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उद्योगों में कार्यरत 80 प्रतिशत तक मजदूरों ने किया पलायन
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हिसार। लॉकडाउन लगने के साथ मजदूरों के पलायन में भी तेजी आ गई है। स्थिति यह है कि उद्योगों में कार्यरत 80 प्रतिशत तक मजदूर अपने घरों को पलायन कर चुके हैं। इसका असर यह है कि उद्योगों का उत्पादन भी घटकर 40 प्रतिशत तक आ गया है। पिछले वर्ष भी लॉकडाउन व मजदूरों के पलायन के कारण उद्योगों में करीब दो माह तक उत्पादन ठप रहा था।
बता दें कि पिछले वर्ष लॉकडाउन व सरकार की तरफ से कोई इंतजाम न होने के कारण मजदूर वर्ग को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा था। चूंकि अब दोबारा से वहीं स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस बार भी पिछले वर्ष की तरह घर पहुंचने के लिए जद्दोजहद न करनी पड़े, इस वजह से उद्योगों में काम करने वाला ज्यादातर प्रवासी मजदूर वर्ग पलायन कर चुका है।
प्रलोभन भी नहीं रोक सका मजदूरों का
उद्योगपतियों की मानें तो उन्होंने अपने मजदूरों को रोकने के लिए प्रलोभन तक दिया, लेकिन प्रलोभन देने के बावजूद वे नहीं रुके। उन्होंने मजदूरों से कहा कि वे लॉकडाउन में भी उन्हें पूरा वेतन देंगे। अगर उद्योग-धंधे बंद भी हो जाते हैं तो वे उनका रहने और खाने का भी प्रबंध करेंगे।
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फसल कटाई व शादी का बना रहे बहाना
उद्योग मालिकों के अनुसार मजदूर अलग-अलग बहाने बनाकर अपने घरों को जा रहे हैं। कोई कहता है कि उसे फसल कटाई करनी है तो कहता है कि उसके घर में शादी है। बहुत कम मजदूर ऐसे हैं, जो स्पष्ट तौर पर बता रहे हैँ कि लॉकडाउन के कारण वह घर जा रहे हैं।
उत्पादन आधे से भी हुआ कम
उद्योगपतियों की मानें तो अब लॉकडाउन में उत्पादन आधे से भी कम हो गया है। इसका एक कारण मजदूरों की कमी और दूसरा कारण लॉकडाउन है। लॉकडाउन में नए ऑर्डर भी कम हो गए हैं, क्योंकि सब कुछ बंद पड़ा है। फिलहाल वह ज्यादातर माल तैयार करके स्टॉक कर रहे हैं।
शहर में उद्योगों की स्थिति
उद्योगों की संख्या : 300
मजदूरों की संख्या : 20 हजार
उद्योग : स्टेनलेस स्टील, जीआई पाइप, दवा, खाद्य पदार्थ, प्लास्टिक
तीन माह बाद लौटेंगे
झारखंड निवासी अनित, अनिल व राजेश ने बताया कि वे औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक रबड़ की पाइप बनाने वाली फैक्टरी में काम करते हैं। फैक्टरी मालिक ने लॉकडाउन के कारण उत्पादन बंद कर दिया और उन्हें छुट्टी दे दी। इसी वजह से अब वे अपने घर जा रहे हैं और तीन माह के बाद ही वापस आएंगे। फिलहाल वह गोरखधाम एक्सप्रेस से गोरखपुर तक जाएंगे और वहां से ट्रेन बदलकर झारखंड जाएंगे।
40 प्रतिशत रह गया उत्पादन
बड़ी औद्योगिक इकाइयों को छोड़कर ज्यादातर औद्योगिक इकाइयों में फिलहाल मजदूरों की कमी है। इन इकाइयों में कार्यरत करीब 80 प्रतिशत तक मजदूर अपने घरों को पलायन कर चुके हैं। इन इकाइयों में उत्पादन भी गिरकर 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
-अजय बतरा, महासचिव, हिसार उद्योग संघ।
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बता दें कि पिछले वर्ष लॉकडाउन व सरकार की तरफ से कोई इंतजाम न होने के कारण मजदूर वर्ग को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा था। चूंकि अब दोबारा से वहीं स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस बार भी पिछले वर्ष की तरह घर पहुंचने के लिए जद्दोजहद न करनी पड़े, इस वजह से उद्योगों में काम करने वाला ज्यादातर प्रवासी मजदूर वर्ग पलायन कर चुका है।
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प्रलोभन भी नहीं रोक सका मजदूरों का
उद्योगपतियों की मानें तो उन्होंने अपने मजदूरों को रोकने के लिए प्रलोभन तक दिया, लेकिन प्रलोभन देने के बावजूद वे नहीं रुके। उन्होंने मजदूरों से कहा कि वे लॉकडाउन में भी उन्हें पूरा वेतन देंगे। अगर उद्योग-धंधे बंद भी हो जाते हैं तो वे उनका रहने और खाने का भी प्रबंध करेंगे।
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फसल कटाई व शादी का बना रहे बहाना
उद्योग मालिकों के अनुसार मजदूर अलग-अलग बहाने बनाकर अपने घरों को जा रहे हैं। कोई कहता है कि उसे फसल कटाई करनी है तो कहता है कि उसके घर में शादी है। बहुत कम मजदूर ऐसे हैं, जो स्पष्ट तौर पर बता रहे हैँ कि लॉकडाउन के कारण वह घर जा रहे हैं।
उत्पादन आधे से भी हुआ कम
उद्योगपतियों की मानें तो अब लॉकडाउन में उत्पादन आधे से भी कम हो गया है। इसका एक कारण मजदूरों की कमी और दूसरा कारण लॉकडाउन है। लॉकडाउन में नए ऑर्डर भी कम हो गए हैं, क्योंकि सब कुछ बंद पड़ा है। फिलहाल वह ज्यादातर माल तैयार करके स्टॉक कर रहे हैं।
शहर में उद्योगों की स्थिति
उद्योगों की संख्या : 300
मजदूरों की संख्या : 20 हजार
उद्योग : स्टेनलेस स्टील, जीआई पाइप, दवा, खाद्य पदार्थ, प्लास्टिक
तीन माह बाद लौटेंगे
झारखंड निवासी अनित, अनिल व राजेश ने बताया कि वे औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक रबड़ की पाइप बनाने वाली फैक्टरी में काम करते हैं। फैक्टरी मालिक ने लॉकडाउन के कारण उत्पादन बंद कर दिया और उन्हें छुट्टी दे दी। इसी वजह से अब वे अपने घर जा रहे हैं और तीन माह के बाद ही वापस आएंगे। फिलहाल वह गोरखधाम एक्सप्रेस से गोरखपुर तक जाएंगे और वहां से ट्रेन बदलकर झारखंड जाएंगे।
40 प्रतिशत रह गया उत्पादन
बड़ी औद्योगिक इकाइयों को छोड़कर ज्यादातर औद्योगिक इकाइयों में फिलहाल मजदूरों की कमी है। इन इकाइयों में कार्यरत करीब 80 प्रतिशत तक मजदूर अपने घरों को पलायन कर चुके हैं। इन इकाइयों में उत्पादन भी गिरकर 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
-अजय बतरा, महासचिव, हिसार उद्योग संघ।