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Haryana: जहरीले धुएं का भैंसों पर असर, खुले में चरने वाले पशुओं में दूध उत्पादन की अधिक गिरावट

Thu, 09 Nov 2023 03:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो सुरेंद्र दलाल, हिसार (हरियाणा)
सुरेंद्र दलाल, हिसार (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 09 Nov 2023 03:27 PM IST
सार

लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय में चल रहे शोध में यह बात सामने है कि पशुओं में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। डॉ. तरुण की अध्यक्षता में चल रहे रिसर्च में पाया गया कि पहले पशुओं की मौत के कारणों पर गौर नहीं करते थे।

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impact on milk production of buffaloes due to poisonous smoke in Haryana
प्रदूषण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हवा में धुला जहरीला धुआं पशुओं का दूध भी कम कर रहा है। पिछले दस दिन से चल रहे प्रदूषण के खतरनाक स्तर के कारण पशुओं को तनाव हो रहा है। लंबे समय तक ऐसा रहा तो उनके खानपान तथा पाचन पर भी असर पड़ेगा। केंद्रीय भैंस अनुसंधान की रिपोर्ट के अनुसार प्रदूषण के चलते दूध उत्पादन पर 5 से 6 प्रतिशत तक का प्रभाव हो रहा है। खुले में चरने वाले पशुओं में दूध उत्पादन की गिरावट अधिक है।

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पिछले कुछ दिनों से चल रहा अत्याधिक प्रदूषण वाला मौसम मनुष्यों के अलावा पशुओं के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है। देश की सबसे बेहतरीन नस्ल मुर्राह के दूध उत्पादन पर इसका असर दिख रहा है। कुछ पशु पालकों ने पशु वैज्ञनिकों को भैंसों के दुग्ध उत्पादन में गिरावट की शिकायत भेजी है। जिसके बाद हरियाणा के पशु पालन विभाग तथा केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र ने इस पर ब्योरा जुटाना शुरू किया है।
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प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार खुले में चरने वाली भैंसों में प्रदूषण का असर अधिक है। जिसमें 6 प्रतिशत तक की दूध की गिरावट आ रही है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरएस खासा ने बताया कि जिले के ग्रामीण एरिया से पशु पालकों से दूध उत्पादन प्रभावित होने की शिकायतें मिली हैं। प्रदूषण के कारण पशुओं के व्यवहार में भी बदलाव हो सकता है। पशु पालक को अपने पशुओं को बाहर रखने के बजाय अंदर रखने को प्राथमिकता देनी चाहिए। हरा चारा के अलावा कुछ मात्रा में गुड़ देने से पशुओं को प्रदूषण से लड़ने में मदद मिलेगी।
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प्रदेश में 43 लाख भैंस, सबसे अधिक हिसार में...
प्रदेश में करीब 43 लाख से अधिक भैंस, 19 लाख गाय, 28 लाख भेड़, 33 लाख बकरी हैं। वर्ष 2019 में कराई गई पशुगणना के अनुसार प्रदेश में सबसे अधिक 426486 भैंस हिसार में हैं। हिसार में केंद्रीय भैंस अनुसंधान, लुवास, राजकीय पशुधन फार्म में भी हजारों की संख्या में भैंस है।

भैंसों को भी आ रहे हार्टअटैक
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय में चल रहे शोध में यह बात सामने है कि पशुओं में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। डॉ. तरुण की अध्यक्षता में चल रहे रिसर्च में पाया गया कि पहले पशुओं की मौत के कारणों पर गौर नहीं करते थे। अब भैंसों की मौत के बाद उनका भी पोस्टमार्टम कर रहे हैं। लुवास में इको कोर्डियोग्राफी मशीन से भैंसों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है।


अधिकारी के अनुसार
भैंसों पर भी मौसम के प्रदूषण का असर देखा जा रहा है। फिलहाल हमने हमारे संस्थान में उपलब्ध 600 से अधिक भैंसों पर इसका असर पाया है। अगर प्रदूषण का स्तर लंबा रहा तो इसका व्यापक असर हो सकता है। इस बारे में अभी विस्तृत अध्ययन नहीं हुआ है। प्राथमिक आकलन के अनुसार पशुओं में दूध की मात्रा पर इसका प्रभाव हो रहा है। - डॉ. टीके दत्ता, निदेशक, केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र, हिसार।

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