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Hisar News: संयुक्त किसान आंदोलन की चौथी वर्षगांठ पर किसानों ने किया प्रदर्शन

Wed, 27 Nov 2024 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Wed, 27 Nov 2024 12:16 AM IST
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Farmers demonstrated on the fourth anniversary of the United Farmers Movement
संयुक्त किसान आंदोलन की चौथी वर्षगांठ पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपने जाते किसान व मजदूर। 
फतेहाबाद। संयुक्त किसान आंदोलन की चौथी वर्षगांठ पर मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा, ट्रेड यूनियन एवं खेत मजदूर संगठनों के संयुक्त आह्वान पर डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारी किसान लघु सचिवालय पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन उपायुक्त के मार्फत राष्ट्रपति के नाम सौंपा।
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खेत मजदूर नेता रामकुमार बहबलपुरिया ने बताया कि 26 नवंबर को लामबंदी के माध्यम से विरोध दिवस के रूप में चुना है। क्योंकि यही वह दिन है जब ट्रेड यूनियनों ने मजदूर विरोधी चार श्रम कोडों के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की थी और किसानों ने 2020 में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ संसद की ओर अपना ऐतिहासिक मार्च शुरू किया था। ऐतिहासिक आंदोलन की चौथी वर्षगांठ है।
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किसानों के लंबे संघर्ष के बाद कृषि कानून वापस लिए जाने पर किसानों से किए गए वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि बिना सी 2 + 50 प्रतिशत फॉर्मूला लागू किया और खरीद की कोई गारंटी नहीं है। इससे पहले कम से कम पंजाब और हरियाणा में धान और गेहूं की खरीद होती थी, लेकिन केंद्र सरकार पिछले साल खरीदी गई फसल को उठाने में विफल रही, इस साल मंडियों में जगह की कमी के कारण धान की खरीद रुक गई। किसान अपनी अल्प एमएसपी, एपीएमसी मंडियां, एफसीआई और पीडीएस आपूर्ति को बचाने के लिए भी फिर से सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
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केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे 4 लेबर कोड न्यूनतम मजदूरी, सुरक्षित रोजगार, उचित कार्य समय और यूनियन बनाने के अधिकार पर किसी भी गारंटी को रद्द करता है। निजीकरण, ठेकाकरण और फिक्स टर्म भर्ती नीतियां मौजूदा श्रमिकों और नौकरी चाहने वाले युवाओं को गुलामी की ओर धकेलती हैं। यूनियन बनाने के मूल अधिकार की रक्षा के लिए, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, सेवानिवृत्ति के अधिकार, भोजन और स्वास्थ्य सुरक्षा, शिकायतों के निवारण के लिए प्रभावी कानूनी मशीनरी आदि के लिए अभी भी ट्रेड यूनियनों को संघर्ष करना पड़ रहा है।

किसानों को कंगाली और कृषि संकट से मुक्ति मिल सके और श्रमिकों को अपनी जीत हासिल हो सके। किसान चेतावनी रैली को किसान नेता रामस्वरूप ढाणी गोपाल, अजय सिधाणी, रामकुमार बहबलपुरिया, निर्भय सिंह रतिया, सुखविंदर सिंह जेई, विष्णु दत्त शर्मा, गगनदीप कौर, तजिंदर सिंह थिंद, दलबीर सिंह आजाद, सतबीर सिंह, शीला शक्करपुरा, धर्मपाल जांडली, पवन कुमार भूथनकलां सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता निर्भय सिंह रतिया, सुखविंदर सिंह जेई, विष्णु दत्त शर्मा, रामकुमार बहबलपुरिया, लाभ सिंह टोहाना, ओमप्रकाश अनेजा, ओमप्रकाश, सतबीर सिंह पारता ने संयुक्त रूप से की। संचालन मास्टर राजेंद्र प्रसाद बाटू एवं अजय सिधानी ने किया।
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