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जींद: उचाना पहुंचे गुरनाम सिंह चढ़ूनी, बोले-ऐलनाबाद के लोग बीजेपी-जेजेपी को वोट न दें, किसी को दे दें
Sat, 16 Oct 2021 11:10 AM IST
प्रमोद कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, उचाना (जींद)
संवाद न्यूज एजेंसी, उचाना (जींद)
Published by: प्रमोद कुमार
Updated Sat, 16 Oct 2021 11:10 AM IST
सार
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी शनिवार को जींद के उचाना पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बीजेपी-जेजेपी सरकार पर निशाना साधा। कहा कि ऐलनाबाद उपचुनाव में लोगों को इसे वोट नहीं देना चाहिए। चाहे वे किसी भी पार्टी को दे दें। उन्होंने कहा कि गुलाबी सुंडी ने किसान को तबाह कर दिया है।
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उचाना में पत्रकारों से बात करते गुरनाम सिंह चढ़ूनी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता व भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि गुलाबी सुंडी के कारण कपास उत्पादक किसान तबाह हो गया है। ऐसे में बीटी कॉटन का बीज निकालने वालों के खिलाफ भी केस दर्ज होना चाहिए। चढ़ूनी बीकेयू के जिलाध्यक्ष आजाद पालमा के निवास पर पहुंचे थे। शनिवार सुबह उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार राजहठ धर्मी है। राजहठ धर्मिता राज और परिवार को तबाह करती है। उदाहरण रावण का ले लीजिए, यह बीजेपी के लिए नुकसानदायक रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐलनाबाद उपचुनाव में हम यह कहेंगे कि बीजेपी-जेजेपी को वोट न दें। बाकी किसी को वोट दे दें।
यह भी पढ़ें-नारनौल: खाद के लिए मारामारी, बिक्री केंद्र के बाहर सुबह चार बजे ही लग गई किसानों की लंबी कतार
किसानों की बात मनवाएंगे, चलता रहेगा आंदोलन
चंढ़ूनी ने बाजरे की एमएसपी पर खरीद के बारे में कहा कि सरकार ने बाजरे की खरीद में 600 रुपये भावांतर देने की व्यवस्था की है। रेट का अंतर बहुत ज्यादा है। मंडी में बाजरा 1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा हैं। 600 रुपये और मिलाकर 1800 रुपये प्रति क्विंटल होता है। वहीं, एमएसपी 2250 रुपये है। फिर भी किसान को 450 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान है। जब तक किसानों की बात नहीं मानी जाती, तब तक आंदोलन चलता रहेगा।
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चंढ़ूनी ने बाजरे की एमएसपी पर खरीद के बारे में कहा कि सरकार ने बाजरे की खरीद में 600 रुपये भावांतर देने की व्यवस्था की है। रेट का अंतर बहुत ज्यादा है। मंडी में बाजरा 1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा हैं। 600 रुपये और मिलाकर 1800 रुपये प्रति क्विंटल होता है। वहीं, एमएसपी 2250 रुपये है। फिर भी किसान को 450 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान है। जब तक किसानों की बात नहीं मानी जाती, तब तक आंदोलन चलता रहेगा।
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