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हरियाणा: झज्जर में बोले मनोहर लाल, बेटियों को कोख में मत मारो, क्या पता कोख में बेटी नहीं, मेडल पल रहा हो
Thu, 12 Aug 2021 12:10 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 12 Aug 2021 12:10 AM IST
सार
मनोहर लाल ने कहा कि पेड़ हमारे ‘प्राण वायु देवता’ हैं। हरियाणा में इस समय करीब 7 प्रतिशत क्षेत्र में पेड़ लगे हैं, जिनको बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
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झज्जर में कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
बेटियों को कोख में मत मारो, क्या पता कोख में बेटी नहीं, मेडल पल रहा हो। यह कहना है मुख्यमंत्री मनोहर लाल का। वह प्रदेश में लगाए जा रहे ऑक्सीवन की श्रृंखला में बुधवार को गांव खानपुर खुर्द में पांच एकड़ भूमि पर ‘लाडो की बगिया’ ऑक्सीवन का वर्चुअल उद्घाटन कर रहे थे। इस अवसर पर करीब 500 लड़कियों व महिलाओं ने 500 पौधे लगाए, जिनकी देखभाल भी वे स्वयं करेंगी। मुख्यमंत्री ने महिलाओं को तीज पर्व की बधाई दी।
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मनोहर लाल ने कहा कि पेड़ हमारे ‘प्राण वायु देवता’ हैं। हरियाणा में इस समय करीब 7 प्रतिशत क्षेत्र में पेड़ लगे हैं, जिनको बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 3 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पेड़ों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 75 वर्ष से अधिक आयु के पेड़ों की पेंशन का प्रावधान किया है, इनकी देखभाल करने वालों को 2500 रुपये प्रतिवर्ष देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही जो किसान अपने खेतों में पेड़ लगाएंगे उन्हें तीन वर्ष तक 10 हजार रुपये दिए जाएंगे।
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134 गांवों के परिक्रमा मार्ग पर लगाएंगे पंचवटी : मनोहर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुरुक्षेत्र की 48 कोस के परिक्रमा मार्ग पर 134 गांव आते हैं, जिस पर पंचवटी अर्थात पांच प्रकार के पेड़ लगाए जाएंगे। इनका संरक्षण एवं देखभाल वनमित्रों को सौंपा गया है। पौधों की उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए ‘हरियाणा वन प्रबंधन सूचना प्रणाली एप’ है। इसके साथ ही चार और हर्बल पार्क बनाए जाएंगे।
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मोरनी में 5000 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा औषधीय वन
सीएम ने बताया कि मोरनी क्षेत्र में करीब 5000 एकड़ भूमि पर औषधीय वन विकसित किया जा रहा है। गुरुग्राम व रेवाड़ी में फूलों की खेती की जा रही है तथा मुरथल में 116 एकड़ व यमुनानगर में 11 एकड़ भूमि पर फूलों की पैदावार को बढ़ावा दिया जा रहा है।