक खेल चुकी हैं। बेटियों को बचाने और पढ़ाने की परंपरा को मजबूत करने के लिए गांव पूरा सहयोग कर रहा है।