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स्थानीय मुद्राएं, वैश्विक व्यापार और अमेरिकी प्रतिबंध: पीएम मोदी, पुतिन और पेजेश्कियान का ट्रंप को क्या संदेश?
Fri, 11 Sep 2026 09:16 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 11 Sep 2026 09:16 PM IST
सार
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, सुरक्षित समुद्री मार्गों और नए आर्थिक विकल्पों को लेकर ट्रंप को सीधा संदेश दिया है। अमेरिकी चेतावनियों और टैरिफ की धमकियों के बीच ब्रिक्स का यह रुख बेहद सख्त है। क्या डॉलर के दबदबे को चुनौती देकर ब्रिक्स देश वैश्विक व्यापार की नई दिशा तय कर पाएंगे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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ब्रिक्स फोरम से ट्रंप को दो टूक
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एक साझा और कड़ा रुख अपनाते हुए वैश्विक व्यापार, स्थानीय मुद्राओं और अमेरिकी नीतियों पर बड़ा बयान दिया है। तीनों शीर्ष नेताओं ने अधिक आर्थिक सहयोग, सुरक्षित व्यापारिक मार्गों और ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं के व्यापक इस्तेमाल पर खुलकर जोर दिया। यह साझा संदेश ऐसे समय में आया है जब डॉलर के दबदबे को चुनौती देने के ब्रिक्स के प्रयासों की अमेरिका में लगातार आलोचना हो रही है। तीनों वैश्विक दिग्गजों की यह साफ आवाज मौजूदा वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के विकल्प को मजबूत करने की ब्रिक्स देशों की महत्वाकांक्षा पर स्पष्ट मुहर लगाती है।
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क्या है स्थानीय मुद्राओं और वैश्विक व्यापार पर बना नया मोर्चा?
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच पर तीनों नेताओं का संबोधन वैश्विक व्यापार और वित्तीय ढांचे को नई दिशा देने वाला साबित हुआ है। फोरम में साफ किया गया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक व्यवस्था अब पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकती। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और उनकी ओर से डॉलर की बादशाहत को बचाने के लिए दी जा रही चेतावनियों के बीच ब्रिक्स देशों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे आपसी कारोबार में अपनी स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्राओं को प्राथमिकता देने के लिए तैयार हैं। यह मंच केवल व्यापारिक चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दुनिया को यह दिखा दिया कि आर्थिक प्रतिबंधों और मुद्रा दबावों के खिलाफ उभरती अर्थव्यवस्थाएं अब एक साथ खड़ी हैं।
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