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80 लाख के टेंडर में भ्रष्टाचार मिला, टेंडर रद्द, कमेटी में शामिल जेई, एमई व एक्सईएन ने मांगा स्पष्टीकरण
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हिसार। 80 लाख रुपये के टेंडर मामले में भ्रष्टाचार मिलने पर निगम प्रशासन ने टेंडर रद्द कर दिया है। साथ ही टेंडर खोलने वाली कमेटी में शामिल जेई, एमई व एक्सईएन से स्पष्टीकरण मांगा गया है। टेंडर अब दोबारा से लगाया जाएगा।
बता दें कि नगर निगम के उपनिगम आयुक्त के लिए आजाद नगर स्थित दमकल केंद्र के पास आवास बनाया जाना है। इसके लिए 80 लाख रुपये का टेंडर लगाया गया था। टेंडर खोलने वाली कमेटी ने बिना टेक्निकल बिड की स्क्रूटनी किए ही फाइनेंशियल बिड खोल दी। यही नहीं, उस वार्ड के जेई व एमई को इस बात की जानकारी ही नहीं थी। टेक्निकल विंग के अधिकारियों के बीच आपसी विवाद होने के कारण मामला उजागर हो गया। उच्च अधिकारियों ने भी इस पर तुरंत संज्ञान लिया।
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निगमायुक्त ने चीफ इंजीनियर व एसई के साथ की बैठक -
शुक्रवार को निगमायुक्त अशोक गर्ग ने इस मामले को लेकर चीफ इंजीनियर रमन, एसई आनंद स्वरूप व एक्सईएन जयवीर डूडी के साथ बैठक की। निगमायुक्त ने अधिकारियों के साथ इस मामले पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान निगमायुक्त ने अधिकारियों से मॉडल टेंडर के बारे में पूछा तो इस पर अधिकारी कुछ जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि टेंडर की शर्तों में एजेंसी के अनुभव की शर्त को क्यों नहीं शामिल किया। अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद टेंडर को रद्द करने व टेंडर कमेटी में शामिल अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने का फैसला लिया गया।
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जिस एजेंसी को एक दिन पहले दिया लाइसेंस, राजनीतिक परिवार से संबंध -
इस टेंडर के लिए आठ एजेंसियों ने आवेदन किया था। इनमें से एक एजेंसी को एक दिन पहले ही लाइसेंस दिया गया। उक्त एजेंसी किसी राजनीतिक परिवार के रिश्तेदार की है। उक्त एजेंसी के मालिक का रिश्तेदार नगर परिषद का प्रधान पद रह चुका है। चर्चा है कि उक्त एजेंसी को लाभ पहुंचाने के मकसद से ही इस भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।
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वर्जन -
टेंडर रद्द कर दिया है। मामले में शामिल अधिकारियों से स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
- अशोक गर्ग, निगमायुक्त हिसार।
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बता दें कि नगर निगम के उपनिगम आयुक्त के लिए आजाद नगर स्थित दमकल केंद्र के पास आवास बनाया जाना है। इसके लिए 80 लाख रुपये का टेंडर लगाया गया था। टेंडर खोलने वाली कमेटी ने बिना टेक्निकल बिड की स्क्रूटनी किए ही फाइनेंशियल बिड खोल दी। यही नहीं, उस वार्ड के जेई व एमई को इस बात की जानकारी ही नहीं थी। टेक्निकल विंग के अधिकारियों के बीच आपसी विवाद होने के कारण मामला उजागर हो गया। उच्च अधिकारियों ने भी इस पर तुरंत संज्ञान लिया।
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निगमायुक्त ने चीफ इंजीनियर व एसई के साथ की बैठक -
शुक्रवार को निगमायुक्त अशोक गर्ग ने इस मामले को लेकर चीफ इंजीनियर रमन, एसई आनंद स्वरूप व एक्सईएन जयवीर डूडी के साथ बैठक की। निगमायुक्त ने अधिकारियों के साथ इस मामले पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान निगमायुक्त ने अधिकारियों से मॉडल टेंडर के बारे में पूछा तो इस पर अधिकारी कुछ जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि टेंडर की शर्तों में एजेंसी के अनुभव की शर्त को क्यों नहीं शामिल किया। अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद टेंडर को रद्द करने व टेंडर कमेटी में शामिल अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने का फैसला लिया गया।
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जिस एजेंसी को एक दिन पहले दिया लाइसेंस, राजनीतिक परिवार से संबंध -
इस टेंडर के लिए आठ एजेंसियों ने आवेदन किया था। इनमें से एक एजेंसी को एक दिन पहले ही लाइसेंस दिया गया। उक्त एजेंसी किसी राजनीतिक परिवार के रिश्तेदार की है। उक्त एजेंसी के मालिक का रिश्तेदार नगर परिषद का प्रधान पद रह चुका है। चर्चा है कि उक्त एजेंसी को लाभ पहुंचाने के मकसद से ही इस भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।
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वर्जन -
टेंडर रद्द कर दिया है। मामले में शामिल अधिकारियों से स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
- अशोक गर्ग, निगमायुक्त हिसार।
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