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मंत्री दरबार में पहुंची पूर्व निगमायुक्त के चहेती संस्था को 13 हजार गज जमीन लीज पर देने की शिकायत
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हिसार। सेक्टर-15 निवासी एडवोकेट लेखराज मेहता ने पूर्व निगमायुक्त अशोक गर्ग पर निगम की 13 हजार गज जमीन को नियमों को ताक पर रखकर चहेती संस्था को सौंपनी की शिकायत दी है। यह शिकायत सीएम विंडो में लगाई गई है। इसके अलावा शहरी निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता को भी शिकायत देकर जांच की मांग की गई है। मंत्री ने शिकायत पर जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि निगम अधिकारियों ने आनन-फानन में जमीन की लीज को कैंसिल करने के आदेश दे दिए हैं।
शिकायतकर्ता एडवोकेट लेखराज मेहता ने बताया कि तत्कालीन निगम आयुक्त के आदेश पर नगर सुधार मंडल की व्यावसायिक जमीन को एक संस्था को देने का प्रस्ताव तैयार किया। इस नोटिंग पर सभी अधिकारियों ने उसी दिन 30 दिसंबर 2020 को सहमति दे दी। ऑटो मार्केट के सामने महापौर आवास के साथ लगती करीब 13 हजार गज जमीन को देने के लिए नियमों को नहीं अपनाया गया। व्यावसायिक जमीन को बिना किसी अधिकार के नर्सरी के लिए दे देना अपने आप में एक गैरकानूनी व अधिकारों का खुला दुरुपयोग है। निगम की जमीन का लैंड यूज बदलने का अधिकार निगमायुक्त व उनके अधीनस्थ किसी भी अधिकारी को नहीं है। इसके लिए निगम के हाउस की भी कोई अनुमति नहीं ली गई। एक सोसायटी को एनजीओ मानकर करोड़ों रुपये की जमीन एक अवैध इकरारनामे के तहत तीन साल के लिए एक संस्था को दे दिया गया। इकरारनामे में दी गई जमीन व क्षेत्रफल की भी जानकारी नहीं है, सिर्फ ऑटो मार्केट सामने लिखकर इकरारनामा किया गया। तत्कालीन निगमायुक्त ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए 12-13 हजार वर्ग गज जमीन गैरकानूनी रूप से एक संस्था को बिना किराये के सुपुर्द कर दी, जबकि नगर सुधार मंडल को इस जमीन पर खुली बोली के माध्यम से कॉमर्शियल प्लॉट बेचे जाने थे।
लीज कैंसिल करने में नियमों की अनदेखी...
इस मामले में शिकायत के बाद वर्तमान निगम आयुक्त ने जमीन की लीज को कैंसिल करने के आदेश पारित कर दिए। इसमें भी नियमों का पालन नहीं किया गया। लीज के अनुसार निगम एक सप्ताह का नोटिस देकर इसे कैंसिल कर सकता है। निगम अधिकारियों की ओर से एक महीने का समय दिया गया।
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मेरे पास शिकायत आई थी। मैंने जांच के लिए एससीएस को आदेश दिए हैं। इस मामले की गहराई से जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. कमल गुप्ता, शहरी निकाय मंत्री, हरियाणा
इस मामले में पूरी पारदर्शिता बरती गई थी। पहले निगम प्रशासन की शर्तें निर्धारित की गईं थी और फिर अखबार में अभिव्यक्ति की रुचि प्रकाशित करवाया था। इसमें एक ही संस्था ने आवेदन किया था। शर्त यह थी कि तीन साल के लिए यह जमीन दी जाएगी। इस पर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जाएंगी और एक माह के नोटिस पर संस्था को जगह को खाली करना होगा।
- अशोक गर्ग, पूर्व निगमायुक्त
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शिकायतकर्ता एडवोकेट लेखराज मेहता ने बताया कि तत्कालीन निगम आयुक्त के आदेश पर नगर सुधार मंडल की व्यावसायिक जमीन को एक संस्था को देने का प्रस्ताव तैयार किया। इस नोटिंग पर सभी अधिकारियों ने उसी दिन 30 दिसंबर 2020 को सहमति दे दी। ऑटो मार्केट के सामने महापौर आवास के साथ लगती करीब 13 हजार गज जमीन को देने के लिए नियमों को नहीं अपनाया गया। व्यावसायिक जमीन को बिना किसी अधिकार के नर्सरी के लिए दे देना अपने आप में एक गैरकानूनी व अधिकारों का खुला दुरुपयोग है। निगम की जमीन का लैंड यूज बदलने का अधिकार निगमायुक्त व उनके अधीनस्थ किसी भी अधिकारी को नहीं है। इसके लिए निगम के हाउस की भी कोई अनुमति नहीं ली गई। एक सोसायटी को एनजीओ मानकर करोड़ों रुपये की जमीन एक अवैध इकरारनामे के तहत तीन साल के लिए एक संस्था को दे दिया गया। इकरारनामे में दी गई जमीन व क्षेत्रफल की भी जानकारी नहीं है, सिर्फ ऑटो मार्केट सामने लिखकर इकरारनामा किया गया। तत्कालीन निगमायुक्त ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए 12-13 हजार वर्ग गज जमीन गैरकानूनी रूप से एक संस्था को बिना किराये के सुपुर्द कर दी, जबकि नगर सुधार मंडल को इस जमीन पर खुली बोली के माध्यम से कॉमर्शियल प्लॉट बेचे जाने थे।
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लीज कैंसिल करने में नियमों की अनदेखी...
इस मामले में शिकायत के बाद वर्तमान निगम आयुक्त ने जमीन की लीज को कैंसिल करने के आदेश पारित कर दिए। इसमें भी नियमों का पालन नहीं किया गया। लीज के अनुसार निगम एक सप्ताह का नोटिस देकर इसे कैंसिल कर सकता है। निगम अधिकारियों की ओर से एक महीने का समय दिया गया।
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मेरे पास शिकायत आई थी। मैंने जांच के लिए एससीएस को आदेश दिए हैं। इस मामले की गहराई से जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. कमल गुप्ता, शहरी निकाय मंत्री, हरियाणा
इस मामले में पूरी पारदर्शिता बरती गई थी। पहले निगम प्रशासन की शर्तें निर्धारित की गईं थी और फिर अखबार में अभिव्यक्ति की रुचि प्रकाशित करवाया था। इसमें एक ही संस्था ने आवेदन किया था। शर्त यह थी कि तीन साल के लिए यह जमीन दी जाएगी। इस पर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जाएंगी और एक माह के नोटिस पर संस्था को जगह को खाली करना होगा।
- अशोक गर्ग, पूर्व निगमायुक्त