हरियाणा: अधिसूचित सेवाएं निर्धारित समय सीमा में न देने पर वित्त सचिव, पीजीआई रोहतक और एमएसएमई निदेशक तलब
अधिसूचित सेवाएं निर्धारित समय सीमा में न देने पर दो अलग-अलग मामलों में हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, पीजीआईएमएस रोहतक और एमएसएमई के निदेशक को आयोग ने तलब किया है।
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हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, पीजीआईएमएस रोहतक और एमएसएमई के निदेशक को तलब किया है। अधिसूचित सेवाएं निर्धारित समय सीमा में न देने पर दो अलग-अलग मामलों में आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। इन अफसरों को व्यक्तिगत तौर या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आयोग के समक्ष प्रस्तुत होकर जवाब देना होगा।
आयोग के मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने बताया कि शिकायत मिलने पर एमएसएमई विभाग के वरिष्ठ लेखाधिकारी एसके कौशिक को पेश होने के लिए 15 सितंबर को नोटिस जारी किया था। कौशिक और लेखा अधिकारी उषा रानी 27 सितंबर को उनके समक्ष पेश हुए। उन्होंने बताया कि यह स्कीम एमएसएमई निदेशालय की है, जबकि नोटिस उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को जारी किया गया है।
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कौशिक ने लिखित जवाब में बताया कि वित्त विभाग की सीलिंग के चलते 7 दिन की निर्धारित अवधि के अंदर भुगतान नहीं किया जा सका। जब उनसे 45 दिन की अधिसूचित अवधि और 10 माह से अधिक के विलंब के बारे में पूछा गया तो वह कोई जवाब नहीं दे सके।
गुप्ता ने कहा कि यह गंभीर मामला है। इसलिए हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 की सेवा संख्या 130 के तहत समय पर सेवाएं देने में विलंब के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव(वित्त) और निदेशक, एमएसएमई को स्वत: संज्ञान नोटिस जारी किया है। उन्हें व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से 18 अक्तूबर को दोपहर 12:30 बजे आयोग के समक्ष पेश होना होगा।
पीजीआई के पास कोविड 19 से मौतों का सही आंकड़ा नहीं
दूसरा मामला पीजीआईएमएस रोहतक का है। रोहतक के डीसी ने 29 सितंबर को एक ई-मेल के माध्यम से बताया कि पीजीआई के पास कोविड-19 से हुई मौतों की सही जानकारी नहीं है। इसका कारण फाइल गुम होना बताया गया। मौतों का आंकड़ा पहले 23 फिर 80 तक बताया। इससे उनके पास पीजीआई द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी न करने संबंधी शिकायतों की बाढ़ आ गई। पीजीआई निदेशक के कार्यालय ने कई बार मामला उठाने पर भी न तो इस तरफ कोई ध्यान दिया और न ही सरल पोर्टल पर जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड किए।
पीजीआई को सेवाएं देने में विलंब का कारण बताना होगा
गुप्ता ने बताया कि प्रमाण पत्र देने की अधिसूचित समय अवधि 21 दिन है, लेकिन मामले अप्रैल से लंबित हैं। हालांकि, अधिसूचित सेवाओं की सूची में चालू वर्ष के दौरान जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 14 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। निर्धारित समय सीमा में प्रमाण पत्र देने में विफल रहने पर निदेशक पीजीआई को स्वत: संज्ञान नोटिस जारी किया गया है। उन्हें सेवाएं देने में विलंब का कारण बताना होगा। उन्हें 11 अक्तूबर को 11:30 बजे व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोग के समक्ष पेश होना होगा।