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विकास और निवेश मुद्दे पर सू की ने की सलाह
Gurgaon
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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गुड़गांव। नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी म्यांमार की चेयरपर्सन आंग सान सू की बृहस्पतिवार को गुड़गांव-फरीदाबाद रोड स्थित द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टिट्यूट (टेरी) पहुंचीं। यहां वह स्थायी विकास और निवेश के मुद्दे पर सलाह लेने पहुंची थीं। उन्होंने टैरी के महानिदेशक डॉ. आरके पचौरी से मुलाकात की। इस दौरान सू की ने विकास के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा विषय पर भी विचार-विमर्श किया। उन्होंने यहां पर पौधरोपण कर लोगों को प्रकृति के साथ रहने का संदेश दिया।
आंग सान सू की ने कहा कि आज म्यांमार में निवेश की सख्त जरूरत है, लेकिन विकास के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखना अहम है। स्थायी निवेश के लिए सू की ने कहा कि टेरी की ओर से म्यांमार में पहले से ही काम किया जा रहा है। वर्ष 2009 में टेरी ने म्यांमार के तूफान पीड़ित गांव में बिजली आपूर्ति के लिए बायोगैस प्लांट लगाया था। क्योंकि म्यांमार में वर्ष 2008 में नर्गिस तूफान ने भारी तबाही मचाया था। सू की ने कहा कि तकनीकी विकास के साथ-साथ ईको-फ्रेंडली होने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी, इसके बारे में उन्होंने टैरी के विशेषज्ञों से खुलकर बात की।
सू की ने कहा कि म्यांमार प्राकृतिक संपदा की दृष्टि से बहुत धनी है। इसके बाद भी वहां निवेश की दरकार है। उन्होंने कहा कि वह अपने देश में उत्तरदायित्वपूर्ण निवेश चाहती हैं। उन्होंने कहा किक शहरीकरण के दबाव में प्रकृति की सुंदरता के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। इस मौके पर डॉ. पचौरी ने कहा कि भारत और म्यांमार एक जैसी समस्याओं को झेल रहे हैं। इसलिए दोनों में गरीबी उन्मूलन और वैज्ञानिक विकास की दिशा में मिलकर काम करना होगा। सू की ने टेरी स्थित रिसोर्स इफिसिएंट टेरी रिट्रीट फॉर इनवायरमेंटल अवेयरनेस एंड ट्रेनिंग (आरईटीआईईएटी) का भी दौरा किया।
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आंग सान सू की ने कहा कि आज म्यांमार में निवेश की सख्त जरूरत है, लेकिन विकास के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखना अहम है। स्थायी निवेश के लिए सू की ने कहा कि टेरी की ओर से म्यांमार में पहले से ही काम किया जा रहा है। वर्ष 2009 में टेरी ने म्यांमार के तूफान पीड़ित गांव में बिजली आपूर्ति के लिए बायोगैस प्लांट लगाया था। क्योंकि म्यांमार में वर्ष 2008 में नर्गिस तूफान ने भारी तबाही मचाया था। सू की ने कहा कि तकनीकी विकास के साथ-साथ ईको-फ्रेंडली होने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी, इसके बारे में उन्होंने टैरी के विशेषज्ञों से खुलकर बात की।
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सू की ने कहा कि म्यांमार प्राकृतिक संपदा की दृष्टि से बहुत धनी है। इसके बाद भी वहां निवेश की दरकार है। उन्होंने कहा कि वह अपने देश में उत्तरदायित्वपूर्ण निवेश चाहती हैं। उन्होंने कहा किक शहरीकरण के दबाव में प्रकृति की सुंदरता के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। इस मौके पर डॉ. पचौरी ने कहा कि भारत और म्यांमार एक जैसी समस्याओं को झेल रहे हैं। इसलिए दोनों में गरीबी उन्मूलन और वैज्ञानिक विकास की दिशा में मिलकर काम करना होगा। सू की ने टेरी स्थित रिसोर्स इफिसिएंट टेरी रिट्रीट फॉर इनवायरमेंटल अवेयरनेस एंड ट्रेनिंग (आरईटीआईईएटी) का भी दौरा किया।
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