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खुदाई में निकली डेढ़ हजार साल पुरानी प्रतिमा
रेवाड़ी/गोपाल वशिष्ठ
Updated Wed, 11 Dec 2013 11:34 PM IST
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मोहल्ला मंढई में जैन मंदिर बनाने के लिए चल रही खुदाई के दौरान प्रथम
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तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की एक प्राचीन काले पाषाण पर उकेरी गई तीन फुट ऊंची
प्रतिमा मिली है।
काम में जुटे श्रद्धालुओं को खुदाई के दौरान प्राचीन महत्व की चीजें मिलने की थोड़ी सी भी उम्मीद नहीं थी। यही वजह थी कि मंगलवार रात जेसीबी मशीन से चली खुदाई के दौरान मजदूरों ने मलबे के साथ ही इस प्रतिमा को ट्रैक्टर में लाद दिया और कई किलोमीटर दूर मलबे के साथ डाल दिया। मलबा पलटते समय प्रतिमा ऊपर आ गिरी तो मजदूरों ने जैन समाज के पदाधिकारियों को सूचित किया। बाद में प्रतिमा को प्राचीन मंदिर के निकट बनाए गए मंदिर में रखा गया। प्रतिमा मिलने का समाचार जैसे ही समाज के लोगों को मिला तो सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भगवान केे दर्शन के लिए मंदिर पहुंच गए।
इस प्रतिमा को अति प्राचीन और लगभग डेढ़ हजार वर्ष पूर्व कि बताया जा रहा है। मंदिर प्रबंधन समिति के प्रधान वीरेंद्र कुमार जैन ने बताया कि संभवत: सैकड़ों वर्ष पूर्व आक्रमणकारियों से बचाने के लिए इस भव्य प्रतिमा को भूगर्भ में रख दिया गया होगा। प्रतिमा के परीक्षण के लिए बाहर से जैन विद्वानों को बुलाया जा रहा है।
मंदिर के पुनर्निमाण का चल रहा काम
नगर के भैरू चौक के पास मोहल्ला मढई स्थित लगभग 400 साल पुराने जैन बड़ा मंदिर का भवन असुरक्षित बताए जाने पर इसके पुनर्निर्माण का निर्णय मंदिर प्रबंधन समिति ने लिया था। इसके बाद मंदिर की प्रतिमाआें को सामने ही अस्थायी मंदिर बनाकर उसमें विराजमान कर दिया गया था। बेसमेंट के लिए प्लाट के एक हिस्से में पिछले कई दिनों से खुदाई का काम चल रहा था। लगभग 14-15 फुट नीचे तक की खुदाई हो चुकी थी और यह खुदाई लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रात को जेसीबी मशीन के द्वारा की जा रही थी।
यूं मिली प्रतिमा
मंगलवार रात को एक ट्रैक्टर में मलबा लादकर चालक सोनू गढ़ी बोलनी रोड पर गया था और ट्रैक्टर खाली करते समय उसे एक बड़ा पत्थर दिखाई दिया। नजदीक से देखने पर वह प्रतिमा नजर आई। उसने तुरंत मंदिर प्रबंधन समिति के प्रधान वीरेंद्र कुमार जैन और सह सचिव राहुल जैन को इसकी जानकारी दी। दोनों पदाधिकारी अन्य साथियों के साथ मौके पर पहुंचे। उनका उस समय खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब उन्होंने इस प्रतिमा को देखा। प्रतिमा को अस्थायी मंदिर में बुधवार सुबह स्थापित कर दिया गया। इस मौके पर समाज के प्रधान संतोष कुमार जैन, मंदिर के प्रधान वीरेंद्र कुमार जैन, सचिव सुरेंद्र कुमार जैन, सहसचिव राहुल जैन, जैन समाज के पूर्व प्रधान अजीत प्रसाद जैन, पदम कुमार जैन और अरविंद कुमार जैन आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इस प्रतिमा के साथ रक्षक देवी चक्रेश्वरी यक्षिणी की प्रतिमा भी पत्थर पर उकेरी गई है। जिससे यह संदेश मिला कि यह प्रतिमा प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की है।
काम में जुटे श्रद्धालुओं को खुदाई के दौरान प्राचीन महत्व की चीजें मिलने की थोड़ी सी भी उम्मीद नहीं थी। यही वजह थी कि मंगलवार रात जेसीबी मशीन से चली खुदाई के दौरान मजदूरों ने मलबे के साथ ही इस प्रतिमा को ट्रैक्टर में लाद दिया और कई किलोमीटर दूर मलबे के साथ डाल दिया। मलबा पलटते समय प्रतिमा ऊपर आ गिरी तो मजदूरों ने जैन समाज के पदाधिकारियों को सूचित किया। बाद में प्रतिमा को प्राचीन मंदिर के निकट बनाए गए मंदिर में रखा गया। प्रतिमा मिलने का समाचार जैसे ही समाज के लोगों को मिला तो सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भगवान केे दर्शन के लिए मंदिर पहुंच गए।
इस प्रतिमा को अति प्राचीन और लगभग डेढ़ हजार वर्ष पूर्व कि बताया जा रहा है। मंदिर प्रबंधन समिति के प्रधान वीरेंद्र कुमार जैन ने बताया कि संभवत: सैकड़ों वर्ष पूर्व आक्रमणकारियों से बचाने के लिए इस भव्य प्रतिमा को भूगर्भ में रख दिया गया होगा। प्रतिमा के परीक्षण के लिए बाहर से जैन विद्वानों को बुलाया जा रहा है।
मंदिर के पुनर्निमाण का चल रहा काम
नगर के भैरू चौक के पास मोहल्ला मढई स्थित लगभग 400 साल पुराने जैन बड़ा मंदिर का भवन असुरक्षित बताए जाने पर इसके पुनर्निर्माण का निर्णय मंदिर प्रबंधन समिति ने लिया था। इसके बाद मंदिर की प्रतिमाआें को सामने ही अस्थायी मंदिर बनाकर उसमें विराजमान कर दिया गया था। बेसमेंट के लिए प्लाट के एक हिस्से में पिछले कई दिनों से खुदाई का काम चल रहा था। लगभग 14-15 फुट नीचे तक की खुदाई हो चुकी थी और यह खुदाई लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रात को जेसीबी मशीन के द्वारा की जा रही थी।
यूं मिली प्रतिमा
मंगलवार रात को एक ट्रैक्टर में मलबा लादकर चालक सोनू गढ़ी बोलनी रोड पर गया था और ट्रैक्टर खाली करते समय उसे एक बड़ा पत्थर दिखाई दिया। नजदीक से देखने पर वह प्रतिमा नजर आई। उसने तुरंत मंदिर प्रबंधन समिति के प्रधान वीरेंद्र कुमार जैन और सह सचिव राहुल जैन को इसकी जानकारी दी। दोनों पदाधिकारी अन्य साथियों के साथ मौके पर पहुंचे। उनका उस समय खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब उन्होंने इस प्रतिमा को देखा। प्रतिमा को अस्थायी मंदिर में बुधवार सुबह स्थापित कर दिया गया। इस मौके पर समाज के प्रधान संतोष कुमार जैन, मंदिर के प्रधान वीरेंद्र कुमार जैन, सचिव सुरेंद्र कुमार जैन, सहसचिव राहुल जैन, जैन समाज के पूर्व प्रधान अजीत प्रसाद जैन, पदम कुमार जैन और अरविंद कुमार जैन आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इस प्रतिमा के साथ रक्षक देवी चक्रेश्वरी यक्षिणी की प्रतिमा भी पत्थर पर उकेरी गई है। जिससे यह संदेश मिला कि यह प्रतिमा प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की है।