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हरियाणा को और बीएड कॉलेजों की जरूरत नहीं: हुड्डा
चंडीगढ़/प्रवीण पाण्डेय
Updated Sat, 06 Jul 2013 01:04 PM IST
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क्वालिटी एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा में और बीएड कालेजों की आवश्यकता को नकार दिया है।
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एमएचआरडी मानव संसाधन विकास मंत्रालय को लिखे पत्र में सीएम हुड्डा का कहना है कि प्रदेश में जो कॉलेज चल रहे हैं उन्हीं में क्वालिटी एजुकेशन मुहैया कराना मुश्किल हो रहा है। इसका कारण राज्य में कॉलेजों की अधिक संख्या होना है।
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इसी कारण प्रदेश के बीएड कॉलेजों की निगरानी के लिए जींद में एक स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर एजुकेशन ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर खोला जा रहा है।
वर्तमान में यह है स्थिति
यूजीसी द्वारा तय मापदंडों के मुताबिक एक विश्वविद्यालय के अधीन 100 से अधिक कॉलेज नहीं होने चाहिए, जबकि हरियाणा में इस समय 472 बीएड कॉलेज हैं, जो कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, सीडीएलयू सिरसा और एमडीयू रोहतक के अधीन हैं।
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इन कॉलेजों में दो सरकारी, 14 एडिड और बाकी सेल्फ फाइनेंस वाले निजी कॉलेज हैं।
इन कॉलेजों में 60 हजार सीटें हैं जो कि पूरी नहीं भर पा रही हैं। पिछले सेशन में करीब 55 हजार विद्यार्थियों ने बीएड में प्रवेश लिया और उससे पिछले सेशन में भी इतने ही छात्रों ने प्रवेश लिया था।
दो साल में बनकर तैयार होगा रिसर्च सेंटर
अब सरकार किसी तरह की क्वालिटी से समझौता नहीं करना चाह रही है। कॉलेज अधिक हो जाएंगे तो शिक्षण कार्य और इंफ्रास्ट्रक्चर से भी समझौता करना पड़ेगा।
इसका हल निकालने के लिए जींद में एक स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर एजूकेशन ट्रेनिंग एंड रिसर्च के लिए साढ़े 23 एकड़ जमीन खरीद ली गई है। उच्च शिक्षा विभाग दो साल में यहां बिल्डिंग बनाकर तैयार कर देगा।
इसके बाद इन सभी बीएड कॉलेजों को इस संस्थान के अधीन कर दिया जाएगा। मान्यता, डिग्री देने से लेकर मॉनीटरिंग तक सभी इस संस्थान के तहत होगा। इससे विश्वविद्यालयों पर बोझ कम हो जाएगा।
अगर जींद में खुलने जा रहे संस्थान के तहत बीएड कॉलेज आ जाएंगे तो विश्वविद्यालयों पर बोझ कम होगा। साथ ही गुणवत्ता भी बेहतर होगी। अभी हम उतनी बारीकी से सभी कालेजों की निगरानी नहीं कर पा रहे हैं, जितनी होनी चाहिए।
- एसएस प्रसाद, वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव उच्च शिक्षा