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पार्षदों ने कहा - हमारा वजूद नहीं तो क्यों करवाते हो चुनाव का ड्रामा
ब्यूरो / अमर उजाला , हिसार
Updated Fri, 11 Mar 2016 01:20 AM IST
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नगर निगम बैठक
- फोटो : bureau
बजट को लेकर वीरवार को हुई नगर निगम की बैठक में पार्षदों ने अधिकारियों की खूब खिंचाई की। पार्षदों के काम नहीं होने पर अधिकारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई गई। 51 करोड़ के बजट का एजेंडा हाउस ने पास तो कर दिया, मगर पार्षदों ने अधिकारियों को उलाहना देते हुए कहा कि ढाई साल निकल गए, आखिर हमारे कहने पर क्या किया है। एजेंडे तो पास करवा लेते हो मगर हमारे लिए क्यों कुछ नहीं करते। ऐसे में पार्षदों की क्या औकात रह गई। अगर हमारी औकात ही कुछ नहीं है तो फिर सरकार क्यों निगम चुनावों पर खर्च करवा रही है।
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मेयर शकुंतला राजलीवाला, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर सहित सभी पार्षदों ने अधिकारियों को घेर लिया। बजट में एमसी फंड में केवल 2 करोड़ 97 लाख के विकास का मुद्दा उठा। इतना ही नहीं एक पार्षद ने तो बैठक में ही सीएसआई एसआई पर रुपये लेने तक के आरोप लगा दिए। जवाब सीएसआई ने भी दिया और कहा कि अगर रुपये लेते तो हम टूटी हुई बाइक पर नहीं चलते औरों की तरह मेरे पास भी गाड़ी होती। हंगामेदार रही बैठक के बीच में ही पार्षद कर्मबीर ढिल्लो, पार्षद मानसिंह चौहान व पार्षद अजीत सिंह सदन छोड़कर चले गए।
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यूजर चार्ज के मामले पर भड़के पार्षद
पार्षद नरेंद्र शर्मा, पार्षद मानसिंह चौहान, पार्षद कर्मबीर ढिल्लो, पार्षद मास्टर प्रहलाद ने जब यूजर चार्जिज से आय बढ़ाने का मुद्दा आया तो अधिकारियों को घेर लिया। उन्होंने कहा कि ये तो जनता दे देगी मगर आपके कर्मचारी काम तो नहीं करते। हमें ये तो बता दो कि क्या कभी आप लोगों ने चेक किया है कि फील्ड में कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं। जब पार्षद चेक करते हैं तो अधिकारी व कर्मचारी आपत्ति उठाते हैं। नरेंद्र शर्मा ने दावा किया कि अगर सफाई कर्मचारियों की एक भी टीम में पूरे कर्मचारी लगे मिल जाए तो हाउस जो सजा देगा मैं भुगतने को तैयार हूं। अधिकारियों ने उनकी बात पर चुप्पी साध ली। उन्हें जवाब ढूंढे नहीं मिल रहा था। सचिव, सीएसआई एक दूसरे के मुंह की तरफ देखने लगे। आखिर में सीटीएम ने बात संभाली और कहा कि मैं खुद अपने स्तर पर चेकिंग करूंगा और व्यवस्था दुरुस्त करवाऊंगा।
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आखिर 54 माली है कहां
सैलरी पर चर्चा हुई तो फिर मामला उठा। पार्षद कर्मबीर ढिल्लो हाउस में खड़े होकर बोलने लगे कि आखिर मालियों की सैलरी देने के लिए निगम ने 2 करोड़ से ज्यादा का बजट रखा है मगर सवाल ये है कि आखिर इतनी राशि जिन पर खर्च की जा रही है वे हैं कहां। सभी पार्षद फिर अधिकारियों पर बरस पड़े उन्होंने कहा कि हमें ये तो बता दो कि ये माली कहां लगे हुए हैं।
आठ माली तो डीसी साहब की कोठी पर लगे हैं
बहस के दौरान पार्षद मास्टर प्रहलाद उठ खड़े हुए उन्होंने कहा कि आठ माली तो डीसी साहब की कोठी पर लगे हैं। ऐसे ही सभी अधिकारियों की कोठियों पर सफाई कर्मचारी और माली काम कर रहे हैं। सीटीएम सरजीत नैन ने फिर बीच में रोक टोक की और कहा कि आप लोग तुक्के मार रहे हो मैं पता लगाऊंगा। पार्षदों ने कहा कि हमारे वार्ड के हिसाब से हमें एक-एक माली उपलब्ध करवाया जाए बाकी आपने कहां लगा रखे हैं उससे हमें कोई मतलब नहीं।
मांडू बोले - वे कर्मचारी हैं कड़ै न मैने देख्या न गाम हाल्या नैं
पार्षद राजपाल मांडू ने भी कहा कि साहब आपने कई महीने पहले मेरे सातरोड में भी माली भेजा था। मुझे ये तो बता दो कि वह माली है कहां। आज तक तो ना मनै देख्या और ना ही गाम हाल्यां नै। उन्होंने ये भी कहा कि आपके कर्मचारी कोई काम तो करते नहीं। आरएवाई स्कीम के तहत जिन मकानों को बनवाया जा रहा है आज तक उसकी फाइल पर आप हस्ताक्षर नहीं कर पाए। जिन लोगों के घर टूटे हुए हैं वे सड़कों पर सो रहे हैं आखिर कर क्या रहे हैं आप। इस पर सीटीएम ने कहा कि मेरे पास आपकी फाइल ही नहीं आई। उन्होंने तुरंत मीटिंग खत्म होने के बाद उक्त फाइल पर हस्ताक्षर करने की बात कही।