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Hisar News: सभी चेकर की आईडी से पास की गईं फाइलों की होगी जांच
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हिसार। नगर निगम प्रशासन ने चेकर की आईडी का इस्तेमाल कर प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड में गड़बड़ी के मामले की जांच का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत पिछले कुछ महीनों में सभी चेकर की आईडी से पास की गईं फाइलों की जांच की जाएगी। निगम प्रशासन को अन्य चेकर की आईडी से भी इस तरह की गड़बड़ी करने की आशंका है।
बता दें कि निवर्तमान मेयर गौतम सरदाना ने निगम प्रशासन को एक प्रॉपर्टी के टैक्स रिकाॅर्ड से छेड़छाड़ कर उसमें एक महिला का नाम दर्ज करने को लेकर शिकायत की थी। निगम अधिकारियों ने मामले की जांच की तो यह सही निकली। जांच में सामने आया कि एक अधिकारी की आईडी का इस्तेमाल कर यह गलत कार्य किया गया। इस पर अधिकारी की तरफ से आरोपी डाटा एंट्री ऑपरेटर से स्पष्टीकरण मांगा गया। साथ ही इसमें एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का नाम भी सामने आया। मगर दोनों ही कर्मचारी कार्रवाई से पहले ही इस्तीफा देकर चले गए।
यूं की जाएगी जांच
निगम प्रशासन ने सभी चेकर को एक-एक कैटेगरी में बदलाव करने की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। उदाहरण के लिए एक चेकर सिर्फ मोबाइल नंबर में बदलाव कर सकता है और दूसरा सिर्फ प्रॉपर्टी के मालिकाना हक में बदलाव कर सकता है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि कहीं मोबाइल नंबर वाले चेकर ने किसी प्रॉपर्टी के मालिकाना हक में तो बदलाव नहीं किया। अगर किया है तो क्या उच्चाधिकारियों से इसकी अनुमति ली थी।
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इस मामले में कई एंगल से जांच की जा रही है। इस कारण से जांच में थोड़ा समय लगेगा। इस भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। - प्रदीप दहिया, निगमायुक्त
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बता दें कि निवर्तमान मेयर गौतम सरदाना ने निगम प्रशासन को एक प्रॉपर्टी के टैक्स रिकाॅर्ड से छेड़छाड़ कर उसमें एक महिला का नाम दर्ज करने को लेकर शिकायत की थी। निगम अधिकारियों ने मामले की जांच की तो यह सही निकली। जांच में सामने आया कि एक अधिकारी की आईडी का इस्तेमाल कर यह गलत कार्य किया गया। इस पर अधिकारी की तरफ से आरोपी डाटा एंट्री ऑपरेटर से स्पष्टीकरण मांगा गया। साथ ही इसमें एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का नाम भी सामने आया। मगर दोनों ही कर्मचारी कार्रवाई से पहले ही इस्तीफा देकर चले गए।
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यूं की जाएगी जांच
निगम प्रशासन ने सभी चेकर को एक-एक कैटेगरी में बदलाव करने की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। उदाहरण के लिए एक चेकर सिर्फ मोबाइल नंबर में बदलाव कर सकता है और दूसरा सिर्फ प्रॉपर्टी के मालिकाना हक में बदलाव कर सकता है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि कहीं मोबाइल नंबर वाले चेकर ने किसी प्रॉपर्टी के मालिकाना हक में तो बदलाव नहीं किया। अगर किया है तो क्या उच्चाधिकारियों से इसकी अनुमति ली थी।
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इस मामले में कई एंगल से जांच की जा रही है। इस कारण से जांच में थोड़ा समय लगेगा। इस भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। - प्रदीप दहिया, निगमायुक्त